इन फिल्मों के अजीबो-गरीब नाम सुनकर कानों पर रख लेंगे हाथ, पोस्टर देखकर ही छूट जाएगी हंसी

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भारतीय सिनेमा ने हमें फिल्मों के ऐसे- ऐसे नाम दिए हैं जो सोचने पर मजबूर करते हैं कि इसके निर्माताओं और निर्देशकों के दिमाग में उस वक्त क्या आया होगा, जब उन्होंने इन फिल्मों को ऐसा नाम दिया होगा। रचनात्मकता के नाम पर निर्माता- निर्देशक कुछ ऐसा कर बैठे कि आज इन फिल्मों के नाम सुनकर आपको हंसी आ जाएगी। फिल्ममेकर्स की ये क्रिएटिविटी लोगों को हसंने पर मजबूर कर देती है। कभी- कभी दर्शकों ने उन्हें इस कारण ट्रोल भी किया है।
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वाकया साल 2002 का है। जी नेटवर्क के लिए स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने का मुझे जिम्मा मिला। इसी डॉक्यूमेंट्री की मेकिंग के दौरान संगीतकार आनंदजी ने एक दिलचस्प किस्सा फिल्म सरस्वतीचंद्र का सुनाया। फिल्म का वह गाना तो आपने सुना ही होगा, ‘फूल तुम्हें भेजा है ख़त में फूल नहीं मेरा दिल है।‘ इंदीवर के लिखे इस गीत को लता मंगेशकर और मुकेश ने गाया है।
कल्याणजी आनंदजी को जब ये गीत धुन बनाने के लिए मिली तो दिक्कत ये सामने आई कि गाने का पहला अक्षर ‘फ’ और जिनको ध्वनि संयोजन के बारे में जरा भी जानकारी है वे जानते हैं कि फ शब्द माइक पर बोलते समय ब्लास्ट (आवाज का फट जाना) करता है। आनंदजी ने इसका तोड़ ये निकाला कि उन्होंने लता मंगेशकर से फूल शब्द को थोड़ा लहरा के गाने को कहा,  ‘फूउउल तुम्हें भेजा है ख़त में….., बस काम बन गया।
ये किस्सा यहां सुनाने की दो वजहें हैं। पहली तो ये कि सुबह से ही आज मेरे कानों में लता मंगेशकर का ही गाया और सुप्रसिद्ध कवि बाल बैरागी का लिखा गीत ‘तू चंदा मैं चांदनी गूंज रहा है..।’ और दूसरी बात ये कि जिस फिल्म सरस्वतीचंद्र को लिखने के लिए मशहूर लेखक एस अली रजा ने सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता था, उन्हीं रजा ने लिखी थी एक दमदार फिल्म रेशमा और शेरा।
रेशमा और शेरा के अलावा रजा हिंदी सिनेमा के चंद नायाब नगीनों आन, अंदाज, मदर इंडिया, राजा जानी और दस नंबरी की लेखन टीम का भी हिस्सा रहे। सरस्वतीचंद्र देखने के बाद ही अभिनेता सुनील दत्त ने उन्हें एक प्रेम कहानी लिखने का न्योता दिया था। एस अली रजा ने एक बहुत ही चर्चित फिल्म प्राण जाए पर वचन न जाए निर्देशित भी की। सुनील दत्त ने रजा से वादा किया था कि जब भी वह कोई फिल्म निर्देशित करना चाहेंगे, वह उस फिल्म में काम करने के लिए हमेशा तैयार मिलेंगे। प्राण जाए पर वचन न जाए में काम करके सुनील दत्त ने अपना ये वादा पूरा भी किया।

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