उत्तर प्रदेश के जनपद औरैया की डिग्री शिक्षा और धोखा

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शिक्षा की उपयोगिता एवं आवश्यकता की पूर्ति हेतु विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए मानकपूर्ण कालेज, पाठ्यक्रम, गुणवŸाापूर्ण शिक्षण, प्रयोगशाला एवं योग्य शिक्षक, स्वास्थ्य जीवन के लिए प्रदूषण मुक्त भोजन, औषधि, सुरक्षा के लिए न्याय तथा अपराध के लिए दंड बुनियादी जरूरत है। हमारा लोकतान्त्रिक संविधान जन-सामान्य के संरक्षण एवं उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति व्यवस्था हेतु दृढ़ संकल्पित है परन्तु अनेक स्वार्थी लोग सरकारी व्यवस्था में घुसपैंठ कर लोकतान्त्रिक व्यवस्था और शिक्षा को ध्वस्त कर रहे हैं और जीवन की बुनियादी शिक्षा शिक्षणहीन, शिक्षकविहीन, नकलयुक्त एवं उ६ेश्यहीन हो गई है।
औरैया जनपद तीन तहसीलों- औरैया, बिधूना, अजीतमल तथा सात विकासखण्डों- औरैया, अजीतमल, ऐरवा, सहार, बिधूना, भाग्यनगर, अछल्दा तथां सात नगरों- औरैया, अजीतमल, अटसू, फफूँद, दिबियापुर, अछल्दा, बिधूना तथा तीन विधानसभा क्षेत्रों- औरैया, बिधूना, दिबियापुर तथा दो संसदीय क्षेत्रों- इटावा, कन्न्ाौज में विभाजित है। जनपद का कुल क्षेत्रफल 20542 किमी एवं कुल जनसंख्या 1372287, लिंगानुपात 864 तथा साक्षरता 80.25ः तथा 234205 नगरीय, 1138072 ग्रामीण व्यक्ति हैं। जनपद में 1 राजकीय, 3 एडिड, 73 स्ववित्तपोषी कुल 77 महाविद्यालय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं।
केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा संचालित जनसामान्य के कल्याण के लिए शैक्षिक योजनाओं के अध्ययन उपरान्त औरैया के कालेजों में जाकर शिक्षा व्यवस्था देखी और प्रबन्धकों, प्राचार्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों-जनता से बातचीत की। छत्रपति शाहूजी महाराज वि..वि. कानपुर से सम्बद्ध डिग्री कालेजों में फर्जीबाडे़ चरम पर हैं। इस विश्वविद्यालय से लगभग 1500 डिग्री कालेज सम्बद्ध हैं। इनमें स्ववित्तपोषी कालेजों के प्राचार्य एवं शिक्षक पदों पर ऐसे लोग वि.वि. से अनुमोदित प्राचार्य एवं शिक्षक है, जो अन्य विभागों-कालेजो-विश्वविद्यालयों में नौकरी या व्यापार कर रहे है।
अनुमोदित प्राचार्य-शिक्षक सम्बन्धित कालेज से नदारत हैं। यह अपने शैक्षिक प्रपत्रों को किराए पर देकर दुरुपयोग कर रहे हैं। प्राचार्य-सीट पर प्रबंधक और उनके परिजन स्वयं-भू प्राचार्य बन बैठ रहे हैं। अनुमोदित शिक्षकों की जगह कामचलाऊ लोगों को 1000-2000 देकर कम पढ़े लोगों से शिक्षण-खानापूर्ति हो रही हैं। कालेज नकल-डिग्री के व्यापार से अवैध कमाई में जुटे हैं। जिस कारण उच्चशिक्षा, विद्यार्थी, समाज एवं शिक्षक योग्य बेरोजगारों का जीवन बुरी तरह प्रभावित है और नकल-डिग्री व्यापार से माफिया माला-माल हो रहे है।
औरैया जनपद के लगभग सभी कालेजों के प्रबंधतंत्रों के पदाधिकारी विश्वविद्यालय एक्ट 1973 व सोसाइटी एक्ट 1856 के प्रतिकूल हैं। इन प्रबन्धतन्त्रों कार्यकारणियों में राजनीतिक सदस्यों, सरकारी वेतनभागियों, नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा माफियाओं, संगठित अपराधियों और उनके परिजनों सगे-सम्बन्धियों आपसी हितबद्धों की पदासीनता है। प्रबन्धतन्त्रों के अध्यक्ष-सचिव पदासीनता विरासती-अमानक हो रही है। इन पदों पर पिता-पुत्र, भाई-बहिन, पति-पत्नी, सास-ससुर, मामा-भांजे, साले-बहनोई, ननद-भौजी, मामा-भांजे मनमाने ढंग से लगातार स्वयं-भू पदासीन हैं।
इन अमानक प्रबंधतंत्रों को उच्चशिक्षा विभाग द्वारा मान्यता एवं विश्वविद्यालय द्वारा सम्बद्धता देकर शिक्षाधिनियमों की जबरदस्त उपेक्षा की जा रही है। इनके प्रबन्धतन्त्रो के अधिकांश पदाधिकारी और उनके परिजन कालेज भवनों में निवास कर राजनीतिक एवं व्यवसायिक गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं तथा यह डाइरेक्टर व इनके परिजन स्वयं-भू प्राचार्य बनकर व प्राचार्य सीट पर बैठकर कालेजों में अवैध वसूली कर रहे हैं।
औरैया जनपद में शैक्षिक संस्थान शिक्षा मानकों की जबरदस्त उपेक्षा कर पैतिृक विरासत के रूप में संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों के प्रबन्धतन्त्रों में पूर्व-वर्तमान सांसदों, विधायकों, मंत्रियों, सचिवों, प्राचार्यों, शिक्षकों, प्रशासकों, अधिकारियों, व्यापारियों, अपराधियों की पदासीनता है। ये कालेज राजनीतिक-नेताओं, कुख्यातों, पेशवर अपराधियों, अधिकारियों और उनके परिजन-सम्बन्धी आपसी हितबद्धों के निवास-विश्राम-व्यापार-स्वागत-समारोह-चुनावी-अराजकता स्थल और अवैध कमाई के अड्डे बने हुए हैं।
इनमें अध्ययन-अध्यापन का अभाव है। कहने को शिक्षा व्यवस्था नियमों और उच्च अधिकारियों की निगरानी में है तथा बिना भेद-भाव के शैक्षिक लाभ जन-जन पहुँच रहा है और उच्चशिक्षा के विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षणार्थियों को मानकीय पाठ्यक्रम में कुशलता की डिग्री से विभूषित किया जा रहा है। परन्तु वास्तव में शिक्षण-संस्थानों में मानकीय शिक्षण एवं व्यवस्था जबरदस्त उपेिक्षत है। कालेज कक्षाओं में छात्र गायब, अनुमोदित प्राचार्य-शिक्षक कालेजों से विलोपित, नकल हेतु ‘मुन्न्ााभाई’, बिना शिक्षण परीक्षा, बिना पढ़े उतीर्ण, अज्ञानियों कोेे डिग्री आदि फर्जीबाड़ों से डिग्री-कालेजों की शिक्षा-व्यवस्था व्यर्थ सिद्ध है।
डिग्री कालेज के प्रबन्धतन्त्रों में पदासीन राजनेता,ं प्रशासक, शिक्षाधिकारी एवं एडिड स्कूलों के प्राचार्य-शिक्षक- प्रबन्धक, ठेकेदार अपने पद एवं सरकारी धन-सम्पत्ति का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमा रहे हैं और फर्जीबाड़े से हड़पे गए सरकारी धन से निजी डिग्री कालेज बनाकर स्वयंभू प्राचार्य बने बैठे हैं। सरकारी-एडिड स्कूलों की भूमि फर्नीचर, प्रयोगशाला उपकरण, पुस्तकें, स्टेशनरी, निर्माण सामग्री आदि हड़पकर अपने निजी कालेजों में लगा ली है।
प्राचार्यों-शिक्षकों का वेतन एवं छात्रवृत्ति धन को हडपने हेतु बैकों में फर्जी खाते संचालित कर रहे हंै। खाताधारक के ब्लेंक चेक पर साइनयुक्त बुक-पासबुक प्रबन्धक रखते है। सरकारी योजनाओं का धन हड़पने हेतु फर्जी छात्रों की शुल्क प्रबंधक स्वयं जमा कर देते हैं और बाद में निकाल लेते हैं तथा अवैध वसूली हेतु अधिकारियों के दबाव में शैक्षिक मूल-प्रमाणपत्र एवं शपथपत्र जमा कराते है।
शिक्षण-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु आने वाले विद्यार्थियों से मनमानी शुल्क लेकर वि.वि. पोर्टल पर पंजीयन होता है। कालेज में आने वाले व्यक्तियों को कक्षाओं में आए बिना पूर्ण उपस्थिति, नकल कराकर परीक्षा उत्तीर्ण कराने की गारण्टी देकर मनमानी रकम वसूली जाती है। पढ़ाई हेतु कालेज आने वाले विद्यार्थियों को भ्रमित या मूर्ख बना या अमानक-अयोग्यों छात्रों से पढ़वा कर खाना-पूर्ति की जाती है।
प्राचार्यों-शिक्षकों-विद्यार्थियों की कालेज-कक्षा उपस्थिति पंजिकाएँ एवं बायोमेट्रिक उपस्थिति फर्जी बन रही है। काम-चलाऊ शिक्षक एवं उनकी उपस्थिति पंजिकाएँ तो है, परन्तु विश्वविद्यालय से अनुमोदित प्राचार्य-शिक्षक और उनकी उपस्थित पंजिकाएँ विलोपित हैं। सी.सी.टी.वी. आडियो-वीडियो भ्रामक-उपेक्षित है। कालेज व्यवस्था, शुल्क, शिक्षक, प्राचार्य, प्रबन्धतंत्र पदाधिकारी, टाइम-टेबिल आदि आवश्यक सूचनाएँ कालेज-विश्वविद्यालय पोर्टल पर नहीं हैं।
कालेज सत्र के परीक्षा केंद्र बनाने में विश्वविद्यालय के अधिकारी नकल-माफियाओं वाले कालेजों को प्राथमिकता देते हैं। परीक्षा केंद्र निर्धारण में खूब धन वसूली होती है। मनचाहे केंद्राध्यक्ष, प्रक्टिकल-परीक्षक-उड़नदस्ता हेतु धन लिया जाता है। कालेज परीक्षार्थियों से वसूली होती है। वि.वि.के उड़नदस्ते परीक्षा केंद्रों पर दबाव बनाकर धन वसूलते हैं। परीक्षा-कक्षों में लगे सी.सी.टी.वी. की दिशा ऊपर या बन्दकर परीक्षार्थियों को बोल-बोल या ब्लैकबोर्ड पर लिख कर नकल कराई जाती है।
वि.वि. कर्मचारी-अधिकारी अपनी टेबिल के नीचे हाथ कर रिश्वत भरे लिफाफे लेते हैं। दिखावा हेतु परीक्षा-रिकार्डिड आडियो-वीडियो की सी.डी. वि.वि. में जमा होती है इसके बावजूद सामूहिक नकल वाले कालेजों के परीक्षार्थी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो रहे हैं। वि.वि. के उड़नदस्ते अक्सर उन्हीं कालेजों में धावा बोलकर नकल पकड़ते अथवा डेरा जमाए रहते हैं जो कालेज नकल कराने की सुविधा शुल्क वि.वि. को देने से बचते हैं। नकल आरोपी कालेज को कालीसूची में ड़ालकर एवं परीक्षा परिणाम रोककर धन उगाही होती है और मानकीय प्राचार्यों-शिक्षकों की कालेज अनुपस्थिति में विद्यार्थियों के प्रवेश-शिक्षण-परीक्षाएँ करायी जाती है।
जनपद के कालेजों में संचालित पाठ्यक्रम-स्नातक, परास्नातक, बी.एड., डी.एल.एड., विधि, चिकित्सा आदि में अनुमोदित सभी प्राचार्य-शिक्षक कालेजों-कक्षाओं से नदारत है और विद्यार्थी पढ़ने नहीं आते हैं। इन कालेजों में अमानक-अयोग्य प्राचार्यों-शिक्षकों की भरमार और परीक्षा में नकल कमाई के साधन बने हुए हैं। इन कालेजों में नकल-माफिया और उनके परिजन-सम्बन्धी आपसी हितबद्ध मनमानी समितियाँ बनाकर एवं स्वयं-भू प्राचार्य बन अवैध कमाई में जुटे हुए हैं।
जनपद के स्ववित्तपोषी कालेजों में प्राचार्यों एवं शिक्षकों की दोहरी पदासीनता है। प्रथम वि.वि. से अनुमोदित सभी शिक्षक और प्राचार्य सम्बन्धित कालेजो से नदारत एव कागजी खानापूर्ति तक सीमित है तथा द्वितीय अयोग्य-अमानक कामचलाऊ कालेजों में कार्यरत हैं। कामचलाऊ लोगों से कालेज कक्षाओं की खाना-पूर्ति होती है। अनुमोदित शिक्षकों-प्राचार्याें के नाम-प्रपत्र वि.वि. में शामिल कराकर उनकी डिग्री-प्रपत्रों का वार्षिक किराया एकमुश्त देकर कालेज आने से मुक्त रखा जाता हैं। इसी प्रकार डी.इल.एड-बी.एड-ला आदि कालेजों में प्राचार्यों-शिक्षकों की पदासीनता के फर्जीवाड़े हैं।
अनुमोदित अधिकांश प्राचार्य-शिक्षक अन्य विभागों-वि.वि. में अनुमोदित शिक्षक-प्राचार्य, नौकरी-व्यापार में कार्यरत है। इन प्राचार्यों-शिक्षकों में अनेक बक्सर, गोआ, मद्रास, आंध्र, बिहार, तमिलनाड़ु, उत्तराखंड, केरल वासी हैं और धन वसूलने यदा-कदा कालेज आते हैं।
जिले के कालेजों से नदारत अनुमोदित शिक्षकों-प्राचार्यों के वेतन-भुगतान के बैंक खातों का फर्जी संचालन, अनुमोदित शिक्षकों-प्राचार्यों के बावजूद अयोग्य-अमानक लोगों की कालेजों में दोहरी पदासीनता, कालेजों के उपस्थिति पंजिकाओं पर अनुमोदित शिक्षकों-प्राचार्यों के स्थान पर अयोग्य-अमानक लोगों की उपस्थिति साइन, कक्षाओं में सदैव अनुपस्थिति रहने वाले छात्रों की 75ः उपस्थिति बनाकर परीक्षा, पूर्व-फेल छात्रों से शिक्षण शुल्क वसूली, सी.सी.टी.वी. बगैर कालेज कक्षाओं का संचालन, शुल्क लेने के बावजूद मानकीय शिक्षकों केे शिक्षण का अभाव एवं उच्चशिक्षा के मानकों की उपेक्षा की जा रहीे है।
जनपद के डिग्री कालेजों में अधिकांश रिटायर्ड शिक्षक-प्राचार्य एवं विलोपित प्राचार्य-शिक्षक पदों पर पदासीन हैं जो अपनी पूर्व सेवाकाल में कक्षाध्यापन की सदैव उपेक्षा करने वाले रहे हैं। इसके बावजूद मानदेय पदों एवं स्ववित्तपोषी कालेजों मे प्राचार्य-शिक्षक पदों पर रखे जा रहे अनुमोदित कार्यवाहक-प्राचार्यो-शिक्षकों द्वारा नियमित कक्षाएँ नही पढ़ाई जाती हैं जिससे विद्यार्थी मानकीय शिक्षण से वंचित हो रहे है तथा प्रबंधकों की कृपा में मानदेय-वेतन हेतु फर्जी उपस्थिति से बंदर-बांट हो रहा है।
कालेजों के पंजीकृत अधिकांश छात्र-छात्राएँ कालेज कक्षाओं में सदैव अनुपस्थित रहकर अन्य जिला-राज्य में कोचिंग, नौकरी, व्यापार में लगे हैं, जिनकी कक्षाओं में 75ः फर्जी उपस्थिति दिखा परीक्षा में शामिल कराकर डिग्री बण्टन हो रहा है।
स्ववित्तपोषी कालेजों में छात्र तक प्राचार्य/प्रोफेसर/प्रबन्धक बने हुए हैं। इन कालेजों में मानकीय शिक्षण, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों, पुस्तकों आदि का पूर्णतः अभाव है। कहने को तो कालेज छात्रों का पंजीयन आॅनलाइन और शुल्क वि.वि. से निर्धारित प्रक्रिया अनुरूप जमा होती है परन्तु वास्तविकता यह है कि छात्रों से निर्धारित शुल्क लिए जाने के बावजूद बुक-बेग किट, प्रक्टिकल्स, टूर, परीक्षा सेंटर बनवाने, नकल, अंकपत्र, प्रपत्र सुधार एवं अनुपस्थित को उपस्थित बनाने के नाम पर अवैध वसूली होती है तथा फेल छात्रों को पूर्व छात्र की सुविधा न देकर कालेज-शिक्षण शुल्क वसूली जा रही है।
जनपद के बी.एड़, विधि, डी.एल.एड., स्नातक, परास्नातक, डिग्री कालेजों में प्रत्येक की अलग-अलग मान्यता, व्यवस्था-प्रबन्धन, प्रशासन, प्राचार्य, शिक्षक, शिक्षण, लैब, प्रयोगशाला, भूमि, भवन आदि का प्रावधान है इसके बावजूद शिक्षा विभाग एवं विश्वविद्यालय से अनुमोदित प्राचार्यों-शिक्षकों का सम्बन्धित कालेजों से पलायन-विलोपन और अनुमोदित प्राचार्यों एवं शिक्षकों के स्थान पर अयोग्य व्यक्तियों की कालेजों में दोहरी पदासीनता, उपस्थिति पंजिकाओं पर फर्जी हस्ताक्षर एवं अध्यापन एवं प्राचार्य सीट पर अयोग्य-अमानक प्रबन्धकों और उनके परिजनों की पदासीनता, प्रबन्धतन्त्रों द्वारा प्राचार्य के फर्जी हस्ताक्षर-कार्य, नेट-पीएच.डी.विहीन स्नातक-परास्नातक बेरोजगारों-वकीलों-बी.एड.-चिकित्सक-छात्रों-प्राथमिक-माध्यमिक स्कूली शिक्षकों से स्नातक परास्नातक-बी.एड., ला, डी.एल.एड. की कक्षाएँ पढ़वाया जाना, एक ही भवन-कक्षों में अलग-अलग गेट पर डिग्री, महिला, ला, बी.एड.,डी.एल.एड., कांवेंट, सेंट्रल-यू.पी.बोर्ड़, कालेजों की मान्यता और एक ही अयोग्य व्यक्ति से सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएँ पढ़वाना, शुल्क के रूप में मोटी रकम लेने के बावजूद मानकी शिक्षकों को मानकीय वेतन न देकर अयोग्यों से शिक्षण, प्रबंधक परिजनों का प्राचार्य सीट पर बैठना, कालेजों में नेताओं-माफियाओं के निवास एवं राजनीतिक- व्यापारिक गतिविधियों के कारण उच्चशिक्षा मानक सहित विद्यार्थियों और देश-समाज का भविष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
जनपद के डिग्री कालेजों के दलाल-प्रबंधतंत्रों के लोग प्रबंधक-प्राचार्य के रूप में वि.वि.-बोर्ड के चक्कर लगाते रहते हैं और कर्मियों से सांठ-गांठ कर ठगई करते हैं। स्ववित्तपोषी कालेज परीक्षा ड्यूटी का पारिश्रमिक नहीं देते है। वि.वि.से सम्बद्ध स्ववित्तपोषी कालेजों और संचालित पाठ्यक्रमों की कक्षाओं के कक्षों में लगे सी.सी.टी.वी. धोखा हैं। स्ववित्तपोषी-एडिड कालेजों में शिक्षण नहीं हो रहे हैं।
मानदेय शिक्षकों के कार्य मात्र कागजों तक सीमित है। तथ्यों एवं फर्जीबाड़े-वास्तविक तथ्यों से समर्थित साक्ष्य कानपुर वि.वि.से संबद्ध स्ववित्तपोषी-एडिड कालेजों के सीसीटीवी.में व अनुमोदित प्राचार्यों-शिक्षकों का संबंधित कालेज कार्यों से पलायन, अमानक प्राचार्यों-शिक्षकों के कालेज उपस्थिति पंजिकाओं में हस्ताक्षर, कार्य, अमानक व्यक्ति प्राचार्य सीट पर, शिक्षण अभाव, छात्रों की अनुपस्थिति, अवैध वसूली साक्ष्य कालेजों में मौजूद हैं। कानपुर वि.वि. से सम्बद्ध बी.एड., ला, डी.एल.एड., मैंनेजमेंट, आयुर्वेद, डिग्री कालेजों में उक्त तथ्यों के अतिरिक्त और भी अनेक अति गंभीर अनियमितिताएँ व्याप्त हैं।

निष्कर्षः

औरैया जनपद के कालेजों में अमानक प्रबंधतंत्र, पंजीयन, प्राचार्य-शिक्षक, उपस्थिति, शिक्षण-प्रशिक्षण, लैब, लाइब्रेरी, डिग्री-डिप्लोमा सहित अवैध वसूली, सरकारी-सार्वजनिक धन-सम्पत्ति का दुरुपयोग आदि गम्भीर अनियमितताएँ व्यापक रूप से विद्यमान हैं। जिसके कारण उच्चशिक्षा के मानक सहित विद्यार्थियों और देश-समाज का भविष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

सुझाव :

1. मानकी प्राचार्य एवं शिक्षक विहीन डिग्री कालेजों में संचालित डी.इल.एड़. एव बी.एड. पाठ्यक्रमों में मानकी शिक्षकों और शिक्षण-प्रशिक्षण का जबरदस्त अभाव होने से प्रशिक्षणार्थियों का भविष्य बुरी तरह संकटग्रसित है। कालेजों में अराजकता, फर्जीबाड़ा, नकल-ठेका, अवैध वसूली, फर्जी पदासीनता, छात्र-शिक्षक पलायन पर जबाबदेह अंकुश लगना चाहिए।
2. डिग्री कालेजों की शिक्षण-व्यवस्था का औचक-निरीक्षण व भौतिक सत्यापन कार्यवाही तत्काल होना अति आवश्यक है।
3. स्ववित्तपोषी कालेजों हेतु वि.वि.अनुमोदित प्राचार्याें एवं शिक्षकों का संबंधित कालेजों से पलायन तथा अनुमोदित प्राचार्यों- शिक्षकों की जगह अयोग्य-अमानक लोगों की पदासीनता के विरुद्ध कार्यवाही एवं कालेज मान्यता निरस्त होनी चाहिए।
4. मंडलायुुक्त, जिलाधिकारी, शिक्षाधिकारियों को डिग्री कालेजों का नियमित औचक निरीक्षण करके कार्यवाही करनी चाहिए तथा उच्चशिक्षा-यू.जी.सी. मानकों एवं वि.वि.-सोसाइटी एक्ट की उपेक्षा करने वाले फर्जी बाड़़ा आधारित डिग्री कालेजों की मान्यता निरस्त की जानी चाहिए तथा शिक्षा विभाग-विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं पेनल के फर्जी निरीक्षणों पर अंकुश लगना चाहिए एवं कालेजों से गायब अनुमोदित प्राचार्यों-शिक्षकों की डिग्री निरस्तकर कालेजों में पदासीन अमानक प्राचार्यों-शिक्षकों को दंडित किया जाना चाहिए। मानकीय अर्हताधारी योग्य शिक्षकों से ही शिक्षण कराया जाना चाहिए।
5. मानक विहीन शिक्षा ने अनेक समस्याओं को जन्म दिया है। शिक्षक, शिक्षण, प्रक्टिकल्स, पुस्तकालय, प्राचार्य और कर्मचारियों का अभाव एवं अमानकता से शिक्षा एवं उसके उद्देश्य नष्ट हो रहे हैं। शिक्षण समस्याओं का संचालन भारी वित्तीय लाभ एवं अनियमितताओं का व्यवसाय बन गया है। नकल ट्यूशन, बिना पाठन डिग्री अज्ञानियों को डिग्री उपाधि वितरण व्यवसायों से शिक्षा बुरी तरह प्रदूषित हो रही है। अतः ऐसी प्रवृत्ति पर नियन्त्रण एवं जिला प्रशासन की जबाबदेही तथा जन-साधारण के हितों की सुरक्षा हेतु शिक्षा के मानकी प्रावधानों का अनुपालन कराया जाना अति आवश्यक है।
6. अनेक कालेज ऐसे हैं, जो दबंगो की निजी विरासत एवं निजी आय-सम्पत्ति बने हुए हैं और इनमें पढ़ाई के अतिरिक्त सब कुछ दिखता है। अनेक कालेज की भूमि कहीं और भवन-पढ़ाई कहीं और है। अधिकांश स्ववित्तपोषी कालेजों के प्रबन्धतंत्र के पदाधिकारी राजनीतिक एवं सरकारी पदासीनता का दुरुपयोग कर कालेजों के माध्यम से सरकारी धन-सम्पत्ति हड़प कर अवैध लाभ कमा रहे हैं। तत्काल अंकुश लगना चाहिए।
7. मानकी प्राचार्य एवं शिक्षक हीन डिग्री कालेजों में संचालित पाठ्यक्रम-डी.इल.एड. एवं ंबी.एड. में मानकी शिक्षकों और शिक्षण एवं प्रशिक्षण का जबरदस्त अभाव होने से प्रशिक्षणार्थियों का भविष्य बुरी तरह संकट में है। कालेजों में अराजकता, फर्जीबाड़ा, नकल-ठेका, अवैध वसूली, फर्जी पदासीनता, छात्र-शिक्षक पलायन पर जबाबदेह अंकुश लगना चाहिए।
8. विज्ञापनों व दलालों के माध्यम से छात्रों को फंसाकर कालेज-कक्षा में आए बिना उतीर्ण-नकल कराने की गारण्टी देकर धन वसूली जारी हैं। कक्षाओं में पढ़ाए बिना परीक्षाओं में बिठाने-नकल कराने की गारण्टी पर तत्काल अंकुश लगना चाहिए।
9. छ.प.शा.म.वि.वि. से सम्बद्ध मानकीय प्राचार्य-शिक्षक विहीन कालेजों में संचालित हो रहे डी.इल.एड़ पाठ्यक्रमों में मानकीय शिक्षकों व शिक्षण-प्रशिक्षण विहीनता से प्रभावित विद्यार्थियों का भविष्य पर जबाबदेह अंकुश तत्काल लगना चाहिए तथा डी.इल.एड. फर्जीबाड़ा, नकल परीक्षा, अवैध वसूली, अमानक शिक्षण, शिक्षक-छात्रों की अनुपस्थिति, फर्जी पदासीनता, अमानक शिक्षण पर तत्काल अंकुश लगना चाहिए और मानकीय शिक्षकों मात्र से ही शिक्षण कराया जाना चाहिए।
10. कालेज प्रबन्धतन्त्रों के पदाधिकारियों की मानसिकता ‘शिक्षा-दान’ के स्थान पर सार्वजनिक धन-सम्पत्ति पर स्वामित्त्व रखकर कालेजों से जबरदस्त निजी लाभ कमाना बनी हुई है और यह अपने सगे-सम्बंधी आपसी हितबद्धों मात्र को ही प्रबंधतंत्रांे में पदासीनता देकर शिक्षामानकों की उपेक्षाकर एक ही व्यक्ति-परिवार बारंबार पदासीन हो रहे हैं, अंकुश लगाया जाना चाहिए।
11. डिग्री कालेजों में अमानक रूप से संचालित हो रहे मानकी प्रशिक्षक-शिक्षण-प्रशिक्षण विहीन डी.इल.एड. एवं बी.एड. की अव्यवस्था, प्रशिक्षक-पलायन, अमानक शिक्षण देख छात्र रुझान पढ़ाई की अपेक्षा नकल की ओर मुड़ा है, सुधार आवश्यक है।
12. डिग्रीकालेज संस्थान हैं जिनका संचालन उच्चशिक्षा-यू.जी.सी.नियमों एवं सार्वजनिक धन से है, मनमानी पर अंकुश जरूरी हैl

Report : Hindmorcha-Dreamland Team

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