Ayodhya

जिले की पशुशालाओं में अव्यवस्था का अम्बार,भीषण गर्मी में चारा व पानी के अभाव से जूझ रहे गोवंश

  • जिले की पशुशालाओं में अव्यवस्था का अम्बार,भीषण गर्मी में चारा व पानी के अभाव से जूझ रहे गोवंश
  • शिकायतें होने के बावजूद किसी जिम्मेदार पर असर नहीं,लोग लगा रहे भ्रष्टाचार का आरोप
  • सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की शासन से टीम गठित कर गोशालाओं की व्यवस्था की जांच की मांग

अम्बेडकरनगर। जिले की पशुशालाओं में गोवंशों की बेहतर देख-रेख व व्यवस्था न होने से उनकी बेमौत मौत हो रही है। जिम्मेदार अधिकारी व प्रधान उन पर खर्च होने वाले बजट में बंदरबांट को जुटे हैं। शिकायतें होने पर लीपापोती करना उनकी आदत में शुमार हो गया है जिसका मुख्य कारण निष्पक्ष जांच न होना बताया जा रहा है।
ज्ञात हो कि 2017 के पूर्व में जिन दलों की सरकारें रहीं उस दौरान गोवंशों की तस्करी होती रही जिसका बिरोध हिन्दू संगठनों द्वारा जोरों पर था। जैसे ही सूबे में पूर्ण बहुमत में भाजपा आई और मुख्यमंत्री के पद पर योगी आदित्यनाथ आसीन हुए। उनके द्वारा इस पर ठोस कदम उठाया गया। पहले ही कैबिनेट बैठक में सभी स्लाटर हाउस बंद करवाये गये और गोवंशों की कहीं भी तस्करी अथवा उनके बध होने के मामले आने पर सम्बंधित के खिलाफ एफआईआर जैसी कार्यवाही का फरमान जारी हो गया। इस आदेश में पश्चात गोवंशों के बध पर काफी अंकुश लग गया। इन गोवंशों की सुरक्षा के लिए सभी जिलों में पशुशालाओं की स्थापना की गयी जहां उनकी देख-रेख के लिए कर्मचारी तैनात किये गये। व्यवस्था में बजट भी अवमुक्त किया जाने लगा किन्तु इस पशुशालाओं की व्यवस्था में लापरवाही व भ्रष्टाचार के चलते खुलेआम गोवंश सड़कों पर घूम रहे है और किसानों की फसल का सफाया कर रहे हैं। पशुशालाओं की व्यवस्था के लिए प्रधान से लेकर सम्बंधित गांवों के सचिव ,बीडीओ व पशु चिकित्साधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गयी है। इसके बावजूद भी पशुशालाओं की क्षमता के अनुरूप उनके गोवंश है और जो हैं भी उनके सही ढंग से देख-रेख होने से आसामयिक मौतें आम बात हो गयी है। किसी पशुशाला में निर्धारित मानक से पशुओं को चारा नहीं मिला रहा है और न ही इस भीषण गर्मी में जरूरत के अनुसार पानी। इस अव्यवस्था को लेकर स्थानीय लोग शिकायतें कर रहे है जिसकी खबरें भी मीडिया की सुर्खियों में हैं। इसके उपरान्त निष्पक्ष जांच किसी भी पशुशाला की नहीं हो पा रही है बल्कि शिकायत कर्ता और मीडिया को ही अधिकारी उनसे बलैक मेंलिंग जैसे आरोप लगाकर अपने को दूध का धुला साबित करने में तुले हैं। इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध वर्गीय लोगों का कहना है कि यदि डीएम अथवा शासन स्तर से टीम गठित करके औचक निरीक्षण कराया जाए तो पशुशालाओं पर व्यय होने वाली धनराशि में जो प्रधान व सचिव से लेकर अन्य जिम्मेदार बंदरबांट कर रहे हैं स्वतः सामने आ जायेगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो इस सभी के घोटाला पर अंकुश लग पाना संभव नहीं है।

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