बाढ़ ने बिहार और असम में ली सौ से अधिक लोगों की जान, सरकार के पास नही है कोई समाधान

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नरेन्द्र झा, पटना।

वायरस महामारी के साथ-साथ बाढ़ से भी लोगों के सामने विकट समस्या खड़ी हो गई है। असम में अबतक 107 लोगों की मौत हो चुकी है तो वहीं बिहार में 11 लोगों की बाढ़ के चलते जान चली गई है। उफनती नदियों और जलमग्न होते इलाकों के चलते लगभग 90 लाख आबादी प्रभावित है, लोग तटबंधों पर जीवन गुजारने के लिए मजबूर हैं।
बुधवार को असम और बिहार में बाढ़ के चलते 6 लोगों की मौत हो गई। राज्य की आपदा प्रबंधन विभाग ने इस बात की जानकारी दी। असम में मरने वालों की संख्या कुल 107 हो गई है। असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या मंगलवार को 19.81 लाख से घटकर बुधवार को 16.54 लाख हो गई।
राज्य के 21 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। 37,000 से अधिक लोगें ने राहत शिविरों में शरण ली है।असम का गोलपारा सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित जिला है, जहां 4.19 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मोरी गांव में 2.63 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं तो दक्षिण सलमारा में 2.50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
वहीं, बिहार के 12 जिलों में 38.47 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बिहार के 12 जिलों सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चंपारण, खगडिया, सारण एवं समस्तीपुर जिले के 102 प्रखंडों के 901 पंचायतों की 38,47,531 आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है, जहां से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाये गये 3,09,511 लोगों में से 25,116 व्यक्ति 19 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
बिहार के इन जिलों में बाढ़ का कारण गंगा के अलावा लखनदेई, रातो, मरहा, मनुसमारा, बागमती, कमला बलान, अधवारा, गंडक, बूढ़ी गंडक जैसी नदियों को मूल रूप माना गया है।हर साल बाढ़ से बिहार की बरबादी होती है लेकिन सरकार की ओर से अभी तक इसके स्थायी निदान के उपाय नही ढूंढे जा सके। केन्द्र एवं राज्य सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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