बंसल जी, सावधान! रहिएगा जलालपुर के उप चुनाव में रजनीश, डाॅ. राजेश व अवधेश द्विवेदी से

0
2800

⏺ धारा 370 एवं 35 ए का उपहार देने बैठे क्षेत्रवासियों को इन महानुभावों की गतिविधिया सोंचने को कर रही मजबूर

(सूरज यादव)

अंबेडकरनगर। प्रदेश के 13 विधान सभाओं में जल्द ही उप चुनाव सम्पन्न होने वाले है जिसमें हमीरपुर में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। धारा 370 और 35 ए कश्मीर से हटने के बाद प्रदेश में जनता द्वारा सीधा चुनाव पहली बार हो रहा है। राजनैतिक दृष्टिकोण से भी उ.प्र. अति महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है। 2022 में पार्टी का टैम्पो हाई रहे इस कारण बीजेपी सभी उप चुनावों को जीतने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है, गंभीरता का आंकलन इसी बात से किया जा सकता है कि प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में भाजपा द्वारा शासन की तरफ से एक मंत्री और संगठन से एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी को वहां रहकर चुनाव प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गयी है ताकि कहीं से कोई चूक न होने पाये।
विशेषकर रामपुर और अंबेडकरनगर में जलालपुर सीट बीजेपी जरूर जीतना चाहती है क्यों कि यहां पार्टी लोकसभा का चुनाव मोदी हुदहुद में भी हार चुकी है। पूरे प्रदेश में बीजेपी द्वारा चुनाव के लिए क्या व्यवस्था की गयी है इस पर जाना उचित नहीं होगा परन्तु जिले के जलालपुर में जो-जो लोग टिकट की लाइन में प्रमुखता से दिखलाई पड़ रहे हैं उन पर जनता तरह-तरह के आरोपों की बौछार कर रही है जो जलालपुर विधान सभा सहित पूरे जनपद के चाय, पान की दुकानों से लेकर गांव की चैपालों तक सुर्खिया बनी हुई है।
2016 में भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश लेने वाले रजनीश सिंह समय की नब्ज पकड़ने में माहिर माने जाते है। 2016 में पार्टी में आते ही हाव भाव बनाकर क्षेत्रीय नेतृत्व को गुमराह कर जिला मंत्री का पद हथिया ले गये और फिर क्या था पार्टी के जिला कार्यालय की जमीन खरीद में ही खेला करना शुरू कर दियेl
शुक्र था कि समय रहते तत्कालीन जमीन खरीद से तालुक रखने वालों को जानकारी होने से यह मामला उनके हाथों से निकल गया, अपने बाहरी आवरण के बलबूते जिला प्रशासन पर दबाव बनाकर उनके द्वारा गनर भी प्राप्त कर लिया गया फिर क्या था डाॅ. रजनीश की पार्टी में कुछ हैशियत रही हो अथवा नहीं लेकिन आम जनता में बाहरी आवरण के माध्यम से उनकी दुकान चलने लगी और उनके द्वारा जेब भरने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
क्षेत्रीय महामंत्री और जिले के प्रभारी नीरज सिंह जी की विशेष छाया होने के कारण डाॅ.े रजनीश सिंह दिन प्रतिदिन फल फूल रहे हैं। जनता में उनकी पकड़ का हाल यह है कि एक महानुभाव को पकड़कर उनके प्रभाव से दलित बस्ती में 50 सदस्य किसी प्रकार से बनाकर सक्रिय सदस्यता हासिल की गयी है। इतना ही नहीं जन चर्चाओं पर भरोसा करें तो जिले के अस्पतालों में उनके द्वारा भोजन का ठेका लिया गया हैे जहां भोजन के नाम पर अत्यन्त घटिया किस्म का भोजन मरीजों को दिया जाता है। ऐसी चर्चा आये दिन सुनने को मिलती रहती हैं।
भारतीय जनता पार्टी से टिकट मांगने वालों में दूसरे नम्बर पर 2017 में अपने कारनामों से पार्टी के सुनामी में हार का स्वाद चखना पड़ा। स्वयं तथा इनके दो चार जेबी लोगों द्वारा प्रदेश तथा क्षेत्रीय नेतृत्व को यह बताया जाता है कि इनके पिता शेर बहादुर सिंह के नाम पर अकेले 50 हजार वोट है परन्तु विचारणीय प्रश्न यह है कि 2014 में जब इनके पिता समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक थे और भारतीय जनता पार्टी के विरोध में लोकसभा चुनाव के समय काम कर रहे थे, उस समय भारतीय जनता पार्टी को लगभग 84 हजार वोट जलालपुर विधान सभा में मिले थे।
जब 2017 में शेर बहादुर जी के पुत्र डाॅ. राजेश सिंह जी भाजपा की सुनामी विधायकी का चुनाव लड़े तो इन्हे 76 हजार मत प्राप्त हुआ और 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टीै के प्रत्याशी को 91 हजार से ज्यादा मत मिला। अब सवाल उठता है कि जब शेर बहादुर सिंह का ध्वज लेकर भाजपा की सुनामी में डाॅ. राजेश सिंह गांव-गांव टहले तो आखिर इनका वोट घट क्यों गया? जन चर्चाओं पर भरोसा करे तो जो 50 हजार वोटों की बात कहीं जाती है वह पूरीे तरह से भ्रामक है कभी भी किसी पार्टी से इनके पिता दो बार लगातार विधायक नहीं बन पाये।
2014 के लोक सभा चुनावा में कटेहरी विधान सभा क्षेत्र के भीटी ब्लाक में बहुजन समाज पार्टी के कर्ता धर्ता रहे अवधेश द्विवेदी जी केन्द्र में भाजपा की सरकार बनते ही पार्टी के भीतर पुराने भाजपाई बताकर प्रवेश कर लिये और 2016 में तत्कालीन क्षेत्रीय महामंत्री संगठन अवध क्षेत्र बृज बहादुर जी की कृपा से जिला उपाध्यक्ष बन गये, इतना ही नहीं बृज बहादुर जी और उस समय इस जिले से सांसद रहे हरिओम पाण्डेय की कृपा दृष्टि से 2017 में कटेहरी विधान सभा क्षेत्र से पार्टीै का टिकट पाने में अवधेश द्विवेदी जी कामयाब हो गयेl
परन्तु टिकट पाते ही इनके द्वारा पार्टी का विभाजन जाति, क्षेत्र, पुराने और नये का भेद करते हुये इतनी समस्या पैदा कर दिये कि उन्हे चुनाव में हार का सामना करना पड़ा परन्तु चुनाव हारने के बाद भी क्षेत्रीय संगठन मंत्री बृज बहादुर जी के असीम प्यार से उन्हे महामंत्री का पद 2018 में प्राप्त हो गया फिर क्या था उन्होने भी दवाब बनाकर स्थानीय प्रशासन से गनर हथिया लिया और जनपद में अपनी राजनीति को तो चमका लिये लेकिन अवधेश द्विवेदी की जैसे-जैसे राजनीति चमकती गयी तैसे-तैसे भाजपा जिले में कमजोर होती गयीl
जिसका परिणाम रहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जब नरेन्द्र मोदी का हुदहुद चल रहा था, उस समय सूबे के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को कमल केे टिकट पर भी हार का मुंह देखने के लिए विवश होना पड़ा क्यों कि उस चुनाव के प्रभारी बृज बहाुदर जी प्रदेश द्वारा बना दिये गये थे और जलालपुर में डाॅ. राजेश सिंह/रजनीश सिंह, कटेहरी में अवधेश द्विवेदी तथा अकबरपुर में चन्द्रप्रकाश वर्मा के कंधे पर चुनाव लड़ा गया, परिणाम रहा कि इस प्रचण्ड लहर में भी हार का स्वाद चखने के लिए बीजेपी मजबूर हुई।
समय रहते अगर पार्टी नेतृत्व ने अवधेश, रजनीश व डाॅ. राजेश के कारनामों पर ध्यान रखकर काम नहीं किया तो पार्टी का नुकसान हो सकता है जिसकों लेकर जलालपुर क्षेत्रवासियों सहित जनपद वासी भी आशंकित है, क्यों कि सुनने में आ रहा है कि अपने कल, बल, छल का प्रदर्शन कर उक्त महानुभाव अपना दांव प्रदेश नेतृत्व के सामने चला रहे हंै।
जनपदवासी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष/गृह मंत्री अमितशाह जी को धारा 370 और 35 ए हटाने का उपहार देने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं लेकिन उक्त महानुभावों की गतिविधिया एक बार जनपदवासियों सहित जलालपुर वासियों को सोचने को मजबूर कर देती है कि अगर इन्ही महानुभावों का बर्चस्व पार्टी में बना रहा तो पार्टी का कितना नुकसान होगा, इसका अंदाजा लगाना सहज नहीं होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.