रविदास मंदिर में पूजा कर प्रियंका ने साधे दो समीकरण, वाराणसी से दिल्ली को संदेश,

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Lucknow (HM News)l कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी सूबे में खोए हुए जनाधार को वापस पार्टी में लाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी हैं. ऐसे में प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचकर एक साथ दो राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद की है. प्रियंका ने संत रविदास की जन्मस्थली पर दर्शन और पूजा अर्चना कर दिल्ली को राजनीतिक संदेश दिया तो दूसरी तरफ यूपी में अपने पुराने और परंपरागत वोटर रहे दलित समुदाय को भी रिझाने की कोशिश की है.
प्रियंका गांधी शुक्रवार को वाराणसी में दलित समुदाय के केंद्र माने जाने वाले संत रविदास मंदिर पर पहुंचीं और पूजा अर्चना की. इस दौरान प्रियंका ने कहा कि यहां बहुत दिनों से आने की इच्छा थी, जो आज पूरी हुई. इस दौरान उन्हें रविदास मंदिर के प्रबंधक सतीश कुमार ने संस्था की दो पत्रिका भेंट की. इसके बाद वे नाव से रामघाट स्थित गुलेरिया कोठी पहुंचीं, जहां पर वह नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जेल गए प्रदर्शनकारियों और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ संवाद किया. इसके साथ ही प्रियंका गांधी ने काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर दर्शन किया.
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सीएए के विरोध में जेल जाने वाले लोगों के साथ उनकी पार्टी खड़ी है. कांग्रेस पार्टी की यूपी में सरकार आएगी तो सभी के मुकदमे खत्म किए जाएंगे. प्रियंका ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के मुकदमे लड़ने में कांग्रेस पार्टी मदद करेगी. मोदी सरकार द्वारा लाया गया सीएए कानून लोकतंत्र विरोधी है और देश के संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ है. कांग्रेस पार्टी देश के लोकतंत्र और संविधान को मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है.

प्रियंका ने कांग्रेस के दलित एजेंडे को बढ़ाया

प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी के दुर्ग वाराणसी के जरिए राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद की है. प्रियंका ने सीएए और एनआरसी के जरिए जहां यूपी के मुस्लिम मतों को साधा है तो रविदास मंदिर जाकर कांग्रेस के दलित एजेंडे को पुख्ता करने की पहल की है. रविदास मंदिर से दिल्ली और यूपी दोनों राज्यों के दलित समुदाय को संदेश देने की कोशिश के तहत देखा जा रहा है.
दरअसल दिल्ली के तुगलकाबाद के जहांपनाह जंगल में स्थित संत रविदास के मंदिर को दिल्ली विकास प्राधिकरण ने 10 अगस्त को तोड़ दिया था. दिल्ली समेत आस-पास के दलित समुदाय के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया था. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने रविदास मंदिर को तोड़े जाने के लेकर बीजेपी और मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया था. इसके अलावा दलित समुदाय की नाराजगी को देखते हुए बीजेपी सरकार बैकफुट पर आ गई थी.

दिल्ली दलित बहुल विधानसभा सीटें

दिल्ली में दलित मतदाता 15 फीसदी के करीब हैं और दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में से 12 सीटें आरक्षित हैं. इनमें करोल बाग, पटेल नगर, मोती नगर, दिल्ली कैंट, राजेंद्र नगर, कस्तूरबा नगर, मालवीय नगर, आरके पुरम और ग्रेटर कैलाश अलावा उत्तर पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा क्षेत्रों में दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में है. प्रियंका ने काशी से रविदास की जन्मस्थली से दलित को लुभाने की कवायद की है.

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