हिन्दू संस्कृति की आस्था से जुड़ीं गाय पर राजनैतिक बिसात और सरकार की बेबसी

0
75

Written by : Pradeep Shukla

भारतीय सभ्यता और संस्कृति से गौ माता का गहरा सम्बन्ध राजनीति का एक अचूक शस्त्र हिंदुओं के वोटों पर एकाधिकार करने और सत्ता पर काबिज होने की दास्ताँ बयाँ करने के उद्देश्य से लेखक उस शासनकाल के शासक,का मन्तव्य प्रदर्शित करने का साहस करता है जब उत्तर प्रदेश के कत्लखानों में गायों के कटने पर राजनैतिक पार्टियों तथा हिंदूवादी संघठनों द्वारा गौ रक्षा का विगुल बजाते हुए सत्ता को घेरने में प्रबल विपक्षी दल के रूप में भारतीय जनता पार्टी की मुखरता ने दुनिया भर के हिंदुओं का रुख अपनी ओर परिवर्तित करने में सफलता हासिल कर देश के अधिकाँश प्रदेशों में भाजपा हिंदुत्ववादी सरकार के रूप में उभर कर आईl
उत्तर प्रदेश के बहु चर्चित फायर ब्रांड सन्त एवमं हिंदुत्व वादी नेता तथा हिन्दू युवावाहिनी संघठन के संस्थापक गौ रक्षा पीठ के महंत योगी आदित्य नाथ के समर्थकों की उठती मांग पर प्रदेश का मुख्यमन्त्री चुना जाना और उनके द्वारा गौ माता के रक्षार्थ उत्तर प्रदेश में चल रहे कत्लखानो को प्रतिबंधित किये जाने से प्रदेश की सड़कों और किसान के खेतों में गायों और उनके वंशजों की बाढ़ सी आ गयीl
इन पशुओं की दुर्दशा और इनके तांडव से किसानों की फसलें तबाह होने से अन्न का संकट तथा सड़क हादसों में हो रही मौतों पर उठती जनतन्त्र की आवाजों पर सरकार ने परिस्थितियों का अनुमान लगाये बगैर अपरिपक्व कार्यप्रणाली के तहत गौ आश्रय केंद्रों का निर्माण कराये जाने का ऐलान तो कर दिया मगर सरकार के अधीन अफसरों एवम जन-प्रतिनिधियों लूट खाऊ मानसिकता के चलते गौ माता और उनके वंशजों के लिए करोणों की खर्च कर बनवाये गए आश्रय केंद्र बनाम गौशालाओं की स्थिति बेहद दयनीय पाई जा रही हैl
हैरानी की बात तो ये है की जिन गायों अथवा उनके वंशजों को आश्रय केंद्रों में शरण मिली है उनकी दैहिक स्थिति सड़क पर घूमने वाले मवेशियों से बदतर पाई जा रही है यही नही अगर प्रदेश सभी जनपदों में संचालित आश्रय केंद्रों में अव्यस्था की वजह से हुयी मौतों के आंकड़े भी सरकार की ब्यवस्था को घेरते नज़र आएंगे सरकार के बचाव में बेपटरी होती ब्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हिन्दू युवा वाहिनी को भी मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने संचालित आश्रय केंद्रों में सुधर लाने हेतु सामाजिक पहल के माध्यम से जन सहयोग की अपेक्षात्मक क्रियान्वन की शुरुवात हुयी तो मगर इसी सिस्टम का हिस्सा होने की वजह से वाहिनी की ये पहल की अपने गन्तव्य तक पहुंचने में नाकाम रहीl
वस्तुतः ये कहना उचित ही होगा की सरकार की गौ रक्षा के लिए बनाई गयी निति पूरी तरह असफल रही है यदि गायों और उनके वंशजों के संरक्षण के लिए किसानों को प्रोत्साहन दे कर मवेशियों को ब्यवसायिक स्तर लाने की पहल की जाती तो वर्तमान में परिस्थियाँ संतोषजनक बनने के साथ रोजगार के तमाम अवसर प्रदान करती फिलहाल तो यही कहा जा सकता है की सरकार का करोणों का बजट केवल बंदरबांट के काम आया बाकी सब धरा का धरा धरा पर नज़र आता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.