आईएएस बी चन्द्रकला से कम कलाकार नहीं हैं बीएसए अम्बेडकरनगर

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⏺  मामला सहायता प्राप्त प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती का
⏺  सभी जिलों में अभ्यर्थियों से मोटी रकम के बगैर अधिकारियों ने नहीं की है नियुक्ति
⏺  अंबेडकरनगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी की करोड़ों की सौदेबाजी जनमानस में चर्चा

लखनऊ। आईएएस बी चन्द्रकला के खिलाफ खनन घोटाले का अभियोग पंजीकृत होने के बाद एजेन्सियांे की जांच चल रही है जिसमें उनकी तरह-तरह की कलाएं उजागर हो रही है जो समाचार पत्रों की सुर्खियों में हैं। इसी से जुड़े अब बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर जनमानस में आवाज उठने लगी हैं। यह मामला सहायता प्राप्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व इण्टर मीडियट कालेजों से सम्बंधित हैं। आइए हम पहले बेसिक शिक्षा पर नजर डालते है जिसमें अंबेडकरनगर की अजीबों गरीब स्थित सामने आयी है।

ज्ञात हो कि आईएएस बी चन्द्रकला पूर्ववर्ती सपा शासन काल में हमीरपुर बांदा व जालौन आदि जनपदों में तैनात रही जहां बालू के खनन का कारोबार अंधाधुंध चला था। इसमें लोग नियम के विपरीत आरोप लगाते शिकायत भी करते रहे किन्तु इस कारोबार में लिप्त माफिया व डीएम की सरकार में गहरी पैठ होने से इस पर अंकुश नहीं लगा लेकिन शिकायत कर्ताओं ने पीछा नहीं छोड़ा।

निजाम बदला और मामला न्यायालय में पहुॅच गया जहां से सीबीआई समेत अन्य स्वतंत्र एजेन्सियों से जांच कराये जाने का आदेश निर्गत हो गया। इसके बाद स्वतंत्र एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। आईएएस बी चन्द्रकला के विभिन्न शहरों मंे स्थित बंगलों पर छापेमारी की जहां अहम दस्तावेज हाथ लगे जिससे अकूत सम्पत्ति अर्जित करने के मामले उजागर हुये।

इस मामले में सीबीआई व ईडी द्वारा अलग-अलग मुकदमें पंजीकृत करवाया और लगभग माह भर से जांच व आईएएस बी चन्द्रकला से पूंछतांछ जारी हैं। यह तो रहा खनन का मामला। अब आइए हम चलते है बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग में, शिक्षक भर्ती घोटाले की तरफ। पहले बेसिक शिक्षा पर नजर डालते हैं।

सहायता प्राप्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त पद चल रहे थे जिससे शिक्षण कार्य न होने से इन विद्यालयों की हालत काफी दयनीय हो गयी थी। ऐसे विद्यालयों के इर्द-गिर्द गांव के अभिभावक अपने पाल्यों को इधर-उधर शिक्षण संस्थानों में दाखिला करवाने को मजबूर हो गये।

इधर साल भर से शासन ने प्रबंधकों को नियुक्ति के लिए अधिकार दे दिया जिसमें सम्बंधित जिलों के बीएसए को जांच के पश्चात् रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति देने के लिए कहा गया हैं। इस आदेश में किसी भी जिले को देखा जाय तो वहां जो भी सहायता प्राप्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हंै, उनमें कुछ प्रबंधकीय विवाद चल रहे हैं और जो साफ है उनमें छात्रों के मानक पूरा नहीं है फिर भी पूर्व से सृजित पदों पर भर्तियां कर ली गयी जिसमें सम्बंधित अभ्यर्थियों से मुंहमांगी रकम ली गयी और जिस विद्यालय में अभी भर्ती नहीं हो पायी है उनमंे सौदेबाजी के सिलसिले चल रहे हैं।

अंबेडकरनगर में इस तरह के विद्यालयों में लगभग 5 दर्जन सहायक अध्यापक व आधा दर्जन प्रधानाध्यापक के पद रिक्त रहे। शासन से आदेश मिलते ही बीएसए ने प्रबंधकों से औपचारिकता पूरी कर पत्रावली प्रेषित करने के लिए फरमान जारी किया, जैसे-जैसे पत्रावली विभाग में आयी, बीएसए द्वारा जांच करवाने की प्रक्रिया शुरू की गयी।

सूत्रों के अनुसार इन विद्यालयों की रिपोर्ट गाइड लाइन के विपरीत मिलने से यह कहा जाने लगा कि किसी भी दशा में भुगतान नहीं हो पायेंगे। इस रोड़े से कैसे निजात मिले, कुछ प्रबंधक सीधे बीएसए के सम्पर्क में आये, कोई उनके मातहत, कोई दलाल तो कोई सत्ता के सहारे, बताया जाता है कि फिर भी बीएसए ने किसी भी विद्यालय के शिक्षकों की भर्ती में प्रति अभ्यर्थी 10 से 12 लाख रूपये से कम नहीं लिया जो प्रबंधकों द्वारा 24 से 25 लाख की सौदेबाजी में उक्त रकम उन्हे मुहैया करायी गयी हैं।

इसे लेकर उक्त जनपद वासियों में चर्चा है कि आईएएस बी चन्द्रकला ने जहां बालू खनन में नियमों को तांख पर रखकर अपनी कला दिखाई और अरबों की सम्पत्ति बनाया वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार सिंह भी इस कलाकारी में पीछे नहीं हैं। 10 लाख रूपये प्रति अभ्यर्थियों से भर्ती में लिया जाना मान लिया जाय तो 60 अध्यापक व आधा दर्जन प्रधानाध्यापक के पदों पर 6 करोड़ 60 लाख रूपये उनकी जेब में चला गया जब कि इन विद्यालयों में सृजित पदो ंके सापेक्ष छात्रों की संख्या नहीं हैं।

⏺  बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नहीं उठाया फोन

उक्त के सम्बंध में स्थानीय संवाददाता द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी के सीयूजी 9453004139 पर कई बार सम्पर्क किया गया किन्तु उनके कहीं व्यस्तता अथवा जान बूझकर नजरन्दाज करने से काल रिसीव नहीं हो सका जिससे उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।

⏺  उच्च स्तरीय जांच पर होगा बड़ा खुलासा

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता सन्तराम वर्मा का कहना है कि बीएसए अतुल कुमार सिंह आईएएस बी चन्द्रकला से कम कलाकार नहीं हैं। उनके कार्यकाल में मान्यता से लेकर विद्यालयों में भर्ती की शासन द्वारा उच्च स्तरीय जांच करायी गयी तो खनन घोटाले की तरह यह भी एक बड़ा मामला बनेगा। इसके अलावा प्रवुद्ध वर्गीय लोग भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।

⏺  सीएम के संज्ञान में लायेंगे बेसिक शिक्षा का भ्रष्टाचार-स्वामीनाथ

इसे लेकर भाजपा के पूर्व जिला मंत्री स्वामीनाथ यादव का कहना है कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ है लेकिन बीएसए ने जब से यहां पदभार ग्रहण किया है, उन पर आये दिन आरोप लग रहे है, कहीं शिक्षकों की भर्ती तो कहीं मान्यता के नाम पर संस्था संचालकों से सौदेबाजी के। उन्होने कहा कि सरकार में बीएसए का यह कृत्य कतई बर्दास्त नहीं है जिसे लेकर मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव व निदेशक आदि के संज्ञान में लायेंगे।

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