पाॅलिथिन पर रोक लगाने का आदेश बना छलावा, जिम्मेदार अपने दायित्व निर्वहन के बजाय कर रहे अनदेखी

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⏺ कागजों मंे सिमट कर रह गया है अधिकारियों का जागरूकता अभियान

अंबेडकरनगर। देश में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूरे देश से पॉलिथीन को मुक्त करने का एक अहम कदम उठाया था जो कि पूरे भारत में प्रभावी रूप से लागू किया गया। हर प्रदेशों में पॉलिथीन को लेकर लोगों में जागरूकता लाने के लिए तमाम प्रकार के अभियान चलाए गए। शासन से लेकर प्रशासन तक के जिम्मेदार आम जनता के बीच पहुंचकर पॉलिथीन से होने वाली हानियों के बारे में जानकारी जनता को देने का काम बेशक किए हैं और प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग करने से परहेज बताया हो किंतु यह सब तो महज कुछ दिनों तक ही चलता हुआ नजर आया।
अब यह अपने उद्देश्यों से भटक गया है। शुरुआत का जो दौर चला उस में तो काफी असर दिखाई दिया लेकिन धीरे-धीरे यह असर बेअसर होता चला गया। बाजारों में धड़ल्ले से प्रयोग किए जा रहे हैं प्रतिबंधित पॉलिथीन और इस पर लगाम लगाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। इन प्रतिबंधित पालिथिनों से होने वाले हानियों से आखिरकार बचाव कैसे संभव हो सकता है।
जब तक इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध न लग जाए किंतु कमाई के चक्कर में और दुकानदारों द्वारा बचत करने की चाह में प्रतिबंधित पॉलिथीन का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। बसखारी थाना क्षेत्र में कभी भी प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग देखा जा सकता है।
यहां कारोबारी से लेकर खिर्ची मिर्ची की दुकानों, प्रतिष्ठानो, छोटी-मोटी दुकानों ,ठेले गुमटियों व फल विक्रेताओं, सब्जी विक्रेताओं गारमेंट्स कहीं भी किसी भी समय प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग करते देखने को मिल जाएगा क्योंकि एक दौर तो चला प्रतिबंधित पॉलिथीन को बंद करने का लेकिन वह कहीं न कहीं फिर उसी अपने चाल में आने को बेताब है।
इतना ही नहीं क्षेत्र में स्थित तालाबों में नदी नालों में यह पॉलिथीन कहीं न कहीं कचड़े के रूप से फेंके जा रहे हैं जो पानी को दूषित कर बीमारियों को दावत दे रहा है। ऐसे में तो सरकार की मंशा पर पलीता लगना संभव नजर आ रहा है और लोगों का वह मेहनत जो शुरुआती दौर में किया गया। वह सब कुछ बेअसर और विफल नजर आ रहा है।
जरूरत है तो एक बार फिर प्रतिबंधित पॉलिथीन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने की। आखिरकार बाजारों में यह प्रतिबंधित पॉलिथीन कैसे प्रयोग हो रहे हैं। यदि इसका उत्पादन नहीं हो रहा तो क्या प्रतिबंधित पॉलिथीन का गोदाम आज भी भरे हुए हैं। यदि इन्हें नष्ट करा दिया जाए तो शायद पूर्ण रूप से बाजारों से प्रतिबंधित पालिथीन का दिखाई देना बंद हो सकता है।
जैसा कि इन प्रतिबंधित पालिथीनों को प्रभावी रूप से रोकने की जिम्मेदारी जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई है लेकिन इसके प्रति उनकी सक्रियता नग्न नजर आ रही है। अब सवाल यह है कि आखिरकार इन जिम्मेदाराना को कौन याद दिलाएं की यह विशेष जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई।
कहीं ऐसा तो नहीं बजरंगबली की तरह इन्हें भी याद दिलाना पड़े कि इनकी शक्ति कितनी है और इसे यह पूरी जिम्मेदारी और कर्तव्य निष्ठा के साथ कर सकते हैं। अभियानों की धज्जियां जिस कदर उड़ाई जाते हैं। मानो कि यह सब महज एक दिखावा नजर आता हो।
क्योंकि जब भी शासन का कोई फरमान अपने परवान नहीं चढ पाता तो जनमानस के बीच हंसी का पात्र बन जाता है और फिर वही पर सरकार के मंसूबे पर पानी फिरने लगता है और लोगों के बीच सरकार के प्रति प्रतिद्वंदी भावना का विचार मन के किसी न किसी कोने में प्रवेश करने लगता है जिससे सरकार के छवि पर इसका गलत असर पड़ता है। अब देखना यह बाकी है कि क्या प्रतिबंधित पॉलिथीन बाजारों में धड़ल्ले से इसी तरह से प्रयोग से होते रहेंगे या फिर इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाएगा।

Report : Hindmorcha Team Ambedkarnagar 

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