पूर्व क्रिकेटर और मंत्री चेतन चौहान पंचतत्व में विलीन : क्रिकेट से ‘जिंदगी’ तो कोरोना से मिली मौत

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  • चेतन के नाम-यूपी से टेस्ट टीम में प्रतिनिधित्व का रिकार्ड

अजय कुमार, लखनऊ
पूर्व भारतीय ओपनर और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का आज उनके गृह जिला हापुड़ के ब्रजघाट शमशान घाट पर अंतिम संस्कार हो गया। उनके अंतिम संस्कार के समय राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा। चैहान की मौत क्रिकेट जगत और योगी सरकार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रही। एक-एक करके प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों का कोरोना के चलते मौत के मुंह में चला जाना यह बताने के लिए काफी है कि जो लोग समझते हैं कि कोरोना की भयावक्ता कम हो गई है,वह न सिर्फ अपने साथ बल्कि देश और समाज के लिए भी संकट पैदा कर रहे हैं। आज भी कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेसिंग- फेस-माक्स और सैनिटाइजेशन ही सबसे बड़ा ‘हथियार’ है। जरा सी भी लापरवारी भारी चूक साबित हो सकती है।
कोरोना आम ही नहीं कई नामचीन हस्तियों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है,जो सौभाग्यशाली थे,वह बच गए। वर्ना कई को अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी। चेतन चौहान भी ऐसे ही दुर्भाग्यशाली व्यक्ति थे जिन्हंे कोरोना के चलते जान गंवाना पड़ गई। चेतन की मौत के साथ ही उत्तर प्रदेश ने अपना एक नेता ही नहीं बेहतरीन क्रिकेटर भी खो दिया,जो लाखों क्रिकेट पे्रमियों के प्रेरणास्रोत हुआ करते थे।
चेतन चौहान का टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण 25 दिसम्बर 1969 को सलामी ओपनर बल्लेबाज के तौर पर भारत बनाम न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज के दौरान हुआ था और उन्होंने अपना अंतिम टेस्ट क्रिकेट मैच भी 13 मार्च 1981 को न्यूजीलैंड क खिलाफ ही खेला था। चेतन चैहान ने कुल 40 टेस्ट मैच और सात वन डे मैच खेले थे। चेतन चैहान और लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर की ओपनिंग जोड़ी ने काफी नाम कमाया था।
चौहान ने क्रिकेट का कखहरा उत्तर प्रदेश में ही सीखा था,यह और बात है कि पिता जी के तबादले के चलते उन्हें यूपी से खेलने का सौभाग्य नहीं मिला और वह दिल्ली तथा महाराष्ट्र की घरेलू टीम से खेलने लगे। चेतन चैहान ने भले ही घरेलू क्रिकेट दिल्ली-महाराष्ट्र की तरफ से खेला था,लेकिन चेतन ने अपनी उत्तर प्रदेश वाली पहचान को सदा बनाए रखा। भारतीय क्रिकेट क्रिकेट का इतिहास करीब सौ साल पुराना है और इन 100 वर्षो में उत्तर प्रदेश से कोई भी दूसरा ऐसा खिलाड़ी नहीं आगे आ पाया जो चेतन चैहान का टेस्ट क्रिकेट मैच का रिकार्ड तोड़ पाता।
जबकि चेतन चौहान को टेस्ट क्रिकेट से विदा लिए हुए करीब 40 वर्ष हो चुके हैं।चेतन की कोरोना से मौत पर सबसे सटीक टिप्पणी लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर से बेहतर किसी की हो ही नहीं सकती थी,जिसके साथ चौहान ने ओपनिंग करते हुए 59 इनिंग्स में 53.75 के औसत से 3010 रन बनाए थे। दोनों के बीच 10 शतकीय साझेदारियों हुईं थीं,जिसमें 213 रन की हाईएस्ट साझेदारी थी।
पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावसकर ने सबसे लंबे समय तक अपने सलामी जोड़ीदार रहे चेतन चौहान को अपने शब्दों में दी श्रद्धांजलि देते हुए कुछ पुरानी यादों और बातों को साझा करते हुए कहा, चेतन जब भी मिलता था तो वह काफी गर्मजोशी के साथ मिलते हुए कहता,‘आजा, आजा, गले मिल, आखिर हम अपने जीवन के अनिवार्य ओवर खेल रहे हैं।’ गावस्कर ने बताया पिछले दो या तीन साल में हम जब भी मिलते थे तो मेरा सलामी जोड़ीदार चेतन चैहान इसी तरह अभिवादन करता था।
ये मुलाकातें उसके पसंदीदा फिरोजशाह कोटला मैदान पर होती थी जहां वह पिच तैयार कराने का प्रभारी था। जब हम गले मिलते थे तो मैं उसे कहता था ‘नहीं, नहीं हमें एक और शतकीय साझेदारी करनी है।’ और वह हंसता था और फिर कहता था ‘अरे बाबा, तुम शतक बनाते थे, मैं नहीं।’
गावस्कर ने कहा,‘मैंने कभी अपने बुरे सपने में भी नहीं सोचा था कि जीवन में अनिवार्य ओवरों को लेकर उसके शब्द इतनी जल्दी सच हो जाएंगे। यह विश्वास ही नहीं हो रहा कि जब अगली बार मैं दिल्ली जाऊंगा तो उसकी हंसी और मजाकिया छींटाकशी नहीं होगी। शतकों की बात करें तो मेरा मानना है कि दो मौकों पर उसके शतक से चूकने का जिम्मेदार मैं भी रहा।
दोनों बार ऑस्ट्रेलिया में 1980-81 की सीरीज के दौरान। एडिलेड में दूसरे टेस्ट में जब वह 97 रन बनाकर खेल रहा था तो टीम के मेरे साथी मुझे टीवी के सामने की कुर्सी से उठाकर खिलाड़ियों की बालकोनी में ले गए और कहने लगे कि मुझे अपने जोड़ीदार की हौसला अफजाई के लिए मौजूद रहना चाहिए।
‘मैं बालकनी से खिलाड़ियों को खेलते हुए देखने को लेकर थोड़ा अंधविश्वासी था क्योंकि तब बल्लेबाज आउट हो जाता था और इसलिए मैं हमेशा मैच ड्रेसिंग रूम में टीवी पर देखता था। शतक पूरा होने के बाद मैं खिलाड़ियों की बालकोनी में जाता था और हौसलाअफजाई करने वालों में शामिल हो जाता था। हालांकि जब डेनिस लिली गेंदबाजी करने आया तो मैं एडीलेड में बालकोनी में था और आप विश्वास नहीं करोगे कि चेतन पहली ही गेंद पर विकेट के पीछे कैच दे बैठा। मैं निराश था और मुझे बालकोनी में लाने के लिए खिलाड़ियों को जाने के लिए कहा लेकिन इससे वह नहीं बदलने वाला था जो हुआ था।
दूसरी बार जब मुझे लगता है कि मैं चेतन के शतक से चूकने के लिए जिम्मेदार था, वह लम्हा तब आया जब खराब फैसले पर आउट दिए जाने के बाद मैदान से बाहर जाते हुए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के अभद्र व्यवहार के बीच मैंने धैर्य खो दिया। चेतन को बाहर ले जाने के प्रयास से निश्चित तौर पर उसकी एकाग्रता भंग हुई होगी और कुछ देर बाद वह एक बार फिर शतक से चूक गया।
एक चीज मेरी पीढ़ी और तुरंद बाद के कुछ खिलाड़ियों को नहीं पता होगी और वह थी उनके लिए कर छूट हासिल करने में उसका योगदान। हम दोनों सबसे पहले दिवंगत आर वेंकरमण से मिले जो उस समय देश के वित्त मंत्री थे और उनसे आग्रह किया कि भारत के लिए खेलने पर मिलने वाली फीस में कर छूट पर विचार किया जाए। मैं बता दूं कि यह सिर्फ क्रिकेट के लिए नहीं था बल्कि भारत के लिए खेलने वाले सभी खिलाड़ियों के लिए था। हमने बताया कि जब हम जूनियर क्रिकेटर थे तो हमें सामान, यात्रा, कोच आदि पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता था, जबकि हमारे पास आय का कोई साधन नहीं था।
चेतन चौहान को कुछ समय पूर्व उस समय बल्ला पकड़े देखा गया था जब वह लखनऊ के इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में जितेंद्र पाण्डये स्मारक राज्य स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करने पहंुचे थे। पिच पर पहुंचते ही उनको उम्र का ख्याल ही नही रहा। बल्ला थामने के बाद तो बांहें फड़कने लगीं और दूसरी छोर से गेंद फेंक रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ज्ञानेंद्र पाण्डये से बोले,‘ज्ञानू बाॅल को जरा फ्लाइट करा, अपना फुटवर्क तो चेक कर लूं।’ उस समय 70 वर्षीय चेतन चैहान ने फ्लाइट की गई बाॅल को स्अेप आउट कर ड्राइव भी लगाया था।
बहरहाल, क्रिकेट से अलग चेतन की पहचान की बात कि जाए तो उप्र के सैनिक कल्याण एवं होमगार्ड मंत्री चेतन चैहान का पूरा नाम चेतेंद्र प्रताप सिंह चैहान था। 21 जूलाई 1947 को बरेली में पैदा हुए चेतन मूल रूप से बुलंदशहर जिले के अगौता गांव वाले थे। पिता एनएस चौहान सेना में मेजर से सेवानिवत्त हुए थे। बाद में पिता परिवार समेत पुणे चले गये। क्रिकेट से संन्यास के बाद चेतन ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। वर्ष 1991 में अमरोहा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीते।
1996 लोस चुनाव हार गए, लेकिन 1998 में फिर जीत गए। 2017 में वह अमरोहा की नौगावां सादात सीट से विधायक चुने गए और योगी कैबिनेट में मंत्री बने। क्रिकेट को चेतन चौहान अपनी जिंदगी मानते थे, तो कोरोना उनकी मौत का कारण बन गया। चेतन की मौत पर खेल जगत के साथ-साथ राजनीति,फिल्मी दुनिया से भी दुख जताया जा रहा है। चेतन की 16 अगस्त को गुरूग्राम के मेदांता अस्पताल में कोरोना का इलाज कराते समय किडनी खराब होने के बाद दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।
आज सुबह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान का शव दिल्ली के मयूर विहार फेस-1 स्थित नागार्जुन अपार्टमेंट में उनके आवास पर पहुंचा। जहां उनको कई गणमान्य और उनके प्रति स्नेह रखने वालों द्वारा श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर घर से ब्रजघाट के लिए रवाना हो गया। उत्तर प्रदेश सरकार के दिवंगत कैबिनेट मंत्री व पूर्व क्रिकेटर चेतन चैहान की अंतिम यात्रा दर्जन भर से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ रवाना हुई। चेतन चैहान की अंतिम यात्रा रवाना होने से पहले उनके पार्थिव शरीर को पत्नी संगीता चैहान व पुत्र विनायक चैहान ने नमन किया।
अजय कुमार
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार, मो-9335566111

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