सिर्फ नबाबों और बागों का ही शहर नहीं, हनुमान जी के ऐतिहसिक मंदिरों का गवाह भी है लखनऊ

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स्पर्श दीक्षित की एक रिपोर्ट:-

लखनऊ जरा एक बार फिर से पढियेगा, अगर लखनऊ शब्द  को ध्यान से पढ़ा जाये तो ये पता चलता है की भगवान राम के अनुज लखन यानी भगवान लक्ष्मण का नाम अपने आप में बड़ी सुरक्षित तरीके से संग्रहित किये हुआ है। इस बात का इतिहास गवाह है की भगवान लक्ष्मण का अपने अग्रज के प्रति एक गहरा आदरभाव था और वो त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे।

यह बात हो गयी भगवान राम और लक्ष्मण की लेकिन इस बात में कोई संशय नहीं की पूरा राम दरबार भगवान हनुमान के बिना बिल्कुल अधूरा है, और शायद इसीलिये लक्ष्मण जी की ये जागीर लखनऊ हनुमान जी के ऐतिहसिक मंदिरों की गवाह है। चलिये आज जानते है लखनऊ में स्तिथ ऐसे ही कुछ हनुमान मंदिरों के बारे में:-

हनुमान सेतु:-

ठंडी हवाओं में मिश्रित हल्के भुने बेसन की भीनी सुगंध क़िलोमीटरो दूर से जब आपके मस्तिष्क को सुकून देने का कार्य करने  लगे तो समझ जाइये आप हनुमान सेतु के करीब आ गये है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के गेट नम्बर 1 के ठीक सामने हनुमान सेतु नामक अति प्रतीष्ठित मंदिर स्तिथ है। यह मंदिर अपनी आलौकिक आभा के लिये जाना जाता है

सन 1972 में लखनऊ में भयंकर बाढ़ के कारण लखनऊ का पुल धराशाई हो गया लेकिन भगवान की मूर्ति पर लेश मात्र असर नहीं हुआ। पुल को पुन: निर्मित करने के अनेकों असफल प्रयास हुए। हर बार पुल के गिरने से परेशान इंजीनियर जब बाबा नीब करोरी के आश्रम पहुंचे तब सभी अधिकारियों ने बाबा के कहने पर यह मनौती मानी की पुल बनते ही मंदिर का निर्माण होगा और इस बार हनुमान जी की कृपा से पुल नहीं गिरा।

मंदिर के पहले गेट से लेकर गर्भगृह तक मार्बल के पत्थरो पर खूबसूरत नक्काशी का बारीक कार्य देखने को मिलता है।मंदिर के गर्भगृह में चांदी का मुकुट एवं जनेऊ पहने हनुमान जी अपने संग अपने हृदय  में समाये भगवान राम और माता सीता के दिव्य दर्शन भी करवाते है।

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सफेद रौशनी के पड़ने से यह मूर्ति अद्भुद छटा बिखेरती है जिसको देख कर ऐसा लगता है मानो साक्षात हनुमान जी खड़े हो । मूर्ति के बायीं ओर स्तिथ दीवार पर रामायण के दृश्य देखने को मिलते है  जिस से एक रास्ता मंदिर में स्थित भगवान शिव की ज्योतिर्लिंग एवम मार्बल निर्मित माँ दुर्गा की मूर्ति की तरफ जाता है जो श्रधालुओं की आस्था का केंद्र है।

मंदिर संस्थापक व साक्षात भगवान हनुमान जी के स्वरूप में पूजित बाबा नीब करोरी की मूर्ति व फोटो भी मंदिर में स्थित है। यहां आये सभी भक्त अपनी मुरादें पर्ची पर लिख कर डाल जाते है और मान्यता है की भगवान किसी को निराश नहीं करते है जिसके कारण ये पर्ची वाले हनुमान के नाम से भी जाना जाता है।

मंदिर के बाहर सभी मंदिरों की तरह आपको भिक्षुको की कतार देखने को मिल जायेगी जिनके लिये सुबह और शाम मंदिर द्वारा भोजन की व्यवस्था की जाती है। मंदिर के बाहर कोई भी व्यक्ति खाली पेट नहीं सोता, जो इसकी आलौकिक्ता में चार चाँद लगा देता है।  

अलीगंज हनुमान मंदिर:-

वक्त के आइने में लगभग 250 वर्ष पीछे झांककर देखा जाये तो ये पता चलता है की अलीगंज हनुमान मंदिर परत दर परत अपने आप में इतिहास समेटे है। 250 वर्ष इसलिये क्योंकि इस अति प्राचीन मंदिर का निर्माण 250 वर्ष पहले सन 1783 में हुआ था।

ऐसी मान्यता है की की जेठ के पहले मंगल को भगवान हनुमान ने यहा साक्षात दर्शन दिये जिसके चलते लखनऊ के बड़े मंगल विश्व प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है की बड़े मंगल के दौरान लखनऊ ने  किसी भी वर्ग का कोई व्यक्ति भूखा नहीं सो सकता क्योंकि खाद्य सामग्री के अनगिनत स्टाल समाजसेवकों द्वारा लगवाये जाते है।

ऐसा कहा जाता है की हनुमान जी की कृपा से ही नवाब सआदत अली खान का जन्म हुआ था जिसके चलते उनकी माँ आलीया ने उनका नाम मंगलू रखा जिसका विवरण प्रसिद्ध इतिहासकार श्री योगेश प्रवीण की पुस्तक में मिलता है। ऐसा कहते है की पहले मंदिर परिसर के चारों ओर हरी भरी बागे थी लेकिन आधुनिकरण के चलते वो खत्म हो गयी और अब इसके चारों और दुकानें देखने को मिलती है।

 

भक्तों की मान्यता है की यहां की गयी सभी मुरादें हमेशा पूरी होती है।एक मान्यता के अनुसार जिस समय आलिया बेगम बीमार पड़ी और उन्हे सभी हकीमों ने जवाब दे दिया उस समय उन्होंने अलीगंज हनुमान मंदिर में अपनी स्वस्थता की मनोकामना की थी जो की पूरी हो गयी और वो पुन: स्वस्थ हो गयी। अगर ध्यान दे तो पता चलता है की तत्कालीन गांव अलीगंज का नाम आलीया बेगम के ही नाम पर है 

छाँछी कुंआ हनुमान मंदिर:-

पुराने लखनऊ में स्तिथ 400 वर्ष पुराना हनुमान मंदिर भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक है। ऐसा माना जाता है की इस मंदिर की देख रेख करने वाले साधु का कमंडल इस मंदिर के कुएं में गिरा और उसको निकालते समय हनुमान जी की मूर्ति उस कमंडल में चली आयी और बाद में छाछ जैसे साफ जल की प्राप्ति हुई जिसके चलते इसका नाम छाछी कुंआ पड़ा। इतिहासकारों की माने तो यह पता चलता है की यहां गोस्वामी तुलसीदास भी पधारे चुके है। आज भी मंदिर की देख भाल छाँछी कुंआ जी हनुमान मंदिर सेवा सीमती द्वारा की जा रही है।

पंचमुखी हनुमान मंदिर:-

बीरबल सहानी मार्ग पर स्तिथ पंचमुखी हनुमान मंदिर लखनऊ के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक है। वेद मंत्रों के लगातार उच्चारण एवम महाआरती द्वारा उत्पन्न सकरात्मक ऊर्जा मंदिर की प्रसिद्धी का विषय है। यह मंदिर गोमती तट पर स्तिथ है जिसके चलते इसकी रमणीयता को बढ़ाने का कार्य करते  है।

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