पुलिस की गुंडागर्दी, बढ़ता जा रहा है पत्रकारों से अभद्रता, आज फिर एक पत्रकार हुआ शिकार*

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*राजेश  कुमार यादव*

*लखनऊ*: एक तरफ जहां पत्रकारों को भारत का चौथा स्तंभ माना जाता है, प्रदेश की योगी सरकार उत्तर प्रदेश पुलिस को अपनी छवि को सुधारने के लिए कई दिशा निर्देश दे चुके है परंतु कुछ पुलिस वाले को इसका कोई फर्क नही पड़ता है और उनके कारण पुरे पुलिस प्रशासन की छवि धूमिल होती है, यूपी पुलिस निरंतर अपने छवि सुधारने में लगी हुई है परंतु वही कुछ एक खाकी वर्दी धारी अपने फ़र्ज़- ईमान को भूल वर्दी के आड़ में धन उगाही का काम करते है।

जी हां ये मामला है मोदी के संसदीय छेत्र वाराणसी के सिगरा थाना अंतर्गत रोडवेज चौकी की आपको बता दे की रोडवेज चौकी वाराणसी के प्रमुख रेलवे स्टेशन वाराणसी कैंट के समीप है, जहा रोजाना हज़ारो यात्रियों का आना जाना लगा रहता है। वही रोडवेज चौकी के पुलिस जिनका का कार्य नागरिको की सुरक्षा करना भूल धन उगाही में ज्यादा मशगूल हो गए है।

स्टेशन के बहार लगे गरीब ठेले वालो से ठेले लगाने के एवज में वसूली करते है, एवं अवैध तरीके मैजिक व विक्रम गाड़िया एवम बस को लगवा कर उनसे भी रोजाना वसूली करते है अब इस धन उगाही के खेल में पुलिस प्रशासन के कितने वर्दी धारी सामिल यह एक चिंता का विषय है,

*आपको बता दे की यहाँ गरीब ठेले वालो का रोजाना शोषण किया जाता है पैसे के लिये,* अगर कोई गरीब पैसा देने में असमर्थता जताता है तो वर्दीधारी आक्रामक हो जाते है और उनकी पिटाई करना शुरू कर देते है, और उनके ठेले पे रखे सारे सामान को फेक देते है,

ऐसा ही एक सर्मनाक मामला आज देखने को मिला, *रोडवेज चौकी के वर्दीधारी विनय सिंह वसूली करने के लिए कैंट रेलवे स्टेशन के बहार लगे ठेले वाले से वसूली कर रहे थे,* वही एक गरीब ठेले वाले ने पैसा देने में असमर्थता दिखाई तो वर्दीधारी महोदय विनय सिंह आग बबूला हो गए, और गरीब ठेले वाले की पिटाई करने लगे,

*वही एक पत्रकार ने जब ये सब देखा तो उसने हस्तछेप किया कि भाई साहब क्यों मार रहे हो गरीब आदमी को,* अगर ठेला ही हटाना है तो आप उसको प्यार से बोल दो, इतने में *सिपाही विनय सिंह अभद्रता पे उतर आया और भद्दी-भद्दी गालिया देने लगा,* इसपर पत्रकार ने अपना परिचय दिया और बोला भाईसाहब गाली क्यों दे रहे हो,

इतने में सिपाही विनय सिंह फिर अभद्रता और गलत शब्दो का प्रयोग करते हुए *बोला तुम्हारी सारी पत्रकारी तुम्हारे अंदर घुसा दूंगा,* जाओ जो करना है कर लो मै किसी से नही डरता और धमकी भरे लफ्जो में गाली गलौज करने लगा,

इतने में पत्रकार ने अपने सैयम का परिचय देते हुए वहाँ से चला गया और पूरी घटना को सिगरा थाना प्रभारी व रोडवेज चौकी प्रभारी और कप्तान साहब को अवगत कराया, प्रशासन की तरफ से यह बोला गया कि सिपाही के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाएगी।

अब देखना ये है कि भारत के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों के साथ होने वाले इस तरह के अशोभनीय कृत्य पे सरकार और प्रशासन क्या एक्शन लेती है। *पत्रकार को एक सम्मानीत व्यक्ति माना जाता है क्या यही उनका सम्मान है?*

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