नशे की आगोस में बचपन, नशे के कारण बढ़ रही बालको में आपराधिक प्रवृत्ति

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हिन्दमोर्चा संवाददाता महराजगंज।
  • माता पिता की अनदेखी से लगातार हो रहा इनकी संख्या में इजाफा

  • नशे का बढ़ता कारोबार भी बालको की इस हालत का जिम्मेदार

बचपन मानव जीवन जीवन की सबसे खूबसूरत स्मृतियों में से एक है जो अपने आप मे एक अलग अनुभव है जो आधुनिक युग मे माता पिता की अनदेखी एवम गलत संगत के कारण नशे के अंधकार में खोता चल जा रहा है।ये अनगिनत बच्चे भूख से पहले नशे की आग को बुझाते है।
इस छोटी उम्र में जब बच्चे बैडमिंटन, फुटबाल आदि जैसे खिलौनों से खेलते है वही ये बच्चे धीरे धीरे नशे की लत के शिकार होते जा रहे है इस लत को पूरा करने की चाह में ये गलत कदम उठाने से परहेज नही करते क्योकि इनके माता पिता के द्वारा इन्हें नशे की दुनिया से जिंदगी तरफ वापस लाने की पहल के नाम पर मात्र मारना पीटना ही केवल समझ में आता है।
जब तक बच्चो के इन गलत आदतों के कारणों को जानकर उनका निस्तारण नही किया जाता तब् तक इन्हें जिंदगी की तरफ लाना मुश्किल है। किसी उचित पहल के न होने के कारण ये बच्चे नशे की दुनिया मे कैद होकर रह गए हैं। बच्चो में नशे की यह समस्या अब अंतरराष्ट्रीय समस्या बनती जा रही है युवा पीढ़ी के साथ अब मासूमों का बचपन भी इस जाल में फंसता नजर आ रहा है।
बालक ही देश का भविष्य हैं अगर समय रहते इस पर ध्यान नही दिया गया तो इससे हमारे देश का काफी नुकसान होगा।  आज हमारे देश मे नशामुक्ति केवल एक श्लोगन बन कर रहा गया है जिसका वास्तव में नशामुक्ति से कोई वास्ता नही है जो केवल समय समय पर अपनी छवि या राजनीतिक करियर सवारने के लिए नेताओ द्वारा जोर जोर से बोला जाता है पर इस क्षेत्र में कोई संतोषजनक पहल नही की जाती।
ऐसा ही कुछ नजारा है परतावल बाजार का जहाँ माशूम बच्चे लगातार नशे की लत के शिकार होते जा रहा है यहाँ दोपहर और शाम में बाजार लगने वाले बगीचे में तो लमुआ ताल आदि जगहों पर छोटे छोटे बच्चो को नशा करते आमतौर पर देखा जा सकता है ये बच्चे लगभग हर तबके से आते है नशा का गरीबी अमीरी से कोई नाता नही है अच्छे परिवारों के बच्चे भी इस लत के शिकार होते जा रहे है।
भाग दौड़ की इस जिंदगी में रोजी रोटी की जुगाड़ में अपना पसीना बहाते परिजन अपने बच्चो के अच्छे भविष्य के लिए जीतोड़ मेहनत करते हैं पर गलत संगत में पड़ कर इन बच्चो का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है परन्तु परिजन अपने बच्चो की इन गलत आदतों से अन्जान रह जाते हैl
जब तक बच्चे की आदतों की जानकारी माता पिता को होती है तब तक बच्चा नशे की लत की दिशा में आगे बढ़ चुका होता है अक्सर नशे की इस आदत के कारण किशोरों में आपराधिक प्रवृत्ति का विकास हो जाता है जो अपनी इस लत को पूरा करने के लिए ये बच्चे चोरी आदि जैसी हरकतों से बाज नही आते।
इस बाबत एक बच्चे से पूछने पर बच्चे ने बताया कि सभी बच्चे कबाड़ इक्कठा कर भीख मांगकर , घर से पैसे लेकर आते है और इन पैसों से सुलेशन आदि जैसी चीजें खरीदकर नशा करते है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये नशे के तरीकों से बच्चो को अवगत कराता कौन है क्योंकि इन बच्चो के नशा करने के कई तरीके है।
कुछ तरीके तो ऐसे है जिन्हें देखकर उनकी मानवी प्रवृति पर उंगली उठती है आखिर इस तरह से इन बच्चो का मानसिक विकास क्या होगा क्या ये अपने साधारण जिंदगी को जी पाएंगे कम उम्र में ही ये लगभग नशे के कारण गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते है जिसके बाद परिजनों को इन बच्चो की गलत संगत की जानकारी भी होती है पर समय बीतते ही बच्चा फिर नशे के उसी पथ पर अग्रसर हो जाता है।
बच्चो के इन आदतों का जिम्मेदार कही न कही समाज मे बढ़ता नशे का कारोबार भी है जो बच्चो और युवाओ को अपनी ओर आकर्षित करता है युवाओ और बच्चो को इस लत से दूर करने के लिए जरूरत है तो एक मजबूत पहल की गयी।

बिशेष संवाददाता शत्रुघ्न कुमार पाण्डेय।

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