सिर्फ नदी ही नहीं बल्कि इतिहासो का समंदर है गोमती

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स्पर्श दीक्षित की एक रिपोर्ट 

इस बात में कोई संशय नहीं की लखनऊ में विराजी आदिगंगा माँ गोमती अपनी जल की गहराई से कहीं ज्यादा गहरे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक तथ्यो अपने अंदर बड़ी सादगी से समेटे हुई है।आदिगंगा की ऊंचाई समुद्र से 182 मीटर उपर है और माधौटांडा की फ़ुलहर झील इसका उद्गम स्थल है। गोमती नदी का लखनऊ से सदैव ही बड़ा गहरा नाता रहा है। चलिये जानते है गोमती से जुड़े कुछ रोचक एवम पौराणिक  तथ्यो के बारे में:-

मोक्षदायनी है गोमती:-

एकादशी के दिन  में गोमती में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है की इस दान गोमती में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। अक्सर एकादशी के दिन गोमती में स्नान का विशेष आयोजन देखने को मिलता है।

कौन्डिल्य ऋषि की तपोस्थली है कुडिया घाट:-

मुनिश्रेष्ठ कौन्डिल्य ऋषि की तपोस्थली आदिगंगा माँ गोमती के पवित्र घाट पर जा कर बनी, और इसी कारण इस पवित्र घाट का नाम कौन्डिलेश्वर घाट पड़ा। कौन्डिल्येश्वर घाट आज कुडिया घाट के नाम से जाना जाता है। आज लखनऊ के अनेकों सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कुडिया घाट के तट पर होता है।

सभी इमारतों में बसी है गोमती के पानी के महक:-

लखनऊ के बहुत सी बड़ी इमारतें है जैसे इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, छत्तर मंजिल, मोतीमहल, सिकंदरबाग। इन सभी इमारतों में लखौरी ईंटों का काम देखने को मिलता है। ईंटों में जुड़ाव का कार्य गोमती नदी से प्राप्त जल से किया गया है जिसके कारण गोमती की महक हर इमारत में रची बसी है।

जब भयंकर बाढ़ का गवाह बना लखनऊ:-

आज से लगभग 100 वर्ष पूर्व 1915 एवम 1923 के दौरान लखनऊ में भयंकर बाढ़ आयी थी। इस बाढ़ में लोगों को भारी नुकसानों का सामना करना पड़ा था और ऐसा बताया जाता है की 1960 की बाढ़ में तो हज़रतगंज तक में नाव चली थी।

जब गोमती के जल से हुआ अभिषेक:-

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के सबसे खास पर्वों में से एक होता है। इस त्यौहार पे मनकामेश्वर स्तिथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिये कीलोमीटरो लम्बी लाइन लगती है। इस बार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलअभिषेक 151 लीटर गोमती के जल से किया गया था। यह कार्य दो तरफ इशारा करता है पहला तो इस से ये पता चलता है की लखनऊ में गोमती की मान्यता गंगा जी के बराबर है वही दूसरी और यह संदेश सभी नगरवासियों के लिये भी था की गोमती को स्वच्छ बनाये रखें क्योंकि इस जल का इस्तेमाल भगवान के अभिषेक में होता है।

प्राकृतिक सौंदर्य है आकर्षण का केंद्र:-

लखनऊ में गोमती तट पर कई दर्शनीय एव्म रमणीय स्थलों का निर्माण किया गया है जिनमें से एक  रिवर फ्रंट काफी खास है। इसके अलावा गोमती तट पर स्तिथ मंदिरों के पास भी शाम ए अवध दर्शनीय है। चारों और फैले उपवन, मोटी हरी घास व ठंडी रेत की जमीन के पे चलते हुए यहा लोगों को आप बोटिंग करते देख सकते है जो की गोमती की आलोकीक्ता को बढ़ावा देता है।

जब मछली बनी सल्तनत ए अवध का खास निशान 

जब नवाब सआदत अली खां बुरहान उल मुल्क 1722 में फैजबाद से लखनऊ आ रहे थे तो वो एक नाव में दरिया ए गोमती का आनंद ले रहे थे उसी समय एक मछली उनकी नाव में उछल कर आ गयी जिसको एक बहुत अच्छा शगुन माना गया और मछली को निशान ए अवध के रूप में अपनाया गया और आज तक इस निशान को वर्तमान उत्तरप्रदेश सरकार अपनाये हुई है।

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