इंसेफेलाइटिस का मरीज मिलने से विभाग में मचा हड़कम्प, आनन फानन में लगे शिविर

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हिन्दमोर्चा संवाददाता महराजगंज। पनियरा विकास खण्ड क्षेत्र के ग्राम सभा विशुनपुरा में जेई अर्थात इंसेफेलाइटिस का मरीज मिला जिसके उपरान्त स्वास्थ्य विभाग के महकमे में हड़कम्प मच गया और आनन फानन में कैम्प लगाकर इससे बचाव एवं जल जनित बीमारियो के सम्बन्ध में अनेक प्रकार के सुझाव को ग्रामीणों द्वारा बता गया।
सूत्रों के मुताबिक मिली खबर के अनुसार पनियरा ब्लाक के ग्राम सभा विशुनपुर निवासी भोला पुत्र वकील उम्र 3 वर्ष को इंसेफेलाइटिस बीमारी होंने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कम मच गया।
इसी क्रम में  दिनांक 10/07/2019 को जिला मलेरिया अधिकारी महराजगंज के कार्यालय से SFW सराजुल हक ,हरिश्चन्द्र तिवारी, फिल्ड वर्क डाईवर आशीष ने गांव के मेंन – मेन रोड पर बलेरो गाड़ी में फागिंग मशीन रखकर दवा का छिड़काव कर कोटा पूरा कर किया गया । ग्रामीणो ने बताया कि जहां तक बलेरो जाने का रास्ता था लेकिन किसी प्रकार का दवा नहीं छिडका गया ।
स्वास्थ्य विभाग और नगरपालिका प्रशासन द्वारा डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाने के बजाय खानापूर्ति किया जा रहा है। गांवों में रासायनिक दवाओं का छिड़काव करने का फरमान जारी कर दिया गया है, लेकिन अभी तक रासायनिक दवाओं का छिड़काव शुरू नहीं किया जा सका है।

हालत यह है कि लोग बुखार, मलेरिया सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। अधिकारी सब कुछ ओके बताकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया फैलने की आशंका रहती है। डेंगू के मच्छर बारिश के पानी, छतों या कूलर में जमा होने से पैदा होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के लारवा की जांच करने का अभियान चलाने का फैसला किया था। जिला अस्पताल आने वाले बुखार से ग्रसित मरीजों का फीवर टेस्ट करने के लिए अलग से काउंटर कागज में तो बना दिया गया है। लेकिन कर्मचारी का अता पता नहीं रहता है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आंगनबाड़ी, आशा और एनएम को प्रशिक्षण तो दे दिया गया है।
लेकिन कहीं इस पर काम नहीं दिख रहा है। प्रशासन ने अब तक न तो सफाई कराई है और न ही अन्य जरूरी कदम उठाए हैं। नालों में दवाओं का छिड़काव कराने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही है। यही नहीं बारिश के मौसम में पानी भरे रहने से या रुके हुए पानी में मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है।
उनसे बचाव के लिए मलेरिया ऑयल का छिड़काव किया जाता है। डेंगू का लार्वा नष्ट किया जाता है। जबकि ताजा हालात में हो इसके विपरीत रहा है। जल भराव से निपटने के इंतजाम फेल हो चुके हैं।
उस पर से मलेरिया ऑयल का छिड़काव ही नहीं किया गया है। इस वजह से भी लोग बीमार पड़ रहे हैं। लाखों रुपए खर्च कर मशीन का कोई अता-पता ही नहीं है। इतना ही नहीं, नालों की सफाई कराने के दावों का भी पोल खुल गई है।
जबकि क्षेत्रों में डेंगू मलेरिया के लिहाज से अन्य संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर वहां के नगरवासियों को आगाह किया जाना चाहिए। साथ ही डेंगू मलेरिया की रोकथाम के लिए फाग मशीन से धुआं छोड़ने के साथ ही आवश्यक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए।
इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान तथा एएनएम के संयुक्त खाते में 10-10 हजार रुपया भेज दिया गया है, लेकिन अभी तक छिड़काव शुरू नहीं किया जा सका है। इस बाबत अधिकारियो का कहना है कि डेंगू, मलेरिया की रोकथाम के लिए आशा कार्यकर्ताओं तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।
जिसके लिए टीम गठित कर दी गई है। अस्पताल आने वाले बुखार से ग्रसित मरीजों का फीवर टेस्ट करने के लिए एक विशेष काउंटर बनाया गया है। लापरवाही का मामला संज्ञान में नहीं आया है। ऐसा मामला मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बिशेष संवाददाता शत्रुघ्न कुमार पाण्डेय

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