मानवता को शर्मसार कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक गंभीर रोगों के इलाज से कन्नी काट रेफर करने में खर्च कर रहे हैं पूरा दिमाक .. पढ़े पूरा खेल

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अम्बेडकरनगर (HM News)। सावधान! यदि आपके परिजन कभी गंभीर रोग से पीड़ित हो और आपको इमरजेंसी की जरूरत हो तो सरकारी अस्पताल में इलाज करने से बचे अन्यथा कुछ मिनट के बाद ही आपको दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जाएगा और यह यह सिलसिला रोगी के मौत तक रुकेगा नही।बिदित हो कि सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक गंभीर रोगों के इलाज से कन्नी काट अपना पूरा दिमाक रेफर करने में खर्च कर रहे हैं।यह हाल तब है जब किडनी व हृदय रोग से संबंधित चिकित्सक यहाँ मौजूद है और सरकार हर सुविधा व संसाधन का दावा करती है।
सरकारी अस्पतालों में मरीजो का इलाज कैसे किया जाता है इस घटना से आसानी से समझा जा सकता है।जलालपुर तहसील के कुलहियापट्टी गांव निवासिनी संतोष कुमारी पत्नी उमाशंकर शर्मा की तबियत 16 अगस्त को रात में खराब हो जाती है।परिजन 108 एम्बुलेंस से उसे जलालपुर उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाते है।घंटो बाद अपने कमरे से बुलाने पर आए फार्मासिस्ट मनोज यादव स्टेचर पर ही ब्लडप्रेशर की जांच कर स्वयं मरीज के मुंह मे एक लिक्विड डाल इंजेक्शन लगा देते है।
मरीज स्टेचर पर कराह रहा है।लगभग 15 मिनट बाद इमरजेंसी में तैनात डॉ संदीप आये और बिना मरीज की जांच पड़ताल व पूछताछ किये मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।पीड़ित रात में भर्ती कर इलाज के लिए मनुहार करता रहा किन्तु संसाधन और सुविधा का रोना रोया गया।17 अगस्त की रात लगभग 2 बजे मरीज जिला अस्पताल पहुचता है परिजन स्टेचर से मरीज को वार्ड में लेकर काउंटर पर रेफर की पर्ची देकर इलाज करने की मिन्नतें करता है।
कर्मचारी घंटो लिखापढ़ी का नाटक कर मरीज को वार्ड नंबर दो के बेड नंबर 11 पर भर्ती कर लेता है।इमरजेंसी में तैनात डॉ सीएस यादव व स्टाफ नर्स दोनों अपने अपने कमरे में सो रहे थे।काउंटर पर बैठे लोग केवल पूछताछ करते रहे इलाज शुरू नही किया गया।रात में ब्लड समेत अन्य की जांच नही की गई।ब्लडप्रेशर नार्मल बताया गया।काफी मिन्नतें के बाद परिजनों के संतोष के लिए इंजेक्शन लगा दिया जाता है।
सुबह लगभग 4 बजे इमरजेंसी चिकित्सक डॉ सीएस यादव कमरे से बाहर निकलते हैं और पूछताछ के बाद मरीज को बाहर ले जाने के लिए रेफर कर देते हैं।परिजन अपने गरीबी का हवाला देता है किंतु चिकित्सक रेफर करने पर ही अड़े रहते हैं।17 अगस्त को दोपहर में परिजन मीडिया की मदद से डॉ योगेश से सम्पर्क करते हैं।डॉ योगेश मरीज की जांच कर इलाज का पर्चा बनाते हैं और इसके पहले सीटी स्कैन व खून की जांच की जाती है।
दोपहर दो बजे कर्मचारियों की ड्यूटी बदलने के बाद ड्यूटी पर आए डॉ संजय कुमार को जब परिजन अपने रिस्क पर लिखित देते हैं तब लगभग 13 घंटे बाद मरीज का इलाज शुरू किया जाता है।ड्यूटी बदलने के बाद यहाँ तैनात कर्मचारी बेहतर इलाज करने के बजाय केवल रेफर रेफर का रट लगा रहे है और इलाज में कोताही बरत रहे हैं।परिजन कह रहे हैं कि मरीज को फालिज का दौरा पड़ा है।
इसके पहले फालिज अटैक का इसी जिला अस्पताल में इलाज हुआ था और मरीज ठीक भी हुआ था।आखिर अब क्या कारण है जो यहाँ के चिकित्सक केवल रेफर करने का दबाव बना रहे हैं।खबर लिखे जाने तक मरीज के हाल में बेहतर इलाज के अभाव में खराब हो रही है और पीड़ित इतना सक्षम नही है कि वो मेडिकल कॉलेज में अपने पत्नी का इलाज करा सके।

मानवता को शर्मसार कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी

सरकारी अस्पताल में एम्बुलेंस कर्मी मरीज को लेकर जायेगे किन्तु मरीज को एम्बुलेंस से उतारकर वार्ड तक नही पहुचायेंगे।पीड़ित उमाशंकर ने बताया कि घर से ग्रामीणों के सहयोग से मरीज को एम्बुलेंस पर रखा गया।पहले जलालपुर, जलालपुर से जिला अस्पताल एम्बुलेंस लेकर आई किन्तु जिला अस्पताल ले लेकर उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक किसी ने मरीज को एम्बुलेंस से उतारने व बेड पर लिटाने में मदद नही की।

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