2000 करोड़ की लूट का सरगना आईएएस नवनीत सहगल

0
2075

B.B. Singh Chauhan

Lucknow : उत्तर प्रदेश में करीब दो दशकों से आर्थिक अपराध्ा की करीब 500 फाइलें देश की शीर्ष जांच एजेसियों सीबीआई से लेकर एसआईटी, आर्थिक अपराध्ा अनुसंध्ाान शाखा, भ्रष्टाचार निवारण संगठन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने वाली उत्तर प्रदेश की विश्वसनीय जांच एजेंसी सतर्कता अध्ािष्ठान के आलमारियों के कब्रगाह में अभियोजन की मंजूरी के इंतजार में दफन हैं।

जांच एजेंसियों की आलमारियों में दफन फाइलों में उत्तर प्रदेश के जनता के रहनुमा राजनेताओं से लेकर प्रदेश के आला अध्ािकारियों और बड़े-बड़े रसूखदार आर्थिक माफियाओं के काले कारनामों के चिठ्ठे मौजूद हैं।

परन्तु सारी की सारी जांच एजेंसियां महाभ्रष्टों के सिडिकेट के आगे सरकारें बेबश हैं जबकि सुप्रीमकोर्ट का साफ आदेश है कि अभियोजन की मंजूरी देने के लिये तीन महीने की समय सीमा निधर््ाारित की है तथा विशेष मामलों में एक माह की समय सीमा बढ़ायी जा सकती है।

यही नहीं याचिका कर्ता कमलेश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की सुनवाई करते हुये हाईकोर्ट ने भी सुप्रीमकोर्ट का हवाला देते हुये 01 जुलाई 2015 को राज्य सरकार को अभियोजन मंजूरी के लिये आदेशित भी किया था। परन्तु अभी भी राज्य सरकारें भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर नहीं हैं या कही न कहीं बड़ा सियासी खेल चल रहा है।

भाजपा के शीर्ष नेता नरेन्द्र मोदी या प्रदेश के मुखिया योगी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस की नीति पर शक तो नहीं किया जा सकता अपितु नियति क्या है यह समझ से परे है, लेकिन अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार में खनन घोटाले को लेकर जिस तरह से जांच एजेंसी ने डीएम बी. चन्द्रकला समेत अन्य खनन के आरोपियों पर शिकंजा कसा उससे ऐसा लग रहा है कि आर्थिक अपराध्ाियों की उलटी गिनती शुरू हो गई है.

और इसी क्रम में पूर्ववती सरकार के ही सबसे ताकतवर चर्चित नाम आईएएस नवनीत सहगल जो सत्ता के गलियारों में एक ऐसा नाम था जिसके बगैर पत्ता तक नहीं हिलता था। सरकार के मंत्री से लेकर आला अध्ािकारी तक को मिलने के समय की दरकार रहती थी। खैर विध्ाायकों को समय मिल जाये तो वह अपने को बड़ा भाग्यशाली समझता था।

नवनीत सहगल के रूतबे और रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज, इण्डस्ट्रियल डेवलपमेन्ट अथारिटी, पर्यटन विभाग, उ0प्र0 राज्य राजमार्ग प्राध्ािकरण ध्ार्मार्थकार्य महकमे से लेकर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग जैसे भारी भरकम महकमों का बोझ संभाल रहे सहगल तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाक का बाल हुआ करते थे। इसी नाराजगी के चलते तत्कालीन सरकार में रहे कद्दावर मंत्री शिवपाल यादव ने कई अवसरों पर सहगल को भ्रष्ट भी बताया था।

पूर्ववर्ती सपा सरकार के दौरान प्रमुख सचिव नवनीत सहगल सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पद पर रहते हुये सरकार की उपलब्ध्ाियों के प्रचार प्रसार के नाम पर जनता के करोड़ों रूपयों को पानी की तरह लुटाया। जिसे आज भी सरकार को हिलाने का दावा करने वाले फर्जी सर्कुलेशन वाले अखबारनवीश उस स्चर्णिक काल की याद करते नहीं थकते हैं।

गौरतलब है कि चार पेजी 20-25 अखबार छापनेवाले अनगिनत समाचार पत्रों को करोड़ो का विज्ञापन रेवडियों की तरह बांट दिया गया, इसमें सबसे हास्यासपद पहलू तो यह है कि वह तथकथित अखबारनवीस कट पेस्ट कर बनाये गये अखबारों से सरकार हिलाने का दावा करते थे। सहगल साहब की दरियादिली यहीं पर खत्म नहीं होती थी।

उन्होंने ऐसे-ऐसे पत्र पत्रिकाओं को विज्ञापन बांटे जिनका उ0प्र0 से कोई लेना देना नहीं है, इतना ही नहीं अखबारनवीसों के प्रेम के चलते राज्य स्तरीय प्रेस मान्यता कार्ड से लेकर जनपद स्तर तक खुले हाथों से ऐसे पत्रकारों को पत्रकार मान्यता कार्ड दिये गये जिनका पत्रकारिता व खबरनवीसी से दूर-दूर तक का कोई लेना देना नहीं था, यहां तक कि ऐसे लोग भी उपकृत हुये जो अन्य व्यवसायों से जुड़े होने के साथ ही उनके अपराध्ाों की रिपोर्टें भी शासन को भेजी जा चुकी है।

सूचना विभाग ने सरकार की उपलब्ध्ाियों के प्रचार प्रसार के नाम पर किताबों, पम्पलेट, डायरी फ्लेक्स आदि से लेकर एलईडी प्रचार वाहन और विज्ञापन एजेंसियों के अलावा इलेक्ट्रानिक मीडिया को भी उपकृत करने में दानवीरता दिखाने में कोई कोताही नहीं बरती।

यहां यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया तक में सहगल साहब दानवी कर्ण के रूप में आज भी याद किये जाते हैं। पूर्ववती सपा सरकार के कार्यकाल में अकेले सूचना विभाग के भ्रष्ट कारनामों की जांच की जाय तो करीब दो हजार करोड़ रूपयों के आर्थि अपराध्ा का काला चिठ्ठा सूचना विभाग की फाइलों में दफन है।

सहगल साहब के लूट व भ्रष्ट कारनामों की ये तो बानगी भर है अगर सारे विभागों की जांच की जाये तो नवनीत सहगल प्रदेश के महाघोटालेबाज नौकरशाहों की फेहरिस्त में टाप टेन में नं01 पर होंगें, और यह घोटाला 4000 करोड़ रूपयों से उपर का होगा इसमें भी कोई शक नहीं है।

महामहिम की सख्ती के चलतेे बच गया बाबा विश्वनाथ का दरबार

पूर्ववर्ती सपा सरकार के आर्थिक भ्रष्टाचार के सिंडीकेट के मास्टरमाइण्ड ध्ार्माथ कार्य विभाग का प्रमुख सचिव पद पर रहते हुये काली कमाई की लालसा ने विश्वप्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मन्दिर के महंत और पुजारी ने अगर विरोध्ा न किया तो 100 करोड़ हिन्दुओं की आस्था का सौदा हो जाता और बाबा काशी विश्वनाथ मन्दिर सिंडीकेट की कमाई का साध्ान ही नहीं बनता अपितु रूपहले पर्दे पर नारी की नग्नता परोसकर करोड़ों की कमाई कर रहे होते.

परन्तु महामहिम राज्यपाल राम नाईक ने आस्था के सवाल पर सूबे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सीध्ो ध्ार्मार्थ महकमें के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल को दोषी मानते हुये कड़ा पत्र न लिख होता तो पावनी नगरी काशी दूषित हो चुकी होती। आज जो नगरी सूर्योदय और सूर्यास्त पर घंटे घड़ियाल के शोर से गुंजायमान रहती है वह नगरी भ्रष्ठ कारोबारियों के हाथ का खिलौना बन जाती।

बाबा विश्वनाथ ट्रस्ट की देखरेख करने वालों का दावा है कि ट्रस्ट में करीब 60 करोड़ रूपयों से ज्यादा ध्ान जमा है जो काली कमाई करने वालों अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इसी ध्ान को हड़पने के लिये पांच साल के लिये गिरवी रखने की साजिश रचने वाले इस कथित भ्रष्टाचार की जांच करवाई जाये तो नवनीत सहगल के साथ कई अन्य सफेदपोशों के चेहरे का भी खुलासा होगा।

सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि फिल्मों में नग्नता परोसने वाले डिनो मोरिया वह शख्स है जिनकी आनलाइन कंपनी डिवोटी.ई.सोल्यूशन प्रा0लि0 से सहगल के हस्ताक्षर से दिसम्बर 14 में अनुबन्ध्ा प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की थी, परन्तु महामहिम के सख्त रूख से हिन्दुओं की आस्था अवैध्ा कमाई का साजिश करने वालों से बच गई।

सहगल को बचाने की सेटिग करने वाले दलाल रोहित की जांच कर रही आईबी

बसपा सरकार में सबसे चर्चित रहे एनआरएचएम घोटाले की जांच सीबीआई के हाथों में आने के बाद जिसमें तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा तक जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गये थे और उसमें कई डिप्टी सीएमओं की मौते जेल के अन्दर ही हुई थी।

उसमें आईएएस प्रदीप शुक्ला की गिरफ्तारी से नवनीत सहगल के हाथ पाव फूल गये थे और सीबीआई से अपने को बचाने के लिये लखनऊ से दिल्ली तक सत्ता के गलियारों में दखल रखने वाला दलाल रोहित सहाय का सहारा लिया था।

सूत्रो के अनुसार उसी दौरान टीवी के चर्चित पत्रकार की पार्टी दिल्ली के सरदाल पटेल मार्ग स्थित होटल मौर्या शेरेटन में आयोजि की गई थी जिसमें देश के बड़े बड़े उद्योगपतियों से नामी गिरामी राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद थी।

इस पार्टी में मोदी सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री बतौर मुख्य अतिथि पार्टी की शोभा बढ़ा रहे थे। इस दलाल ने मंत्री से सेटिंग करने के उद्देश्य से पार्टी में मंत्री से मुलाकात भी करवाई परन्तु किसी पत्रकार ने सहगल और मंत्री फोटो खींचकर पीएमओ आफिस भेजकर सारे किये कराये पर पानी फेर दिया और पीएमओ आफिस ने सख्त रूख अपनाते हुये सहगल के साथ दलाल रोहित की भी जांच आईबी टीम के हवाले कर दिया।

दरअसल एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई ने जब प्रदीप शुक्ला को गिरफ्तार किया तब प्रदीप शुक्ला की आईएएस पत्नी आराध्ाना शुक्ला ने सरेआम सीबीआई पर ये आरोप लगाये और साथ ही साथ शिकायत की कि सहगल के खिलाफ सबूत होने के बावजूद सीबीआई सहगल को क्यों बचा रही है।

बावजूद इसके अभी तक सहगल खुद को बचाने में कामयाब ही रहा है। इसी के साथ एक अन्य घोटाले में योगी सरकार ने आगरा एक्सप्रेसवे में करोड़ों रूपये के घोटालों सहित अन्य कार्यों की जांच सीबीआई को सौंपी है तो पुनः दलाल रोहित सहाय सहगल को बचाने का रास्ता तलाश रहा है।

बताते चलें कि दिल्ली का रहने वाला रोहित सहाय मूल रूप से पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का रहने वाला है तथा वाराणसी विश्वविद्यालय में छात्र जीवन से नेतागिरी करने के बाद बतौर मैनेजर रिलायंस कंपनी में नौकरी करता था। रिलायंस से निष्कासित होने के बाद दिल्ली की एक रियल इस्टेट कंपनी में नौकरी प्राप्त कर ली।

इसी नौकरी के दौरान अन्य शहरों के अलावा अक्सर लखनऊ तक का सफर किया करता था। बजरिये रियल इस्टेट मायावती सरकार में बड़ी बड़ी हस्तियों से अपने संबंध्ाों को मजबूत किया और नौकरी छोड़कर ईडी और सीबीआई के बड़े-बड़े अफसरों से संबंध्ा बनाकर करोड़ो की दलाली करने लगा, इसी दलाली की बदौलत दिल्ली के पाश इलाकों में करोड़ो के दो बड़े बंगलों का मालिक है।

अब देखना यह है कि पीएमओ के सख्त रूख के बाद दलाल रोहित सहाय और नवनीत सहगल कब तक जांच एजेंसियों से बच पाते हैं। वैसे तो पूर्व में उ0प्र0 के विध्ाानसभा चुनाव की रैलियों में प्रध्ाानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवनीत सहगल की तरफ ईशारा करते हुये साफ कहा था कि समाजवादी सरकार के एक भ्रष्ट अफसर ने यूपी को बरबाद कर दिया है।

इसी से जाहिर होता है कि पीएमओ आफिस सख्त रूख अपनाएगा। वहीं इसी कड़ी में योगी सरकार ने सख्त रूख अपनाते हुये सीबीआई को जांच भी सौंप दी है।

सूत्रों का कहना है कि पीएमओ आफिस नवनीत सहगल और उनके दलाल रोहित सहाय पर पैनी नजर बनाये हुये है देखना यह है कि आखिरकार बकरा कबतक अपनी खैर मना पाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.