एफआईआर के आदेश देने वाले डीएम से मायावती के जूते साफ करवाएंगे आजम

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  • आजम खान की इस हिमाकत को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष में समझने की जरुरत हैं।

  • ऐसी गंदी मानसिकता वाली सोच के आजम को लेकर अखिलेश यूपी में कैसा शासन देंगे

  • एफआईआर के आदेश देने वाले डीएम से मायावती के जूते साफ करवाएंगे आजम

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सवाल यह नहीं है कि यूपी के पूर्व मंत्री और लोकसभा चुनाव में रामपुर से सपा-बसपा के गठबंधन के उम्मीदवार आजम खान ने अपनी प्रतिद्वंदी भाजपा उम्मीदवार जयाप्रदा के अंग वस्त्रों को लेकर नीचतापूर्ण टिप्पणी की है। अहम सवाल आजम खान की हिम्मत का है। आजम की इस हिम्मत को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष में समझने की जरुरत है।

आज देश के हालात ऐसे हो गए है कि आजम खान जैसे राजनेता एक हिन्दू महिला के लिए इस तरह के बयान सार्वजनिक तौर पर देते हैं। जयाप्रदा जानी मानी फिल्म स्टार हैं और दो बार रामपुर की सांसद रह चुकी हैं। जयाप्रदा तो आजम खान को अपना भाई मानती रही, लेकिन इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि आजम खान जयाप्रदा के अंडरवियर की बातें कर रहे हैं।

आजम खान को भी पता है कि ऐसी गंदी बातें करने के बाद भी उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा, क्योंकि भारत में धर्मनिरपेक्षता वाला लोकतंत्र हैं। आजम खान भले ही एक महिला के अंडरवियर की बातें करें, लेकिन रामपुर के लाखों लोग उन्हें ही वोट देंगे। यानि ऐसे लोगों को तो आजम खान की ऐसी बातें अच्छी लगती हैं।

यह हमारा धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र ही है, जिसमें नीचतापूर्ण बयान देने के बाद भी आजम खान चोरी और सीना जोरी वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। असल में बयान के बाद रामपुर के डीएम और जिला निर्वाचन अधिकारी ने आजम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। लेकिन आजम ने बिना कोई घबराहट दिखाए कह दिया कि मैं ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों से डरता नहीं हंू।

यूपी में सपा-बसपा का राज आने पर इसी डीएम से मायावती के जूते साफ करवाउंगा। अंदाजा लगाया जा सकता है कि आजम के हौंसले कितने बुलंद हैं। यदि आजम को इस बात का अहसास होता कि एक महिला की बेईज्जती करने की सजा मिल सकती है तो वे कभी भी गंदी बातें नहीं करते।

गंभीर बात तो यह है कि जिस चुनावी सभा में आजम ने जया प्रदा के लिए अश्लील बातें कहीं उस सभा में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे। अखिलेश ने अभी तक भी आजम के बयान की निंदा नहीं की है।

महिला होने के नाते मायावती भी जया प्रदा की समर्थन में नहीं आई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि सपा के भीष्म पितामह माने जाने वाले मुलायम सिंह भी चुप हैं। हालांकि जयाप्रदा ने अब आजम खान का नामांकन रद्द करने की मांग की है।

एस.पी.मित्तल) (15-04-19)
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