मोदी सरकार के खिलाफ बढ़ता जन आक्रोश?

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नरेश दीक्षित संपादक समर विचार

मोदी सरकार पहले से ज्यादा ताकत के साथ सत्ता में आने के बाद पिछले छः महीनों के दौरान सरकार ने कारपोरेट नीतियों पर अधिक तेजी से अमल करना शुरू कर दिया है । सरकार ने सूचना अधिकार कानून को हल्का किया है,गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून ( यूएपीए ) और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ( एनआईए ) कानून को पहले से अधिक जन-विरोधी बना दिया है ।
धारा 370 और 35 ए को हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांट दिया गया है, वहाँ की जनता पर तमाम पाबंदियां थोप दी है और बड़ी संख्या में सेना तैनात कर कश्मीर को खुली जेल में बदल दिया गया है।
राष्ट्रीय नागरिकता पंजीयन (एनआरसी ) असम की अंतिम सूची जारी कर लाखों लोगों को राज्य विहीन बना दिया है ।
मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता के अधिकार से वंचित करते हुए यह सरकार नागरिक संशोधन विधेयक को संसद के अगले सत्र में येन -केन पारित करवाने का प्रयास कर रही हैं । इसके साथ ही सितंबर 2020 तक देशव्यापी राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीयन तैयार करने के लिए अधिसूचना जारी की गई है जिससे पूरे देश में 4-5 करोड़ लोगों के राज्य विहीन हो जाने की संभावना है ।
दूसरी तरफ आज देश की अथ॔ व्यवस्था में सुस्ती छाई हुई हैं । 2014 में पहली बार सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी जैसी नीतियों को लागू किया गया था जिससे अथ॔ व्यवस्था के सभी क्षेत्रों पर असर पड़ा है । वस्तुओं की ब्रिकी तेजी से घट रही हैं,उत्पादन इकाइयां बन्द हो रही है । लाखों मजदूरों को काम से निकाला जा रहा है । बेरोजगारी भयावह रूप लेती जा रही हैं ।
मगर आर्थिक सुस्ती से बाहर आने के नाम पर दी जा रही रियायतों और पैकेजों को कारपोरेट हड़प रहे हैं जो स्वयं आर्थिक मंदी के जुम्मेदार हैं, सरकार की इन घोषणाओं से वही मोटे हो रहे हैं,जबकि व्यापक जनता का जीवन बद से बदतर होता जा रहा है । रेलवे सहित सार्वजानिक क्षेत्र के बचे-खुचे उद्योगों का निजीकरण किया जा रहा है । प्रकृति का विनाश करते हुए जलवायु संकट पैदा करते हुए और जनता को कंगाल बनाते हुए सभी क्षेत्रों में कारपोरेटीकरण का दरवाजा खोला दिया गया है ।
मोदी सरकार द्वारा देश की विविधता को दम्भपूव॔क खारिज कर हिन्दी-हिन्दू-हिन्दूस्तान,एक राष्ट्र-एक चुनाव,एक राष्ट्र-एक टैक्स जैसी नीतियों को थोपने का निरंतर प्रयास हो रहा है । मजदूरों और किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। कश्मीर और उत्तर-पूर्व में मानवीय संकट पैदा करने वाली मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध बढ़ रहा है ।
अमेरिका में हाऊडी मोदी काय॔क्रम के दौरान,जो ट्रम्प को खुश करने के लिए आयोजित किया गया था, स्टेडियम के बाहर हजारों लोगों ने मोदी राज की निन्दा करते हुए प्रद॔शन किया था ।मोदी सरकार का लगातार विरोध तीव्र हो रहा है ।
भले ही संसदीय विपक्ष के कई नेता भाजपा के आगे आत्म-समप॔ण कर रहे हों और जो बचे हुए हैं वे मोदी के खिलाफ आन्दोलन खड़ा करने में सक्षम न हों, किन्तु मोदी-2 के कारपोरेट परस्त कदमों के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में जन आन्दोलन खड़ा हो रहा है और भाजपा के खिलाफ़ धीरे-धीरे जनमत का ध्रुवीकरण भी हो रहा है, जैसा कि महाराष्ट्र के चुनाव परिणामों के बाद भाजपा का सरकार न बना पाना इसका ताजा उदाहरण है ।

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