Ayodhya

शिशु कुंज माध्यमिक विद्यालय में रामनवमी पर श्रीराम रूप सज्जा का आयोजन , निकाली झांकियां

 

टांडा,अम्बेडकरनगर। विवेकानन्द शिशु कुञ्ज वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनटीपीसी टाउनशिप में आज राम नवमी के अवसर पर श्रीराम रूप सज्जा का आयोजन किया गया। इस पुनीत कार्यक्रम में विद्यालय के प्राथमिक विभाग के 27 भैया बहन श्रीराम के मनमोहक रूप में उपस्थित हुए। विद्यालय के प्रधानाचार्य वीरेन्द्र वर्मा ने श्री राम रूप में उपस्थित आए सभी भैया बहनों का तिलक वन्दन व पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। आरती थाल सजाकर श्रीराम रूप में सभी मनमोहक छवियों की आरती की। उन्हे मिष्ठान व फल का भोग लगवाया। विद्यालय की रंजना ,मोनिका , रीना , ममता शैलजा आदि आचार्या बहनों और मैया कुसुम व सीमा ने मधुर आवाज में भजन व देवी गीत गाए। आचार्य सीता राम ने भी भय प्रकट कृपाला दीन दयाला, शिव स्त्रोत, व कई भजन गाकर सभी का मन मोहा। सुधीर मिश्र आचार्य ने भी भगवान श्रीराम के बचपन व शिक्षा ग्रहण करने के लिए उनकी गुरुकुल परम्परा का सटीक वर्णन किया। अन्त में विद्यालय के प्रधानाचार्य वीरेन्द्र वर्मा ने श्रीराम रूप सज्जा कार्यक्रम की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि जब कोई भैया या बहन किसी दिव्य गुण सम्पन्न व्यक्तित्व की भूमिका में आता है तो उस के जीवन की आदतें और उसके वन्दनीय स्वभाव का जीवन में आंशिक ही सही पर समावेश होता है। श्री राम के जीवन का सार तो हम सभी के लिए एक अनुकरणीय आदर्श है। श्रीराम के रूप में सजे भैया बहनों को उम्र के हर पड़ाव पर जब भी यह स्मरण आयेगा कि हम बचपन में कभी राम बने थे तो किसी भी स्थिति में कोई अनैतिक आचरण करने से पूर्व इस रूप का भान अवश्य आएगा। अतः आप सभी इस रूप की मर्यादा का आजीवन अनुपालन करेंगे ऐसा विश्वास है साथ ही जो भैया बहन दर्शक रूप में इन राम रूप में आए दिव्य रूपों का दीदार कर रहे हैं उन्हें भी भगवान श्री राम के आचरण का जीवन के हर काल खण्ड में अनुकरण करना चाहिए। बाल्यकाल में राम व उनके चारों भाईयों ने एक साथ ऋषि विश्वामित्र के गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की जिसका वर्णन बाबा तुलसी दास ने श्री राम चरित मानस में करते हुए लिखा है कि गुरु गृह पढ़न गए रघुराई। अल्प काल विद्या सब पाई। अतः हम सभी भैया बहनों को इन पंक्तियों को अपने आचरण का घटक बनाने का भरसक प्रयास करना चाहिए। सीखने के लिए बाल्यकाल सबसे अच्छा अवसर है इस अवधि में मन लगाकर पढ़ने का संकल्प करें। माता पिता व गुरु की आज्ञा ही जीवनोद्देश्य बने। राज्याभिषेक के समय खुशी के क्षण में भी माँ की आज्ञा मानकर श्री राम हँसते हुए वन प्रस्थान करते हुए कहते हैं मातु दीन मोहि कानन राजू उन्हें कोई मलाल न हुआ और माता सीता व अनुज लक्ष्मण जी के साथ वन गमन करते हैं। ऐसे ही हम सभी माता पिता व गुरु के वचनों को जीवन का आधार बनाने का संकल्प लें तभी आज के कार्यक्रम की सार्थकता सिद्ध होगी। सभी भैया बहनों ने भी श्री राम रूप में आए दिव्य रूपों का दर्शन किया। इस पुनीत कार्यक्रम में सभी भैया बहन, आचार्य परिवार व कर्मचारी भैया मैया उपस्थित रहे।

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