अपनों ने दिया दर्द तो मौत को बना लिया दवा, जानिये क्यों झूल गई विवाहिता फंदे पर

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आगरा, संवाददाता। अपनों से मिले धोखे और भाई के ईएमआइ न चुकाने पर बहन ने मौत को गले लगा लिया। घटना ताजगंज के धांधूपुरा क्षेत्र की है। मृतका ने खुदकशी से पूर्व चार पेज का सुसाइड नोट भी लिखा।

मामले के अनुसार 37 वर्षीय मृतका शशि पत्नी वीरेंद्र के भाई योगेश ने अपने जीजा की आइडी पर 65000 रुपये का मोबाइल किश्तों पर लिया था। कुछ किश्त देने के बाद उसने ईएमआइ देना बंद कर दिया। इस पर लोन कंपनी के फोन लगातार वीरेंद्र के पास आने लगे। इसे लेकर वीरेंद्र और शशि के बीच आये दिन क्लेश होता था।

वहीं मायके और ससुराल दोनों में उसे परेशान भी किया जा रहा था। आये दिन के क्लेश से परेशान होकर शशि ने शनिवार रात रसोई में फांसी का फंदा लगाकर खुदकशी कर ली। सुबह जब परिजन नींद से जागे तो उनके होश उड़ गए। मृतका ने अपने पत्र में अपनी मौत का जिम्मेदार देवर- देवरानी जीतू, राजकुमारी, भाई योगेश, माता- पिता और रीना को बताया है।

अपनों ने दिया था शशि को दर्द

मृतका ने खुदकशी से पहले अपने बेटा और बेटी के नाम चार पेज का पत्र छोड़ा है। पत्र में लिखी बातों से यह साफ लग रहा है कि मृतका अपनों से दगा खाए हुए थी। पत्र में बच्चों को शशि ने हिदायत दी है कि सिर्फ अपने पिता की बात मानें। नाना नानी और मामा से दूर रहें। बार- बार खुद को दोषी ठहराते हुए लिखा है कि यदि पति की बात मानी होती तो आज धोखा नहीं मिलता।

बता दें कि मृतका की बहन की शादी उसके देवर के साथ हुई थी। दोनों बहनों में आये दिन झगड़ा होता था। वो इस बात से क्षुब्ध थी कि माता पिता भी उसे ही गलत समझते हैं। सड़क पर मारने की धमकी देते हैं। शशि ने पत्र में लिखा है कि 19 वर्षों से वो मायके और ससुराल के क्लेश में हर रोज मर रही है। बस अब सहन नहीं कर सकती। शायद उसके मरने के बाद सब सही हो जाए।

शशि ने लिखा मोदी जी लोन नहीं है आसान

शशि ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी संबोधित किया है। उसने लिखा है कि मोदी जी, क्या अच्छे दिन आये हैं। कर्ज लेने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आपने रोजगारपरक कोर्स के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोले हैं।

मैंने भी 800 रुपये देकर कोर्स किया। सर्टिफिकेट भी मिला लेकिन लोन मिलने में कोई आसानी नहीं हुई। मुश्किल से लोन मिला। ब्यूटी पार्लर की दुकान भी खोली लेकिन अपनों को वो दुकान भी नहीं रास आई। आये दिन के झगड़े के कारण दुकान बंद करनी पड़ी।

सिलाई वाली दोस्तों से मांगी माफी

शशि घर खर्च में अपने पति का साथ देने के लिए सिलाई भी करती थी। पत्र के आखिर में शशि ने महिला ग्राहकों से माफी मांगते हुए लिखा है कि दोस्तों मैं क्षमा चाहती हूं। अपने कपड़े छांट ले जाना, मैं नहीं सिल पा रही हूं। मेरा साथ देने के लिए शुक्रिया।

तो शायद बच जाती शशि

पत्र को लिखते वक्त शशि ने कई बार फंदे पर लटकने का प्रयास किया था लेकिन ऊंचाई अधिक होने के  कारण वो फंदे तक पहुंच नहीं पा रही थी। इस बात को उसने पत्र में भी लिखा है कि संदूक की ऊंचाई अधिक होने से वो उसपर चढ़ नहीं पा रही।

पति और बच्‍चों का रो रोकर बुरा हाल

घर को एक डोर में बांधकर रखने वाली शशि के अचानक आत्‍मघाती कदम उठाने से उसका परिवार पूरी तरह टूट गया है। पति देवेंद्र और दोनों बच्‍चे अमन और उन्‍नति का हाल बेहाल हो रहा है। वे समझ नहीं पा रहे कि आखिर शशि इतनी क्‍यों टूट गई। रात को यदि उन्‍होंने थोड़ा ध्‍यान रखा होता तो शायद शशि को वे बचा लेते।

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