सच की गर्दन मरोड़ने वालों के पेट में सच की मरोड़!!

0
64

Gonda : प्रदेश भर के किसानों की फसलें जब छुट्टा मवेशियों के झुण्ड तबाह कर रहे थे,किसान अपनी फसलें बचाने के लिए बेजुबान पशुओं को भाला फरसा मारने के साथ आग से झुलसाने जैसे निर्मम कृत्य करने पड़ते थे जिसे आज भी पूर्णतः रोका नही जा सका है.

किसानों और पशुओं के इस द्वन्द के बीच खत्म हो रही मानवीयता पर जब समाज की परवाह करने वालों में से कुछेक ने अपनी आवाजें बुलन्द की तो सरकार को बेजुबानों को आश्रय देने के लिये कदम उठाना पड़ा और प्रदेश भर में गौ आश्रय केन्द्रो के निर्माण की मंजूरी दी गयी.

सरकार की इस परियोजना का शुभारम्भ मुजेहना ब्लॉक के ग्राम रुद्रगढ़ नौसी स्थित चारागाह की जमीन पर प्रथम मॉडल गौ शाला के रूप में हुआ इस जमीन पर गौ आश्रय केंद्र का निर्माण कराये जाने की मांग विगत दो वर्षों से निरन्तर की जा रही थी इस परिपेक्ष्य में महामहिम राज्यपाल,प्रदेश के मुख्यमन्त्री, गोरक्षा पीठ,जैसे बड़े दरबारों में अर्जी लगाने के साथ जनपद स्तर से आंदोलन चलाया गया!

Read also : सीएमओ साहब! जब क्लीनिक के हैैं रजिस्ट्रेशन तो कैसे चल रहा बसन्त हास्पिटल

मांग और मंजूरी के बीच वो नाम गायब मिला जिसने छुट्टा मवेशियों को आश्रय प्रदान करने की उठाई इसकी क्या वजह रही होगी ये समझना मुश्किल नही है 1 करोड़ बीस लाख रूपये से बनने वाली इस गौ आश्रय केंद्र के निर्माण में अनिमियत्ता निर्माण का घटिया स्तर उसके बाद गौ आश्रय केंद्र का उद्घाटन किये जाने के बाद केंद्र में पशुओं की हो रही लगातार मौत सरकारी धन की खर्च में कोताही का सबसे बड़ा सबूत है और इस लूट की योजना को निर्बाध गति से चलयमान बनाये रखने के लिए ईमानदार,और कर्मठ लोगों की उपेक्षा स्वाभाविक रूप से होनी ही थी.

चौकाने वाली बात तो ये है की क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को और विभागीय अधिकारियों को इस बात की जानकारी होते हुए भी की रुद्रगढ़ नौसी की चारागाह पर गौशाला के लिये संघर्षरत रहे युवा समाज सेवी की मेहनत और लगन को बरियता न दे कर गौ आश्रय केंद्र का संचालन की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को सौंपीं गयी जिन्हें न कोई अनुभव है और न कभी इस क्षेत्र के किसानों अथवा छुट्टा मवेशियों की चिंता की है।

Read also : सीएमओ साहब! रजिस्टेशन क्लीनिक के फिर कैसे चल रहे हैं अस्पताल

ऐसे लोग जो पशुओं के लिए चारा रख रखाव की ब्यवस्था आदि के लिए सरकार द्वारा निर्गत धन पर नज़रें गड़ाये हुए हैं वो लोग व्याप्त अभावों पर उठती आवाजों पर तिलमिलाते हुए आवाज उठाने वाले समाज सेवकों और निष्पक्ष पत्रकारों की नियत पर सवाल खड़े करते हैं।

आलम ये है की अधिकारी तो आश्रय केंद्र में व्याप्त अभावों के प्रति मुखर हो कर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए एक्शन तो लेते है मगर संचालन अथवा देख रेख के लिए तैनात लोग इस जुगत में रहते हैं कहाँ से और कैसे पशुओं का पेट काट कर धन की लूट की जाए।

Report : Pradeep Shukla 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.