भ्रष्टाचार की दास्तांन बयां कर रहे शवों के लिए निर्माणाधीन अंत्येष्टि स्थल

अंबेडकरनगर। शवों के अंतिम संस्कार के लिए बनाए जा रहे अन्त्येष्टि स्थल भ्रष्टाचार की कहानी कह रही है। प्रकरण भियांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत गारोपुर का है। ग्राम पंचायत के दक्षिणी क्षोर स्थित मंजूषा (मँझुई) नदी के तट पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए लगभग 50 लाख रुपए की लागत से अंत्येष्टि स्थल का निर्माण किया जा रहा। प्रदेश सरकार की अन्त्येष्टि स्थल योजना के तहत 24 लाख रुपए की धनराशि बीते वर्ष जारी की गई थी।इस धनराशि से स्टोर रुम, शव यात्रा में शामिल लोगों के बैठने के लिए हाल और तीन शौचालय का निर्माण किया गया है।इसके अलावा शवों के अंतिम संस्कार के लिए लोहे का पिलर बनाकर टीन शेड का निर्माण किया गया है। राज्य वित्त केंद्र वित्त मनरेगा आदि योजना से चहारदीवारी, इंडिया हैंडपंप पम्प इंटरलॉकिंग का निर्माण कराया गया है। यहां लगे पेड़ो के चारों तरफ ईंट जोड़कर चबूतरा निर्माण की प्रक्रिया जारी है। उक्त योजना का लगभग 25 लाख रुपए खर्च की जानकारी मिली है।
टूटने लगी टीन शेड की फर्श
शवदाह स्थल का हिन्दमोर्चा टीम ने शनिवार को पड़ताल किया। शवों के अंतिम संस्कार के लिए बने टीन शेड की फर्श घटिया निर्माण की वजह से टूटने लगी है। इतना ही नहीं शव रखने के लिए बने स्थल की प्लास्टर उखड़ गई।यह हाल तब है जब आज तक यहां कोई अंतिम संस्कार तक किसी का नहीं गया है।
सीढ़ी पर लग रहा दोयम दर्जे की ईंट
अंतिम संस्कार के दौरान पानी तक पहुंचने के लिए सीढ़ी का निर्माण किया जा रहा है। सीढ़ी निर्माण में दोयम दर्जे की ईंट का प्रयोग किया जा रहा है जो परिसर में रखा गया है।इतना ही नहीं इसकी चुनाई में लाल बालू के साथ ही सफेद बालू का प्रयोग किया जा रहा है। दोयम दर्जे की ईंट और सफेद बालू का प्रयोग भ्रष्ट्राचार की कहानी बयां कर रहा है।
अधूरा पड़ा है सार्वजनिक शौचालय
शब यात्रा में शामिल होकर अन्त्येष्टि स्थल पहुंच रहे लोगो के लिए तीन कमरे का शौचालय का निर्माण किया गया है। शौचालय का कमरा बनाकर रंग रोगन कर दिया गया है। अन्दर टोटी बाल्टी, टंकी समेत अन्य उपकरण नहीं लगाए गए हैं।
बोली खंड विकास अधिकारी
अन्त्येष्टि स्थल के निर्माण में कितने रुपए की लागत लगी है जानकारी नहीं है। योजना पूरी हो गई है अथवा नहीं इसकी भी जानकारी प्रधान अथवा सचिव ही बता सकते है।
बजट की जानकारी से सचिव का इनकार
यहां तक बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया गतिशील है। बिजली पहुंचने के बाद ही शौचालय में टोटी टंकी समेत अन्य उपकरण लगाया जाएगा।इस अन्त्येष्टि स्थल निर्माण में कितने लाख रुपए खर्च किए गए है जानकारी से इनकार किया।