नौकरी के नाम पर बीजेपी नेता की वसूली का मामला पकड़ रहा जोर

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⏺ जब कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी की बदनामी को लेकर भड़क उठे सांसद
⏺ प्रदेेश नेतृत्व से संस्कृत विद्यालयों में नियम विरूद्ध भर्ती की जांच की चर्चा

लखनऊ। अंबेडकरनगर के माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में एक भाजपा नेता द्वारा नियम विरूद्ध नौकरी के नाम पर वसूली का मामला जोर पकड़ता जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं में जहां चर्चा है वहीं नेतृत्व भी हैरान है कि वह आखिर! कौन है जो छबि धूमिल कर रहा है।

ज्ञात हो कि भारतीय जनता पार्टी एक तरफ जहां दावा करती है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी, कर्मचारी बख्से नहीं जायेगे वहीं अंबेडकरनगर के एक भाजपा नेता द्वारा निजी व विभिन्न माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में दो दर्जन से अधिक लोगों को शिक्षक के पद पर नौकरी दिलायेे जाने के लिए करोड़ों रूपये की वसूली की गयी.

जिसमें नियम विरूद्ध अर्थात शासन से रोक के बावजूद भी कुछ को विभाग की मिलीभगत से न्यायालय में तथ्य गोपन कर आदेश पर वेतन आहरित भी हो रहा है जिसमें ऐसे भी है जिनके शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी होने की चर्चा है। इस मामले को हिन्दमोर्चा पत्रिका के आॅनलाइन बेवपोर्टल पर गत दिवस के शीर्षक ‘‘नौकरी के नाम पर करोड़ों रूपये वसूली में बीजेपी नेता कौन,अटकलें जारी’’ की खबर प्रकाशित होने से मामला जोर पकड़ लिया।

अंबेडकरनगर संवादसूत्र के अनुसार मंगलवार को कहीं माननीय सांसद जी बैठे थे जिनके समक्ष कार्यकर्ताओं ने खबर से अवगत कराया। सूत्रों के अनुसार सांसद जी भड़क उठे और बोले कि दर्ज कराओ मुकदमा, इस पर जब कार्यकर्ताओं ने कहा कि इसमें कहीं आप का ही विद्यालय तो नहीं है, तो उन्होने कहा कि किसी भी दशा में पार्टी की बदनामी ठीक नहीं है, जो भी हो उसे दण्ड मिलना चाहिए।

इसके अलावा पार्टी कार्यकर्ताओं व आमजन में भी तरह-तरह की चर्चाएं है, कोई यह कह रहा है कि ऐसे काले कृत्य में कटेहरी वाले नेता जी जो विधान सभा का चुनाव लड़ चुके हैं और अपने बूथ तक नहीं जीत पाये है वहीं हो सकते हैं। कुछ लोग यह भी कह रहे है कि जो भी हो देश के प्रधानमंत्री व सूबे के सीएम की शाख पर बट्टा लगा रहा है।

ऐसे में पार्टी 2 साल के अन्दर सभी माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में शिक्षिकों की भर्ती की जांच करा ले तो किस आधार पर हुई और उनमेें कौन-कौन विद्यालय पार्टी नेता के हैं, स्पष्ट हो जायेगा, साथ ही शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन पर फर्जीवाड़े का भी राज सामने आ जायेगा जिसमें सम्बंधित नेता के विद्यालय में शिक्षिका की डिग्री में जालसाजी भी पकड़ में आ जायेगी जिसके द्वारा इसी के सहारे विभाग वेतन भुगतान कर रहा है।

सूत्र यह भी बताते हंै कि इन संस्कृत विद्यालयों में सम्बंधित बीजेपी नेता द्वारा विभाग पर सत्ता की हनक में दबाव बनाया गया, इसके पहले भी चाहे वे बसपा की सरकार रही हो या सपा की, सभी में मजबूत रहे। कारण स्थिति के अनुरूप लाभ उठाने में माहिर हंै जिनके द्वारा प्रति शिक्षक 15 से अधिकतम 24 लाख रूपये वसूल किये गये।

इस तरह से एक आकड़े के अनुसार यदि डेढ़ दर्जन को ही लिया जाय और उसमें प्रति शिक्षक से 20 लाख रूपये वसूल किये गये हो तो कुल 3 करोड़ की रकम होती है। हालाकि लेन-देन का मामला अन्दर का है किन्तु इनमें जिन्हे अभी भुगतान मिलने की उम्मीद है और इंतजार में परेशान हो रहे है, जिसकी चर्चाएं लोेगों में बनी है।

यह सब बाते तो पार्टी कार्यकर्ताओं व आमजन की है लेकिन प्रदेेश नेतृत्व में भी अंबेडकरनगर में वह कौन नेता है इसकी निगरानी की दिशा में कदम उठाया जाना बताया जा रहा है।

(इससे सम्बंधित खबर अगलेे अंकों में)

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