*मोदी को चुनौती देने की तैयारी में एक ऐसा प्रत्‍याशी जो ‘मरकर जी उठा’*

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*राजेश कुमार यादव*

वाराणसी :  85 साल के रामअवतार यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इस चुनाव में उनका सरोकार विकास, रोजगार,स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा जैसे मुद्दों से नहीं है क्‍योंकि उनकी समस्‍या और भी बुनियादी है। सरकारी कागजों में वह 8 साल तक ‘मृतक’ रहे हैं, कागजों की गड़बड़ी तो ठीक हो गई लेकिन उन्‍हें अपना हक अभी तक नहीं मिला।

आजमगढ़ जिले के सगरी ब्लाक के गोराईपटटी गांव के रामअवतार यादव इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ संसदीय सीट से मुलायम सिंह के खिलाफ लड़ने की तैयारी कर चुके थे।

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उनकी कोशिश बेकार गई क्‍योंकि उनका पर्चा खारिज हो गया। हैरानी की बात यह है कि राजस्‍व दस्‍तावेज में मृत रामअवतार के पास बाकायदा आधार कार्ड और मतदाता पहचानपत्र है।

*एक बीघा जमीन के लिए मृत बताया*

राम अवतार की एक बीघा जमीन को उनके ही रिश्तेदारों ने 2005 में उनको सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखाकर अपने नाम करवा लिया। लंबी लड़ाई के बाद 2013 में उनका नाम खतौनी व परिवार रजिस्टर में फिर से दर्ज हुआ। जमीन पर सरकारी दस्तावेज में तो उनके नाम दर्ज हो गया लेकिन कब्जा अभी तक नहीं मिला है।

राजस्‍व दस्‍तावेजों में मृत लोगों की संख्‍या पूर्वांचल में कम नहीं है। ये वे लोग हैं जो सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार के चलते जिंदा व्यक्तियों को राजस्व दस्तावेज में मृत दिखाकर जमीन हड़पने वाले गैंग के शिकार हो गए हैं। अक्‍सर यह धोखा उनके नजदीकी और परिवार के सदस्‍य ही करते हैं।

*मृतक संघ से मिली मदद*

सरकारी भ्रष्‍टाचार और अपनों के धोखे से पीड़‍ित लोगों ने कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मृतक संघ बनाया है। इस संघ के संस्‍थापक लाल बिहारी यादव जब 21 साल के थे तो उनके रिश्तेदारों ने मुर्दा घोषित कर दिया।

30 जुलाई, 1976 को राजस्व रेकॉर्ड में मृत घोषित होने के बाद लालबिहारी ने अपने को जिंदा होने का सबूत देने के लिए राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से लेकर बच्चे के अपहरण तक की घटना को अंजाम दिया।

18 साल के संघर्ष के बाद, उन्हें 30 जून 1994 को जीवित घोषित कर दिया गया था। लाल बिहारी ने अपने जैसे लोगों को न्याय दिलाने के लिए 2014 में मृतक संघ की स्थापना की।

उनका कहना है, ‘ मृतक संघ की तरफ से राम अवतार यादव का चुनाव मैदान में लड़ने का एक मात्र मकसद है देश में जिंदा होते हुए भी मुर्दा घोषित होकर पैतृक संपत्ति से बेदखल हो गए लोगों के दर्द को समझाना। फिलहाल मृतक संघ रामअवतार यादव के चुनाव के लिए चंदे की व्‍यवस्‍था कर रहा है।

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