आपूर्ति विभाग की मनमानी का परिणाम भुगतने को मजबूर हो गये है जिले के गरीब उपभोक्ता

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⏺ हर महीने लगभग 10 हजार लोगों के राशन कार्ड निरस्त व यूनिट जोड़ने का चल रहा है खेल, शिकायत पर नहीं होती सुनवाई
⏺ विभाग में तैनात अधिकारी, पूर्ति निरीक्षकों और संविदा पर तैनात किये गये कम्प्यूटर आपरेटरों की साजिश का लोग लगा रहे आरोप
⏺संकट के इस दौर में तमाम गरीब और पात्र लोग सरकारी राशन से हो रहे वंचित फिर भी डीएसओ की सेहत पर कोई असर नहीं

(वी के त्रिपाठी)
अम्बेडकरनगर। जिले में पूर्ति विभाग का भ्रष्टाचार और मनमानी का परिणाम जिले के गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग के लोगों ने हर महीने मोटी रकम कमाने का बहुत ही नायाब तरीका अपना लिया है, हर महीने लगभग 10 हजार के आसपास अन्त्योदय व पात्र गृहस्थी के कार्डों को सूची से विलोपित कर दिया जाता है। जिससे बड़ी संख्या में लोगों को सरकारी राशन से बंचित होना पड़ रहा है।
विभाग के लोग जिनका राशन कार्ड निरस्त करते है वह कोटेदारों के सिर पर ठीकरा फोड़ते हैं किन्तु इसके लिये जिम्मेदार कोटेदार नहीं बल्कि पूर्ति महकमा ही है। दौड़-धूप करने के पश्चात पुनः नया राशन कार्ड नहीं बनवा पाते तो थक-हार कर अपने घर बैठ जाते हैं और कई लोग ऐसे होते हैं जो विभाग के लोगों की खुशामत करते हैं ता उनकों 5 सौ रूपया विभाग में सुविधा शुल्क देना पड़ता है।
इस बीच पुनः नया कार्ड बनने तक लगभग 6 महीना या उससे भी अधिक समय तक सरकारी राशन से बंचित होना पड़ता है और विभाग के लोग हर महीने ऐसा फण्डा अपना कर 5 से 10 लाख रूपया तक कार्ड बनाने अथवा यूनिट सुधार कराने के नाम पर लेकर अपनी जेब भर रहे हैं।
गौरतलब रहे जिले का पूर्ति महकमा इस समय भ्रष्टाचार की दलदल में इस कदर डूबता जा रहा है कि निकलने का नाम नहीं ले रहा है जिले के बड़े हाकिम भी पूर्ति विभाग के इस भ्रष्टाचार और मनमानी से वाकिब नहीं है। विभाग के अधिकारी है तो बहुत आसान सा तरीका अपना कर हर महीने 5 से 10 लाख रूपया पुनः कार्ड बनाने व घटी हुई यूनिट को बढ़ाने के नाम पर आसानी से वसूल कर लेते हैं। यह सिलसिला सालों से चल रहा है और इस काम में पूर्ति निरीक्षक अकबरपुर को महारत हासिल है।
लाक डाउन में में विभाग की साजिस के चलते हजारों लोगों का कार्ड निरस्त कर दिया गया और लोग सरकारी राशन पाने से बंचित होते आ रहे हैं। अकबरपुर नगर के फतेहपुर पकड़ी के निवासी पीयूष पुत्र स्व0 ओम प्रकाश, मीरानपुर निवासी कई लोगों का राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया है। इस प्रकार से देखा जाये जतो जिला मुख्यालय स्थित अकबरपुर नगर में ही 1000 के आस पास लोग पाये जा सकते हैं कि जो कार्ड निरस्त करने के कारण सरकारी राशन का लाभ नहीं पा रहे हैं।
इसी प्रकार से जिले के अन्य नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों का कार्ड लाकडाउन के दौरान निरस्त कर दिया गया है। विभाग की इस मनमानीपूर्ण कार्यशैली से कोटेदारों को खामियाजा भुगतना मजबूरी बन गया है। ऐसे लोग विभाग पर दोष मढ़ने के बजाय कोटेदारों के सिर पर ही ठीकरा फोड़ने लगते हैं और दिन कोटेदारों के खिलाफ लोगों को आन्दोलित होते देखा जा रहा है।
सवाल उठता है कि डीएम और जिले प्रशासनिक अधिकारी इस बात को जानते भी हैं किन्तु कार्यवाही करने में पीछा खीचते रहे हैं। शिकायत भी किसी की आती है तो विभाग को ही जांच और कार्यवाही का जिम्मा सौंपकर अधिकारी भी अपना पल्लू छुड़ा लेते हैं। ऐसे हालातों में गरीबों और जरूरतमन्दों को परिणाम तो भुगतना ही परहा है।

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