बीजेपी प्रत्याशी की लिस्ट जारी होते ही कौन हैं मुकुट बिहारी को लेकर कवायद शुरू

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⏺ स्थानीय प्रत्याशी की घोषणा न होने से आमजन में प्रतिक्रिया जारी
⏺ नेतृत्व द्वारा लिये निर्णय से पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों में मायूषी

अंबेेडकरनगर। बीजेपी नेतृत्व द्वारा लोस चुनाव में प्रत्याशियों की सूची का इंतजार कर रहे पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जैसे ही सूची जारी हुई, अब कौन हंै मुकुट बिहारी को लेकर जनपद वासियों में कवायद शुरू हो गयी है। यहां तक की इस सीट पर कैसे कमल खिल पायेगा लोगों में चिंता सताने लगी है।

ज्ञात हो कि भाजपा द्वारा पिछले दिनों यूपी के अधिकांश सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गयी और घोषित प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ मैदान में प्रचार में भी जुट गये हैं किन्तु कुछ सीटों पर प्रत्याशी को लेकर मंथन चल रहा था जो सोमवार की लिस्ट के बाद लोगों के इंतजार खत्म हो गये, इसमें 55 लोकसभा सीट भी है, इस सीट से बहराइच के विधायक व सरकार के मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को मैदान में उतारा गया.

जिसकी सूची भी जारी हो गयी है किन्तु जैसे ही यह सोशल मीडिया पर लोगों के सामने आयी, जगह-जगह चाय व पान की दुकानों से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर यह चर्चा शुरू हो गयी कि कौन हैं मुकुट बिहारी जिन्हे पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है?

अब इससे सवाल यह उठता है कि जिस तरह से प्रत्याशी को जानने के लिए लोग उत्सुक हैं ऐसे में उनके साथ पार्टी कार्यकर्ता व समर्थक कैसे प्रचार में सामंजस्य बनायेंगे जब उनके चेहरे से अभी तक आमजन वाकिब ही नहीं है। इस पर लोेगों का कहना है कि इससे लगता है कि भाजपा को आकाशीय और मौसमी नेता ही पंसद हंै।

लोगों में यहां तक चर्चा है कि यही हाल गत 2004 व 2009 के चुनाव में हुआ था जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है फिर भी इससे सबब नहीं ले रही है। 2014 के लोस चुनाव के सवाल पर अकबरपुर विधान सभा क्षेत्र के दर्जनों ने कहा कि उस समय मोदी लहर थी जो वर्तमान में नहीं दिखाई पड़ रही है।

इस बार गठबंधन रोड़ा बना है जिससे बीजेपी नेतृत्व को सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए था किन्तु न जाने क्या समझकर निर्णय लिया?

इल्तिफातगंज संवादसूत्र के अनुसार-क्षेत्र मंे जिधर देखिए लोगों में खुशी का माहौल है जिनके द्वारा यह कहां जा रहा है कि अच्छा हुआ भाजपा ने किसी स्थानीय कुर्मी विरादरी को मैदान में नहीं उतारा नहीं तो गठबंधन के लिए ठीक नहीं होता।

आखिर! क्यों के बावत कई लोगों ने कहा कि मुकुट बिहारी यहां नये चेहरे के रूप में है, कोई जिले का होता तो कुछ और ही बात होती। कारण उससे लोग परचित है, आज यहां मुकुट बिहारी चुनाव लड़ने आये हैं, जीत गये तो 5 साल कभी कभार दर्शन हो जायेंगे लेकिन यदि कही हार गये तो फिर किसी का हाल तक लेने नहीं आयेंगे। वैसे यह पार्टी का निर्णय है, हालाकि कहीं न कहीं विपक्षी दलों के लिए अब रास्ता साफ हो गया है।

मालीपुर संवादसूत्र के अनुसार-क्षेत्र के कई लोगों ने दूरभाष पर यह जानने के लिए संवाददाता कोे फोन किया कि कौन प्रत्याशी भाजपा से मैदान में आया जैसे ही यह उन्हे जानकारी दी गयी कि मुकुट बिहारी वर्मा, लोग यह कहने लगे कि जो सोचा गया था, नहीं होे सका, नहीं तो फिर यह सीट केन्द्र के लिए महत्वपूर्ण होती किन्तु जब स्थानीय प्रत्याशी ही ढूढ़े नेतृत्व को नहीं मिले, आकाशीय ही आये तो इससे अच्छा जिस दल का प्रत्याशी जिले का निवासी है वहीं बेहतर है।

टाण्डा संवादसूत्र के अनुसार-इनाम इलाही व उनके साथ कई लोगों ने इस पर व्यक्त करते हुये कहा कि यहां भाजपा में तमाम विद्वान, जुझारू व कर्मठीे है जिनकी एक पहचान भी है। ऐसे में बाहरी प्रत्याशी लाने का क्या मतलब है, जिस तरह से तर-तरह की प्रतिक्रियाएं हो रही है, इससे कही न कहीं साफ है कि हार व जीत तो अलग का विषय है लेकिन भाजपा द्वारा जिले के प्रत्याशी न घोषित करने से जनपदवासियों में अंसतोष व्याप्त है।

रिपोर्ट : हिन्दमोर्चा टीम अम्बेडकरनगर

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