69000 शिक्षक भर्ती महासंग्राम में युवाओं का भविष्य अंधकार में–सर्वेश गुप्ता

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मानव जीवन की संपूर्ण और मूल कल्पना-परिकल्पना और जीवन का आधार सर्वश्रेष्ठ और उदारता के साथ-साथ शिक्षा के स्तर को सही रूप से परवान चढाना।एक नई ज्योति का उद्भाव करना। सांसारिक जीवन में उत्पन्न नन्हे- नन्हे बच्चों के जीवन को मूल संस्कारों एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से परिपूर्ण करना और देश हित में उनको तैयार करना । फिर एक नये भारत का निर्माण करना । जो कि शिक्षकों की अहम भूमिका से ही संभव है । और इन युवा शिक्षकों के जीवन का एक बड़ा सपना है जिसे सुदृढ़ और सुचारू रूप से साकार तो करना चाहते हैं किंतु वह खुद इस समय अंधकार की बेड़ियों से जकड़े हुए हैं । जिससे मुक्ति मिल पाना मील का पत्थर साबित हो रहा है।

प्रकरण–

69000 शिक्षक भर्ती जोकि समंदर के मजेदार में और खांइयों के अंधेरों में कहीं खो गयी है । जिसकी तलाश जल-थल और नभ तीनों कर रही हैं किंतु अंजाम तक पहुंचने में अभी तक कोई कामयाब नहीं हुआ ।कुछ ऐसी ही दशा 69000 शिक्षक भर्ती की हो चुकी है। आसरा खूब लगाई जा रही हैं । बातें भी खूब हो रही हैं । एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और कटाक्ष का दौर भी खूब चल रहा है । अपने-अपने पक्षों को मजबूत दिखाने का भी भ्रम पैदा किया जा रहा है । खुद को शामिल कर दूसरे को बाहर करने का उपाय बताया जा रहा है । भर्ती एक और पक्षकार तीन जिसमें एक और पक्ष जुड़ जाता है और वह सरकार का पक्ष जिसे लेकर कुल 4 पक्ष।
इन चारों के बीच में सिर्फ और सिर्फ बहस का दौर जारी है । जो कि रुक-रुक कर तेजी पकड़ता है लेकिन फिर बरसात की तरह भीग जाता है । जब तक सूखता है और उसमें जरा सा तेज और ओज आता है तब तक फिर कहीं ना कहीं से बूंदाबांदी हो जाती है।

शिक्षक भर्ती—-

शिक्षा की गुणवत्ता को पूर्ण रूप से विकसित करना और नौनिहालों के भविष्य को संवारने का काम प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में किया जाता है । जैसे एक पौधे को सींचकर उसे बड़ा किया जाता है । जिससे वह फलदार और छायादार एवं लाभदायक हो। ठीक उसी तरह प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक नौनिहालों को ज्ञान रूपी गंगा में सराबोर कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से परिपक्व करने का सफल प्रयास करता है। और इसके लिए सरकार द्वारा शिक्षक भर्तियां निकाली जाती है इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिसंबर 2018 में प्राथमिक शिक्षकों की 69000 भर्ती निकाली गई । जिसकी परीक्षा 6 जनवरी 2019 को आयोजित हुई।
इतना ही नहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा मीडिया को साक्षात्कार दिया गया था कि 15 फरवरी 2019 को नियुक्ति देने का आश्वासन दिया गया था। किंतु विगत 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी मामला माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में सरकार की निष्क्रियता के कारण मामला लंबित है । ऐसा अभ्यार्थियों का आरोप है।
69000 शिक्षक भर्ती में 4लाख 10 हजार अभ्यार्थीयों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है ।
जिसका कारण मामले की अनियमित सुनवाई और सरकार को भर्ती पूर्ण ना करने की मंशा के कारण न्यायालय से लंबित मामला जो अभ्यार्थियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। अभ्यार्थी आज इस आस में है कि आखिरकार सरकार मजबूती के साथ अपने पक्ष को क्यों नहीं रखता।
जोकि इन 40लाख हजार10 अभ्यार्थियों के दिलों को क्रोधती है।

वर्तमान स्थिति—

69000 शिक्षक भर्ती की वर्तमान स्थिति यह है कि यह मामला माननीय न्यायालय की चौखट पर पहुंचने के बाद एक लंबे दौर से गुजरता हुआ अंजाम तक पहुंचता है कि फिर बड़े न्यायालय में दस्तक दे देता क्योंकि पक्षकारों की संख्या बढ़ती चली गई एक तरफ बीटीसी पक्षकार तो दूसरी तरफ b.ed के पक्षकार और तीसरी तरफ शिक्षामित्र के पक्षकार तो वहीं चौथे पक्षकार के रूप में खुद सरकार है।
यह प्रकरण हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ लगा रही है लेकिन किसी भी अंजाम तक पहुंचने को तैयार नहीं ।
हां अगर मिलता है तो कुछ वह है तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख । जिसका कोई भी उचित परिणाम नहीं निकल पाया आज तक। बस एक उम्मीद की किरण तारीख पर लगी रहती है कि बहस आज होगा निर्णय आ जाएगा। सच तो यह है की भर्ती के फैसले की बात तो बहुत दूर की है ।
इसी फैसले के कारण शिक्षक भर्ती का रिजल्ट तक नहीं आ सका है। अंधकार में जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षु जो सभी योग्यताओं को पूर्ण करते हैं । फिर भी कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं।

पक्षकारों की मांग—-

69000 शिक्षक भर्ती में माननीय न्यायालय में चल रहे इस मामले में चार पांच हैं । जिसमें प्रथम पक्ष बीटीसी के प्रशिक्षु ,दूसरा पक्ष बीएड के अभ्यर्थी ,तीसरा पक्ष शिक्षामित्र और चौथा पक्ष खुद उत्तर प्रदेश की वर्तमान भाजपा की सरकार है।

प्रथम पक्ष——

बीटीसी अभ्यार्थियों की मांग है कि सरकार जब तक 69000 शिक्षक भर्ती पूरा ना हो जाए तब तक किसी भी प्रकार की अग्रिम भर्ती विज्ञापन ना निकाले। उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष याचिका लगाकर मामले को शीघ्र अति शीघ्र निस्तारित करने की दशा में ठोस कदम उठाएं।
मामले में लगातार नियमित सुनवाई और बहस के लिए सरकार न्यायालय में अधिवक्ता की उपस्थिति सुनिश्चित करें। जिससे बहस पूर्ण हो सके और मामला का निस्तारण हो सके। सरकार के द्वारा लगाए गए मानक 90-97 (60और 65 प्रतिशत )की मजबूत पैरवी सरकार की तरफ से की जाए।
प्राथमिक विद्यालय के नए सत्र 2020 के प्रारंभ होने से पहले नियुक्ति दी जाए। b.ed के अभ्यार्थियों के पास बहुत सारे अवसर भर्तियों में शामिल होने की और नौकरी पाने की । किंतु बीटीसी अभ्यार्थियों का सहारा मात्र प्राथमिक विद्यालय ही है । इसके अलावा वह शिक्षा से संबंधित किसी भर्ती को नहीं देख सकता है। रही बात शिक्षामित्र की तो शिक्षामित्र अहर्ता को पूरा नहीं करते और सरकार के मानक को चैलेंज कर रहे हैं जो कि उचित नहीं है। और मामले को ऐन-केन प्रकरणेन लंबा खींचने का प्रयास करते रहते हैं।

दूसरा पक्ष—–

बीएड अभ्यर्थी जो यह कहते हैं कि अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है और हमें यह अधिकार निश्चित रूप से मिलना चाहिए क्योंकि हम सरकार के द्वारा दिए गए आहर्ता और मानक को पूरा करते हैं।

तीसरा पक्ष—–

शिक्षामित्रों का कहना है कि हमारा समायोजन रद्द किया गया । किंतु हमें यह भी अवसर प्रदान किया गया है कि दो भर्तियों में हमें शामिल किया जाएगा और वेटेज भी दिया जाएगा । एक भर्ती का अवसर समाप्त हो चुका है और यह अंतिम भर्ती का अवसर है । जिसके लिए हम लोगों को हमारा हक चाहिए और सरकार को हमारे अधिकारों का ध्यान रखते हुए हमारी मांगों को पूरा करे।

चौथा पक्ष—–

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए शिक्षा में अलख जगाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षक की जरूरत है और इसके लिए जो मानक निर्धारित किया गया है उन्हीं के आधार पर शिक्षकों की भर्ती होगी। गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार की कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षक भर्ती में सरकार ने जो मानक बनाया है 90-97(60- 65% )के अभ्यर्थियों को नौकरी का अवसर प्रदान किया जाएगा।
अब बात करें 4लाख10हजार अभ्यर्थियों को तो आत्मा को सांत्वना के लिए अगर कुछ मिल रहा है तो वह सिर्फ अदालत से तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख। जिसे लेकर अब अभ्यार्थी इच्छामृत्यु की भी मांग करने लगे हैं । ऐसे में सरकार का ठोस कदम क्या होगा अभी कुछ कह पाना मुश्किल है।
फिलहाल यह कयास लगाया जा रहा है कि सत्र 2020 के शुभारंभ से पूर्व संभवतः भर्ती अपने अंजाम तक पहुंच जाए और मानक पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को नौकरी का अवसर प्रदान हो। जनमानस में चर्चाएं—— एक वर्ष से अधिक अदालत की चौखट पर लटकता 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर बहुत सारे धरनो का दौर चला।
टीवी चैनलों पर डिबेट का दौर चला।
समाचार पत्रों में खबरों का दौर चला और चलता चला आ रहा है वर्तमान समय में भी। कुछ छात्रों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी हैं। और अब इच्छामृत्यु की बात सामने आ रही है । ऐसे में शिक्षक भर्ती के देरी के कारण जनमानस में चर्चा का विषय आम हो चुका है कि सरकार बच्चों के भविष्य के साथ आखिरकार क्यों खिलवाड़ कर रही हैं।
यदि भर्ती कोर्ट में लटकी है और एक प्रक्रिया के तहत चल रही है तो यह लंबा समय जो अभ्यर्थियों के लिए संकट की घड़ी बनी हुई है आखिर इसका कारण कौन है। क्यों ऐसी स्थिति व्याप्त है। लोगों का यह भी कहना है कि सरकार अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख रहा है तो कुछ यह भी कहते हैं कि सरकार नौकरी ही नहीं देना चाहती तमाम प्रकार के बातें निकल कर सामने आ रही हैं। लेकिन वास्तविकता क्या है यह तो अभी कोई नहीं जानता। फिलहाल मामले का निस्तारण होने के बाद सारे बिंदु अस्पष्ट हो जाएंगे।

आवश्यक——

शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए नौनिहालों के भविष्य को संवारने के लिए आज भी स्कूलों में शिक्षकों के पद बहुतायत संख्या में रिक्त पड़े हैं जो कि पूर्ण नहीं किया जा रहे हैं । यदि कोई भर्ती आ रही है तो अदालत को नतमस्तक हो जाती है और फिर तारीख पर तारीख का दौर चलता रहता है। सवाल है कि शिक्षकों के रिक्त पद आखिरकार कब तक पूर्ण होंगे। क्योंकि समय के साथ साथ अपना समय अवधि पूरा करने वाले अध्यापकों का रिटायरमेंट भी होता रहता है ।
ऐसे में रिक्त पदों की संख्या बढ़ती जा रही है । जिससे यह आकलन किया जा सकता है कि शिक्षा का स्तर कैसे घटता जा रहा है । क्योंकि जब शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं होगी तो नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना संभव नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना साकार होना सरकार के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
ऐसी दिशा और दशा में सरकार को गहन अध्ययन का एक ठोस कदम उठाने की जरूरत है कि जो भी भर्तियां निकले वह पूरी तरह साफ और सुथरी आए ।जिसमें पारदर्शिता हो किसी भी प्रकार की कोई समस्या और बाधाएं उत्पन्न हो । समय रहते भर्ती को पूर्ण करा लिया जाए और अपनी कड़ी मेहनत के बलबूते गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से परिपूर्ण इन शिक्षकों को उनका हक मिल सके।

सर्वेश गुप्ता की कलम से📚✒

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