“भगवा आतंकवाद” या ”हिंदू आतंकवाद” – द ग्रेट इण्डियन कान्सपिरेसी

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  • *पिछले दस सालों में अगर आपको “भगवा आतंकवाद” या ”हिंदू आतंकवाद” जैसे शब्दों से शर्मिंदा होना पड़ा है या आत्मग्लानी महसूस हुई है… तो फिर आपको डॉ. प्रवीण तिवारी Praveen Tiwari की किताब The Great Indian Conspiracy (हिंदी में इस किताब का नाम है “आतंक से समझौता”) ज़रूर पढ़ना चाहिए जो कुछ दिन पहले ही बाज़ार में आई है.*..

*राजेश कुमार यादव*

इस किताब को पढ़ते ही आप तार्किक तौर एक बार ये जरूर सोचने के लिए मजबूर हो जाएंगे कि “भगवा आतंकवाद” के नाम पर देश की एक बड़ी आबादी को किस तरह से शर्मिंदा किया गया… इस किताब को लिखने के लिए टीवी पत्रकार प्रवीण तिवारी ने करीब ढाई साल तक रिसर्च किया है… इस किताब को लिखने के दौरान वो समझौता ब्लास्ट और मालेगांव ब्लास्ट की जांच से जुड़े एनआईए के अंडरकवर ऐजेंट तक पहुंच गए और उससे कई जानकारियां हासिल कीं…

प्रवीण ने अपने रिसर्च के दौरान समझौता ब्लास्ट के आरोपी रहे सिमी के आतंकवादियों के नारको टेस्ट करने वाले बैंगलोर के जाने माने साइनटिस्ट बीएम मोहन से बात की, जिन्होने कई बड़े खुलासे किए हैं… प्रवीण ने मनमोहन सरकार के दौरान देश के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे बीडी प्रधान से भी मुलाकात की, और उन्होने भी कई चौंकाने वाली जानकारियां दी, जो इस किताब में मौजूद हैं। ये किताब “भगवा आतंकवाद” से जुड़े एक बड़े मिथ से पर्दा उठाती है… और कई बड़े खुलासे करती है…

खुलासा नंबर 1 – इस किताब में एफएसएल कर्नाटक के डायरेक्टर बीएम मोहन ने बताया है कि उन्होने जब सिमी के आतंकवादियों का नारको टेस्ट किया था तो उसमें उन सब ने ना केवल समझौता ब्लास्ट बल्कि मालेगांव ब्लास्ट में भी शामिल होने की बात मानी थी…

उनका कहना है कि नार्को, ब्रेन मैपिंग, लाइ डिटेक्टर तीनों ही टेस्ट में इन आतंकियों ने समझौता और मालेगांव मे हाथ होने की बात स्वीकार की थी… खास बात है कि “भगवा आतंकवाद” का नाम आने से पहले एजेंसियों ने ये दावा किया था कि इन धमाकों में सिमी और पाकिस्तानी आतंकियों का हाथ है।

खुलासा नंबर 2 – इस किताब में इसी नारको टेस्ट के हवाले से बताया गया है कि सिमी के आतंकवादियों ने बताया था कि इंदौर के कोठारी बाज़ार से धमाके में इस्तेमाल किए गये सूटकेस खरीदे थे… दरअसल इन्ही सूटकेसों की वजह से जांच एजेंसियां इंदौर तक पहुंची थी…

लेकिन हैरत की बात देखिए कि जब एनआईए ने जब इस मामले की जांच अपने हाथ में ली और इसमें “भगवा आतंकवाद” का नाम सामने आया तो सूटकेस वाली यही थ्योरी जस की तस सामने रख दी गई… बस किरदार बदल दिए गए… सिमी की जगह भगवा आतंकवादी सामने आ गए…

एनआईए के मुताबिक इन हिंदू आतंकवादियों ने इंदौर के कोठारी मार्केट से ही सूटकेस खरीदे थे जो धमाके में इस्तेमाल हुए… अब आप खुद सोचिए कि जो सूटकेस भगवा आतंकियों ने खरीदे थे उसके लिए सिमी के आतंकवादियों ने दो साल पहले ही ये कैसे मान लिया कि वो सूटकेस उन्होने खरीदे हैं और वो भी ठीक उसी जगह और उसी दुकान से…

खुलासा नंबर 3 – कर्नल पुरोहित का रोल… क्या कर्नल पुरोहित आतंकी हैं ??? या वो डबल ऐजेंट थे ??? या फिर वो अपने अधिकारियों के इशारे पर एक मिशन को अंजाम दे रहे थे जैसे खुद कर्नल पुरोहित का दावा है…

अगर वो मिशन पर थे तो वो मिशन किसके खिलाफ था… आपको इसके लिए ये किताब खुद पढ़नी होगी और अपना निष्कर्श भी खुद निकालना होगा।

खुलासा नंबर 4 – क्या “भगवा आतंकवाद” की इस पूरी साजिश का एक बड़ा एंगल इस देश से आरएसएस के वजूद को खत्म कर देना था ??? क्या इस साज़िश का अंत संघ के दो बहुत बड़े नेताओं की हत्या पर जाकर खत्म होता ???

नंबर 5 – 2009 में क्या मोदी के संभावित उदय को देखकर कांग्रेस सरकार ने ये साजिश रची थी ??? क्या चिदंबरम और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने मोदी, बीजेपी और संघ की राजनैतिक हत्या करने की सुपारी ली थी ??? ये किताब इस बारे में विस्तार से प्रकाश डालती है।

खुलासा नंबर 6 – कांग्रेस सरकार के शासनकाल में जब ये जांच चल रही थी तो सारी अंदरूनी और रहस्यमयी जानकारियां मीडिया के एक खास वर्ग को ही क्यों मिलती थी ??? क्यों एनआईए की जांच से जुड़े सारे खुलासे तहलका और कारवां मैगजीन को ही मिलते थे… तहलका को असीमानंद का इकबालिया बयान सिर्फ दो दिन में मिल गया,

भगवा आतंकवादियों की गुप्त बैठकों के टेप उसके रिपोर्टर आशीष खेतान (वर्तमान में आप के नेता) के हाथ लग गए… वहीं कारवां ने तो खुद असीमानंद का इंटरव्यू ही छाप दिया… इन दोनों मीडिया हाउस का झुकाव इस देश के सारे पत्रकार जानते हैं।

खुलासा नंबर 7 – भगवा आंतकवादी की पूरी थ्योरी सिर्फ इकबालिया बयानो के आधार पर है… जिसमें सारे आरोपियों ने एक दूसरे के राज़ खोले हैं, जैसे इसने ये कहा था तो उसने वो कहा था… लेकिन बयानों के अलावा कोई सबूत नहीं है… सिर्फ एक बाइक है जो साध्वी की थी जिसके ज़रिए धमाका किया गया…

लेकिन बड़ा सवाल क्या जो व्यक्ति इतना बड़ा षड़यंत्रकारी है क्या वो ऐसी भूल करेगा कि अपनी बाइक ही धमाके के लिए दे दे, वो भी सब जानते हुए। यही वजह है कि एनआईए बार-बार कोर्ट में इस मामले में फटकार सुनती है।

खुलासा नंबर 8 – इस पूरे केस में दो लोग अब तक फरार हैं संदीप डांगे और कलसांगरा… इन्हे आजतक एनआईए क्यों नहीं पकड़ पाई या फिर पकडना नहीं चाहती… इस किताब में एनआईए के एक अंडरकवर ऐजेंट ने बताया है कि कैसे एक बार संदीप डांगे उसके सामने खड़ा था, लेकिन उसके आला अधिकारियों ने आदेश दिया कि वो डांगे को नहीं पकड़े।

नंबर 9 – समझौता और मालेगांव ब्लास्ट एक “भूत” ने किया है… जी हां ये “भूत” है सुनील जोशी का… जोशी का नाम जब मास्टरमांइड के तौर पर इस आतंकी वारदात में सामने आया तब तक खुद उसकी हत्या कर दी गई थी… अब हर आरोपी के इकबालिया बयान में सुनील जोशी का नाम आता है या उनसे जानबूझकर बुलवाया गया है… एनआईए जानती थी कि सुनील जोशी तो जिंदा हो नहीं सकता इसलिए सच कभी सामने नहीं आएगा।

खुलासा नंबर 10 और सबसे दर्दनाक खुलासा – महाराष्ट्र एटीएस ने इंदौर के कनाड़िया रोड से एक युवक दिलीप पाटीदार को उठाया था, उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि वो एक फरार आरोपी कलसांगरा का किरायेदार था… आज 10 साल होने आए हैं पाटीदार का कोई पता नहीं है… क्या उसे भी एटीएस ने वो ही यातनाएं दी जिनका जिक्र साध्वी प्रज्ञा करती हैं??? और वो यातनाएं नहीं सह पाया और मर गया…

आज भी इंदौर में उसकी बीवी पूछती है कि में खुद को सुहागन कहूं या विधवा… उसके मासूम बेटे को आज तक अपने पिता का चेहरा याद नहीं है… इस किताब को ज़रूर पढ़ना चाहिए… ये किताब सही में पूरे केस पर एक नई रौशनी डालती है अगर आप इस किताब को पढ़ना चाहते हैं! मुझे लगता है कि इस किताब के पढ़ने से जो भी सच्चाई होगी कु ल कर सामने आ जायेगी*?

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