भाजपा चुनाव घोटाले के बंदरबांट को लेकर भिड़े जिलाध्यक्ष व महामंत्री

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⏺  इस बवाल को लेकर जिले भर के भाजपाइयों में चर्चा का बाजार गर्म  ⏺ चुनाव के दौरान व अन्य कार्यक्रमों में जिलाध्यक्ष पर लग चुके है आरोप
⏺ कपिलदेव की कार्यप्रणाली से पार्टी प्रत्याशी को करना पड़ा हार का सामना

अंबेेडकरनगर। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में जहां देश के अधिकांश सीटों पर कब्जा जमाया है वहीं 55 लोकसभा के चुनाव में पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा जिसे लेकर संगठन के मुखिया व कुछ अन्य पदाधिकारियों के काले कारनामे की चर्चा जनमानस में जोेरों पर चल ही रहा था कि गत दिवस पार्टी कार्यालय पर चुनावी व अन्य कार्यक्रमों में घोटाले विवाद भी सामने आ गया।

ज्ञात हो कि पार्टी नेतृत्व द्वारा अंबेडकरनगर सीट किसी भी तरह न जाने पाये, इसके लिए चुनाव के पूर्व से ही तैयारी चल रही थी जिसके क्रम में विविध कार्यक्रम आयोजित किये गये और इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार की संचालित योजनाओं का आमजन को जागरूक कराना मुख्य लक्ष्य था।

इन कार्यक्रमों के लिए प्रदेश नेतृत्व द्वारा भारी भरकम धनराशि भी मुहैय्ा करायी गयी बावजूद जितने भी कार्यक्रम सम्पन्न हुये आयोजकों को धन नहीं मिल सका जिसका परिणाम रहा कि पार्टी की मंशा अनुरूप किसी कार्यक्रम में भीड़ नहीं जुट पायी। इधर चुनाव भी आ गया।

इस बीच भी साहित्य, पम्पलेट बूथों पर वितरण कराने के लिए धन उपलब्ध कराया गया लेकिन कहीं पहुॅच नहीं पाया जिसके बारे में संगठन महामंत्री सुनील बंसल द्वारा समीक्षा में फटकार भी लगायी गयी थी फिर भी जिलाध्यक्ष व उनके सहयोगियों के सिर में जूं नहीं रेंगा।

जब कि भाजयुमो, पिछड़ा वर्ग मोर्चा व किसान मोर्चा आदि के जिलाध्यक्ष कपिलदेव वर्मा पर घोटाले का आरोप भी लगा चुके हंै।

हालाकि देश में राष्ट्रवाद की लहर चली जिसमें जनता ने जातिवाद व धर्मवाद को नकारते हुये न पार्टी का उम्मीदवार कैसा है, देखा बस मोदी के नाम पर लामबंद हो गयी किन्तु 55 लोकसभा के चुनाव में जिला संगठन मुखिया के काले कारनामें के चलते पार्टी को हार का सामना करना पड़ा जो चुनाव के बाद अब धीरे-धीरे राज भी उजागर होने लगा है।

इसी मामले को लेकर सोमवार को पार्टी कार्यालय पर विवाद छिड़ गया। सूत्रों के अनुसार कार्यालय पर जिलाध्यक्ष व जिला महामंत्री अवधेश द्विवेदी अपने-अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे। इसी दौरान वाहनों व अन्य खर्च के मामले को लेकर दोनों आपस में भिड़ गये, देखते ही देखते अफरा-तफरी का माहौल हो गया।

बताया जाता है कि इस बवाल में हाथापाई तक हो गयी लेकिन बाद में कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप से मामला शान्ति हो गया जो पुलिस तक पहुॅचना नहीं बताया जा रहा है लेकिन धीरे-धीरे जिले भर के कार्यकर्ताओं में यह चर्चा जोरों पर है कि जिलाध्यक्ष व उनके सहयोगी जिसमें अवधेश द्विवेदी भी रहे. पहले तो सब मिल जुलकर नेतृत्व से मिले चुनावी व कार्यक्रमों के लिए खर्च में घोटाला किये, अब इस बात को लेकर भिड़ रहे है कि एक दूसरे को कम व ज्यादा रकम मिली है।

इस मामले में कई प्रत्यक्ष दर्शियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीच बचाव न हुआ होता तो जिस तरह से जिलाध्यक्ष व महामंत्री लेन-देन में आक्रोशित थे, खून खराबा भी हो जाता। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह दोनों का नाटक है, सब चट्टे-बट्टे हैं।

रिपोर्ट : हिन्दमोर्चा टीम अम्बेडकरनगर

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