बिकरू कांड: बनते-बनते बिगड़ गया खेल, जय की पैरवी में लगा था यह अफसर

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Lucknow (HM News)l जयकांत बाजपेई के मामले में पुलिस की कहानी में बड़े झोल हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर उसको जेल भेजने में इतना समय क्यों लगा। कहा जा रहा कि एक बड़ा अफसर जय की मदद कर रहा था। पुलिस उस अफसर के दबाव में थी। साठगांठ और जोड़तोड़ जारी था। बात बनते-बनते रह गई और जय को जेल भेजना पड़ा।
वारदात के बाद जय की बगैर नंबर प्लेट की तीन गाड़ियों का लावारिस हालत में मिलना, पूछताछ में जय और विकास के कनेक्शन की पुष्टि होना, रुपयों का लेनदेन से लेकर एक दिन पहले गांव में उसकी मौजूदगी जैसे अहम साक्ष्य पुलिस के पास पहले दिन से थे।
इसके बाद भी पुलिस उसे जेल नहीं भेज रही थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक ये सब एक अफसर के इशारे पर चल रहा था। अफसर जय का बेहद करीबी है। अफसर ने लगभग पूरी सेटिंग कर ली थी। पूछताछ का हवाला देकर समय निकाला जा रहा था, जिससे मामला थोड़ा ठंडा हो जाए और फिर जय को छोड़ दिया जाए।
शनिवार को उसे छोड़ भी दिया गया, मगर इसकी जानकारी होते ही कई विपक्षी नेता, रिटायर्ड अफसरों ने सोशल मीडिया पर सरकार और पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद उसे जेल भेजना पड़ा।

गाड़ियों का इस्तेमाल कब-कहां, कुछ नहीं पता

पुलिस ने शुरुआती जांच में कहा था कि जय की गाड़ियों का इस्तेमाल विकास या उसके साथी और परिजनों को फरार कराने में इस्तेमाल हुआ है। इसी बिंदु पर जांच चल रही थी। हालांकि अभी भी यह साफ नहीं हो सका है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल हो सका था या नहीं। अगर हुआ था तो कौन-कौन, कैसे और कहां गए। गाड़ियां विजय नगर कैसे पहुंची। जैसे सवाल अभी भी नहीं सुलझे हैं।

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