गांव से लेकर शहर तक, पुलिस से लेकर राजस्व विभाग तक, अधिकारी व कर्मचारी दिन रात भ्रष्टाचार की सीढ़ी चढ़ हो रहे है माला माल

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अंबेडकरनगर। सरकार का भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति जमीनी हकीकत से कोसो दूर है। हालात यह है कि जब से सरकार ने जीरो टाॅलरेंस नीति की घोषणा की है तब से लेकर आज तक भ्रष्टाचार का खेल चरम पर है। गांव से लेकर शहर तक,पुलिस से लेकर राजस्व विभाग समेत प्रदेश के अन्य सभी विभाग में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी दिन रात भ्रष्टाचार की सीढ़ी चढ़ माला माल हो रहे है।
आज हम चर्चा करते हैं प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायतों में बने शौचालयों का। जलालपुर ब्लॉक में कुल 120 ग्राम पंचायत है। केंद्र में भाजपा सरकार बनते ही महिलाओं व बेटियों को खुले में शौच न जाना पड़े, यही नही खुले में शौच न करने से वायु प्रदूषण का खतरा कम हो जाता है।
गांवो में शौचालय निर्माण के लिए प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की धनराशि जारी किया गया। तत्समय ग्राम प्रधान खुद ही ठेकेदार बन गए और भ्रष्टाचार से रुपया कमाने के चक्कर में लाभार्थियों के खाता में रुपया न भेजकर स्वयं निर्माण में जुट गए।
लाभार्थियों को एक हजार दोयम दर्जे की ईंट जिसकी कीमत लगभग 3 हजार रुपये,600 रुपया का दरवाजा, 250 रुपया की सीट, 10 फिट पाइप मिलाकर कुल 7 हजार रुपये कीमत का सामान लाभार्थियों को दे दिया गया जो लाभार्थी अपने जेब से रुपया खर्च कर सकते थे। उन्होंने अपने जेब से धनराशि लगाकर शौचालय का निर्माण करा उपयोग शुरू कर दिया किन्तु जिन लाभार्थियों के पास रुपया की कमी थी वे स्वयं निर्माण में अक्षम थे, उनका शौचालय आज भी अपूर्ण है। महज स्वच्छ भारत योजना से ग्राम प्रधान व सचिवों ने लाखों रुपये कमा लिए और लाभार्थियों के शौचालय का निर्माण पूरा हुआ ही नही हुआ।
हास्यास्पद तो यह है कि गांव में दर्जनों परिवार खुले में शौच करने को विवश है और गांव को शौच से मुक्ति की घोषणा भी कर दिया गया। रुदौली अदाई ग्राम पंचायत के कुलहियापट्टी, सुरहुरपुर, जफरपुर मुर्गजार, रुकुनपुर, सल्लाहपुर समेत अन्य ग्राम पंचायतों में शौचालय में हुए भ्रष्टाचार को देखा जा सकता है। सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की पोल खोलती एक तथ्यात्मक खबर शौचालय में किया गया भ्रष्टाचार है।
प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल इस योजना का भी वही हश्र हुआ जो अन्य योजनाओं का हुआ। स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाये गये शौचालयों के बाबत मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री समेत जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों से की गई लिखित शिकायत पर भी जांच व कार्यवाही सिफर रही और सचिवों व ग्राम प्रधानों को खुल्लम खुल्ला भ्रष्टाचार करने की छूट मिल गई।

Report: Hindmorcha Team Ambedkarnagar 

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