लोस चुनाव में महागठबंधन की डगर यूपी में नहीं दिख रही आसान  

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 ⏺मैदान में प्रत्याशियों के उतारने के पश्चात् आपसी अन्तर कलह होने लगा उजागर 

⏺अंबेडकरनगर में बसपा राष्ट्रीय महासचिव के बयान पर अगड़ी जातियों की निंदा शुरू 

⏺जातीय समीकरण में हाबी सपा, बसपा की एकजुटता से कुछ भी संभव नहीं  

लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 के तिथि की घोषणा किये जाने के पश्चात् राजनैतिक दलों की तैयारी तेज हो गयीे है। जिताऊ प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में उ.प्र. के चुनाव में भाजपा को शिकस्त देने के लिए महाबठबंधन बेताब है जिसके द्वारा प्रत्याशियों की सूची आपसी बंटवारे के अनुसार जारी की जा रही है
किन्तु जिन सीटों पर अभी तक प्रत्याशी उतारे गये है वहां अन्तर कलह की स्थित सामने आने लगी है जिससे साफ है कि महागठबंधन की डगर आसान नहीं होगी।
ज्ञात हो कि पिछले दिनों आयोग द्वारा प्रदेेशों में चुनाव किस तिथि व चक्र में होगा, इसका ऐलान किया गया। यूपी में इसके बाद से सभी जिलों में आयोग सक्रिय हो गया और राजनैतिक दलों ने किस सीट सेे कौन प्रत्याशी विजयी होगा? इसके लिए चयन शुरू कर दिये।

सपा, बसपा व रालोद जिनके संयुक्त गठबंधन है और उनके द्वारा किसी भी दशा में भाजपा फिर सत्ता में न आये इस उद्देश्य से रोकने में आपसी बंटवारे में मिली सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतारे जा रहे हंै लेकिन अभी तक सभी सीटांे पर प्रत्याशी मैदान में नहीं हैे और भाजपा व कांग्रेस द्वारा कोई लिस्ट जारी ही नहीं है

जिससे इन दलों के लोकसभा क्षेत्र में जिला संगठन किसे नेतृत्व प्रत्याशीे बनायेगा, की कवायद चल रही है। गठबंधन द्वारा कार्यकर्ता सम्मेलन होने लगे हंै और सम्बंधित घोषित प्रत्याशियों को जिताने की दिशा में कदम उठाये जा रहे हैं।
गठबंधन मेें शामिल दलों द्वारा जहां विगत लोस चुनावों में अपने-अपने प्रत्याशी उतारे जाते रहे वहीं अब यूपी की सीटों में आधे-आधे पर चुनाव लड़ने को तय हुये के आधार पर जिन जिलों में उम्मीद लगाये नेता कि इस बार चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा, उन्हे वंचित होने से अन्तर कलह की स्थित सामने आने की संभावना है।
55 लोक सभा अंबेडकरनगर की सीट को लिया जाय तो यहां के हालात को लेकर चर्चा है कि इस सीट से बसपा के तीन से अधिक दिग्गज नेता सपना संजोये थे कि इस बार पार्टी सुप्रीमों चुनाव लड़ायेगी लेकिन जब घोषणा हो गयी और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हुआ तो उसमें समापन के दौरान बसपा राष्ट्रीय महासचिव द्वारा पिछड़ी जातियों को अगड़ी से सावधान के बयान का मामला सोशल मीडिया पर गरम हो गया।

सूत्रों के अनुसार पार्टी में अंबेडकरनगर जिले में बर्चस्व की लड़ाई काफी दिनों से चल रही है जिसके चलते चार गुटों में बटी है और इन्ही में कोई अपने पुत्र को मैदान में उतारना चाहता था तो कोई किसी सम्बंधी को, इसमें कद्दावर नेता अपनी मंशा में सफल नहीं हुये और इसी के कारण पुत्र मोह में उनकी जुबान फिसल गयी।

इस मामले को लेकर जहां गठबंधन में चर्चा है वहीं अगड़ी जातियों में भी इसे लेकर लोग निंदा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मंच से ऐसा बयान कहीं न कहीं दूषित मानसिकता का संकेेत है जो समाज को बाटने का काम है।
इससे सहज अन्दाजा लगाया जा सकता है कि अन्य सीटों पर जहां बटवारे में सपा को मिली होगी वहां भी जिला संगठन में मतभेद जरूर होगा कि सम्बंधित प्रभावशाली नेता अथवा उनके चहेतों को टिकट नहीं मिला होगा।
ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं में विरोध के स्वर मुखर होने तय है, तो कैसे चुनाव के पहले भिड़कर भाजपा का मुकाबला करेंगे। हालाकि यह सब अभी चुनाव के पूर्व की स्थितियां है, यूपी में जातीय समीकरण हाबी रहा और इन दलों में कभी, सपा तो कभी बसपा ने सरकार बनाया है, ऐसी दशा में वर्तमान में एक है तो कुछ भी संभव नहीं है अर्थात भाजपा को मात भी देने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

RepoRT :  Hindmorcha Team Lucknow

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