घटिया सामान का बढ़िया बाजार बना इण्टरनेट

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डा0 नरेन्द्र तिवारी (स्वतंत्र पत्रकार)

एक नया चलन चल पड़ा रहा है और बड़ी तेजी से फैल रहा है कि कोई भी उठाता है और अपने मोबाइल से अपपी कोई भी ऐसी वैसी हरकत या कृत शूट करता है, इंटरनेट पर अपलोड कर देता है, उसवे लाखों करोड़ों देखने वाले मिल जाते हैं किसी भी नकल पैरोडी ,ई आ…………….ऊ जैसी आवाजें , शरारत और चकल्लस अंड बंड, ऐसा वैसा , निम्न तुच्छ और निकृष्ठ ……..कुछ भी शूट कर अपलोड करने से भी लाखों करोडों देखने वाले मिल जाते है, जो घटिया है , उसे तो लाखों लोग देख ही रहे है और जो घटिया भी नहीं है, समाज में जिसकी तनिक भी स्वीकार्यता नहंी है उसे भी करोडों लोग देख रहे है।

कोई भी फर्जी नाम से कोई रामू तो कोई सामू उल्लू पिल्लू के नाम से मिल जुल कर किसी तरह का दस पंद्रह मिनट से लेकर एक घ्ंाटे का वीडियों बना कर नेट पर डाल देते है देखते ही देखते उसको भी लाखें करोडों देचाले वाले (क्लिक) मिल जाते है यानि ग्राहक मिल जाते है.

क्योंकि हर देखने वाला उस वीडियों के बनाने वाले को दो चार पैेसे अनजाने में ही दे जाता है और इन देखने वाले की तादाद चूंकि लाखों करोडों में होती है तो ये दो चार दस पैसे देखते ही देखते लाखों करोडों रूपये की बडी धनराशि में बदल जाते है। इस खेल में लाखों लोग माला-माला होते जा रहे है। गोण्डा के दूबे जीर हो या झंासी के मिश्रा जी हो या श्रीवास्तव जी ।

इंटरनेट के इस सागर में इन लोगों के मजे आ गये है। खूब पैसे बटौरे जा रहे है, छोटे शहरों और कस्बे के महारथियों पर तो इंटरनेट का छप्पर जब तक फट रहा है, क्योकि वे लोग अपनी पहचान छिपाकर बाथरूम सीन अपलोड कर रहे है और दुनिया भारत के छोअे शहरों पले बडें मिडिल क्लास के लडके व लकडियों के शरीर की सुन्दरता पर मोहित हो रही है।

छोटे शहरों में विक्रित योन हिंसा को बढावा देने में भी इस तरह के सेक्स बेस्ड वीडियों को अगर जिम्मेदार ठहराया जाये तो शारय गलत नहीं होगा। लडके लडकियां अपने प्रोपाइल वीडियों बना रहे है। जिनमें कई बार बाथरूम के दृश्य होेते है। जिनमें अपने जिस्म को नुमाया तरीके से दिखाया जा रहा होता है। इस विधा का तेजी एसे भारतीयकरण हो रहा है। लडकियां अपनी शादी के लिये भी मोबाइल से वीडियों प्रोपाइल बनाकर अपलोड कर रही है।

वीडियों सोशल मीडिया का सबसे ताकतवर माध्यम बन चुका है। भारत का आम आदमी वीडियों का आशिक है और सभी के पास ढेर सारा समय है। ज्यादातर इससी में फस जाते है। ट्रेण्ड करते हुये वीडियों से पार पाना आसान नहीं रहा गया है। व चाहे जैसे हो सेक्स के हो या महाराष्ट्र, केरल और यू0पी0 समेत देश के कई स्थानों पर वीडियों से फेैली नफरत वाले हो । कई स्थानों पर माॅब लिचिंग इनही वीडियों के कारण हुयी है।

वीडियों की ताकत का अहसास इतना लोक प्रिय हो रहा हैं कि लोग जहाँ पर इसका इस्तेमाल नहंी करना चाहियें वहां करने लगे हैं और यही व मामला है हजस पर सिर धुनने का जी चाहता है कि अब यही वीडियों बम्पर कमायी का जरियां बनते जा रहे है।

नेट पर इस तरह के वीडियों अपलोड करने के लिये तैयार की गयी नीतियां तथा सुरक्षा के सेन्सर से अति सास्कृतिक ललित कला वाले यह वीडियों आसानी से निकल जाते है। इस मामले में अगर किसी के खिलाफ कभी कोई कार्यवाही होती भी है तो कुछ समय के लिये अपलोडिंग बंद कर दी जाती है बाद में फिर शुरू हो जाते है।

इंटरनेट पर रोजाना इस तरह के वीडियों बढ़तें जा रहे हैं और इस तरह के वीडियों से लुफ्त लेने वाले भी लेकिन कोई खलबली भी नहंी मच रही है। बच्चां हो या बूढ़ा, पढ़ा लिख हो या बे पढ़ा लिख , महिला हो या पुरूष सभी को रोजाना वीडियों देखने के लिये समय निकाला जरूरी सा हो गया हैं । जब टी0वी0 आया था तो जैसे हल्ला मचा था कि भारतीय संस्कृति को खतरा पैदा हो गया है। वैसा इंटरनेट के खिलाफ कोई शोर नहीं मचता है।

इंटरनेट पर जो कुछ परोसा जा रहा है उसे देखने वाले उम्मीद से इतने ज्यादा होगे और लगातार बढ़ते जायेगे इससे लेकर अब सोचा जाने लगा है कि आखिर व लोग है कि इस प्रकार की निम्न स्तरीय वीडियों से प्रभावित होते है। आखिर वह सब जो हमारे समाज में सामान्य रूप से प्रदर्शित नहीं होता था या जिसे यह कहकर खारीज कर दिया जाता था कि यह सब सभ्य सामाज के हित में नहंी है। उससे देखने के लिये अंदर से इतने लालायित क्यो निकलें ।

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