अयोध्‍या पर ऐतिहासिक फैसला देकर भारत के सुप्रीम कोर्ट ने रचा इतिहास.. पढ़े पूरा फैसला व 10 बड़ी बातें

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Lucknow (HM News)l वर्षों पुराने अयोध्‍या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। फैसले के साथ ही अब इस विवाद का भी पटाक्षेप हो गया है। यह पूरा फैसला 1045 पेज का है। अपने इस फैसले में कोर्ट ने रामलला विराजमान को इस जमीन का मालिक घोषित करते हुए कहा कि एक ट्रस्‍ट का गठन कर मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके अलावा कोर्ट ने सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मुहैया करवाने का भी आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि यह जमीन कहां दी जाएगी इसको उत्‍तर प्रदेश की सरकार तय करेगी। आपको बता दें कि यह पूरा मामला 2.77 एकड़ की विवादित जमीन का था। जबकि कोर्ट ने दूसरे पक्ष की भावनाओं का सम्‍मान करते हुए उन्‍हें इससे कहीं अधिक बड़ी भूमि मुहैया करवाने का आदेश दिया है।

फैसले में कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा और शिया बोर्ड की याचिका खारिज

अपने इस ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा और शिया बोर्ड की याचिका खारिज कर दिया। निर्मोही अखाड़े ने अपनी याचिका में विवादित जमीन का कब्‍जा और प्रबंधन का अधिकार मांगा था। हालांकि कोर्ट ने मंदिर के निर्माण के लिए बनने वाले न्‍यास में उन्‍हें शामिल किया गया है।
वहीं शिया बोर्ड ने अपनी याचिका में कहा था कि यहां पर स्थित मस्जिद शिया समुदाय ने बनाई थी लिहाजा इसको सुन्‍नी बोर्ड को नहीं दिया जा सकता है।सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस लिहाज से भी बेहद खास है क्‍योंकि 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा को एक तिहाई जमीन का मालिक बनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने मानी ये बातें

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबर के समय में उसके करीबी मीर बाकी ने ही मस्जिद बनवाई थी। इसमें 22-23 दिसंबर 1949 की रात को मूर्तियां रखी गईं। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर न होकर मंदिर था। कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को सही माना है। कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को बड़ा सुबूत माना है। सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि भगवान राम का जन्‍म अयोध्‍या में हुआ था। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ढांचे को गिराए जाने की घटना को गलत बताया।

ऐतिहासिक फैसला

कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्‍योंकि यह एकमत से लिया गया। पांच जजों की पीठ में शामिल किसी भी जज का फैसला अलग नहीं था। कोर्ट ने बेहद स्‍पष्‍टतौर पर कहा कि विवादित जमीन केवल आस्‍था की वजह से किसी को नहीं सौंपी है बल्कि इसके ठोस सुबूत हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर एकाधिकार का दावा साबित करने में नाकाम रहा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि दस्तावेजों के आधार पर कहा कि 1885 से पहले हिंदू विवादित ढांचे के बाहरी अहाते में स्थित राम चबूतरा और सीता रसोई में पूजा करते थे।

ऐतिहासिक फैसले की 10 बड़ी बातें

1- रामजन्मभूमि न्यास को मिलेगी विवादित जमीन

आखिरकार अयोध्‍या जमीन विवाद पर सुप्रीम फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश सुनाया है। मुस्लिम पक्ष यानि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया है।

2- मुस्लिम पक्ष को मिलेगी 5 एकड़ जमीन

सुप्रीम कोर्ट आदेश दिया कि मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन दी जाए। मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिमों को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया है। विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि न्यास का हक, जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र या राज्य सरकार को अयोध्या में ही उचित स्थान पर मस्जिद बनाने को जमीन देने का आदेश दिया है।

3- मुख्‍य ढांचा इस्लामी संरचना नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है। हालांकि, मुख्‍य ढांचा इस्लामी संरचना नहीं थी। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संदेह से परे है। इसके अध्ययन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के अंदर बने ट्रस्ट

मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्‍ट के निमार्ण का आदेश सीजेआइ ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार तीन महीने में स्कीम लाए और ट्रस्ट बनाए। यही ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण करेगा और इसकी निगरानी भी रखेगा।

5- शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े की याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या विवादित जमीन पर फैसला सुनाते हुए कहा कि हम 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसने देरी से याचिका दायर की थी। बता दें कि निर्मोही अखाड़ा का दावा केवल प्रबंधन का था।

6- जमीन पर दावा साबित करने में मुस्लिम पक्ष नाकाम

सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि मुस्लिम पक्ष अपना दावा साबित करने में नाकाम रहा है। विवादित स्‍थल पर मस्जिद होने के प्रमाण भी नहीं मिले। कोर्ट ने फैसले में कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भी यह सामने आया कि मुख्‍य ढांचा इस्लामी संरचना नहीं थी।

7- 1949 में रखी गईं मूर्तियां

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुसलमानों ने मस्जिद नहीं छोड़ी थी। हालांकि, हिंदू भी राम चबूतरा पर पूजा करते थे। उन्होंने गर्भगृह पर भी स्वामित्व का दावा किया। अयोध्या पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि 1949 में मूर्तियां रखी गईं। साक्ष्‍यों से पता चलता है कि मुस्लिम शुक्रवार को विवादित स्‍थल पर नमाज पढ़ते थे।

8- भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की आस्था और उनका विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। हिंदुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुआ था। यह व्यक्तिगत विश्वास का विषय है।

9- तार्किक नहीं था इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला

सीजेआइ रंजन गोगोई ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी। SC का कहना है कि विवादित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 2009 में आया इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला जिसमें जमीन को तीन हिस्सों में बांटा गया था, तार्किक नहीं था।

10- फैसले से संतुष्ट नहीं मुस्लिम पक्ष

सुप्रीम कोर्ट से फैसले से मुस्लिम पक्ष संतुष्‍ट नजर नहीं आ रहा है। मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हालांकि, कोर्ट के इस फैसले में कई विरोधाभास नजर आ रहे हैं। इसलिए हम फैसले से संतुष्ट नहीं है। हम फैसले का मूल्यांकन करेंगे और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे। हालांकि, उन्‍होंने अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं किया कि फैसले के खिलाफ वे अपील करेंगे या नहीं।

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