गोरखपुर: पोखरा बना कूड़े-करकट का डंपिंग यार्ड, कुम्भकर्णी निद्रा में सो रहे विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार

गोरखपुर। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में नौकरशाही की लापरवाहियों का एक वाक्या सामने आया है। जो कहीं न कहीं मुख्यमंत्री की छवि को आमजन की नजर में खराब करने का प्रयास भी प्रतीत होता है।

मामला गोरखपुर के तारामंडल निकट गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित बुद्ध विहार पार्ट-C कालोनी का है जहां एक आर्टिफिशियल पोखरे का सौंदर्यीकरण बजट पास होने के पश्चात उसकी साफ-सफाई का कार्य ठेकेदार द्वारा जीडीए 2 वर्ष पूर्व कराती है परंतु

इसके कुछ ही समय पश्चात  पोखरे के भीतर घास-फूस फिर से अपना डेरा जमा लेते हैं तथा जंगल की ओर से रेल विहार कॉलोनी होते हुए आ रहे एक नाले की सारी गंदगी और कूड़ा-करकट पोखरे के अंदर इकट्ठा होने लगता है।

जिसके फलस्वरूप पोखरे के आस-पास के सभी निवासियों को साँप, बिच्छू आदि का खतरा निरंतर बना रहता है तथा मच्छरों की तो भरमार सी हो गयी है। इस संबंध में मोहल्ले के निवासियों द्वारा शिकायत करने के पश्चात भी जिम्मेदारों के कान में जूँ नही रेंग रही है।

वैश्विक महामारी को भय जो निरंतर आम जनमानस के दिलो-दिमाग में घर कर गया है। जिससे बचाव को लेकर प्रत्येक व्यक्ति जहाँ सभी प्रकार की सावधानियां बरत रहा है। वहीं पार्ट-C स्थित कॉलोनी वासियों का दर्द सुनने वाला कोई भी नही है।

कॉलोनी वासियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कोरोना तो था ही परंतु इस गंदगी से भरे पोखरे के चलते हम और भी अन्य जानलेवा बीमारियों से घिर गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ कूड़ा डालने के लिए एक कूड़ाघर का निर्माण भी जीडीए द्वारा कराया गया परंतु

जिस स्थान पर यह निर्माण हुआ वह भी विवादित हो गया। जिसके चलते उन्हें कूड़ा निस्तारण में भी काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान सैनिटाइजेशन का कार्य भी न के बराबर कराया गया।

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