चिकित्सा व्यापार बना वसूली का जरिया.!!

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  • गब्बर रिटर्न्स’ और फिर फिल्म ‘लाल रंग’ ने खोली थी पोल..!!

  • जीवन या मौत से सरोकार नहीं..!!!

राजेश कुमार यादव

कहते हैं डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप हैं लेकिन आज इन्ही चिकित्सको ने चिकित्सा को व्यापार बना कर आमजन के विश्वास को ठेश पहुँचा रहें हैं कुछ चिकित्सक, विदित हो कि कुछ समय पहले एक फिल्म आई थी ‘गब्बर रिटर्न्स’ और फिर फिल्म ‘लाल रंग’ ये फिल्में अस्पतालों में होने वाले करप्शन की कहानी उजागर करती हैं ‘गब्बर रिटर्न्स’ में दिखाया गया था कि अस्पताल पैसा कमाने के लिए इलाज करने को किस तरह एक व्यवसाय के रूप में इस्तेमाल करता हैl
अस्पतालों के डाक्टरों को रोगियों के जीवन या मौत से सरोकार नहीं होता, हौस्पिटल मैनेजमैंट के भारी दबाव में डाक्टर काम करते हैं अस्पतालों के बिजनैस में पैसा लगाने वाले बड़े पूंजीपति या राजनेता होते हैं या उन के संबंध बड़े राजनेताओं से होते हैं! इसलिए उन्हें डर नहीं होता।
एक डाक्टर मित्र जो बडे धन्डिय अस्पताल में काम करते थे ने बताया कि उन के यहां हरेक को महीने का कोटा पूरा करना होता है कि कितने लैबोरेटरी टैस्ट, कितने स्कैन, कितने अल्ट्रासाउंड करवाने हैं।ऐसे में कुछ अनावश्यक टैस्ट करवाने ही पड़ते हैं उन्होंने यह भी बताया कि बात केवल कोटे की नहीं, अगर बहुत से टैस्ट व दवाएं न हों, तो लोग मानते ही नहीं कि डाक्टर अच्छे हैं।
उपभोक्तावाद के प्रभाव से अब चिकित्सा संस्थान भी अछूते नहीं रहे आज के समय में स्वास्थ्य क्षेत्र को सब से मुनाफे वाले व्यापार के तौर पर देखा जाता है।लेकिन यह मुनाफा क्षेत्र अब लूट और शोषण का क्षेत्र बनने की ओर अग्रसर है, या यह कहें कि लूट का जरिया बन चुका है।हर कोई स्वस्थ रहना चाहता है और इस के लिए जितने चाहे पैसे खर्च करने को तत्पर रहता है।
हमारे देश में इन दिनों मध्य व उच्च श्रेणी के निजी नर्सिंगहोम व निजी अस्पतालों से ले कर बहुआयामी विशेषता रखने वाले मल्टी स्पैशलिटी हौस्पिटल्स की बाढ़ सी आई हुई है।दिल्ली, पंजाब,यूपी हरियाणा, महाराष्ट्र व गुजरात जैसे आर्थिक रूप से संपन्न राज्यों तक में भी ऐसे बहुसुविधा उपलब्ध करवाने वाले अस्पतालों को देखा जा सकता है।
हजारों करोड़ रुपए की लागत से शुरू होने वाले इन अस्पतालों को संचालित करने वाला व्यक्ति या इस से संबंधित गु्रप कोई साधारण व्यक्ति या गु्रप नहीं हो सकता,निश्चित रूप से ऐसे अस्पताल न केवल धनाढ्य लोगों द्वारा खोले जाते हैं बल्कि इन के रसूख भी काफी ऊपर तक होते हैं।
इतना ही नहीं, बड़े से बड़े राजनेताओं व अफसरशाही से जुड़े लोगों का इलाज करतेकरते साधारण अथवा मध्य या उच्चमध्य श्रेणी के मरीजों की परवा करना या न करना ऐसे अस्पतालों के लिए कोई माने नहीं रखता,यदि ऐसे कई बड़े अस्पतालों की वैबसाइटें खोल कर देखें या इन अस्पतालों के भुक्तभोगी मरीजों द्वारा साझे किए गए उन के अनुभवों पर नजर डालें तो आप को ऐसे अस्पतालों की वास्तविकता व इन विशाल गगनचुंबी इमारतों के पीछे का भयानक सच पढ़ने को मिल जाएगा।

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