सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित उल्टहवा माझा वासियों के लिए शायर की ये पक्तियां सटीक बैठ रही है ‘‘मुफलिसी पासे शराफत नहीं रहने देगी, ये नदी हम को सलामत नहीं रहने देगी। रेत पर खेलते बच्चों को क्या मालूम, कोई सैलाब घरौंदा नहीं रहने देगी’’

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  • सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित उल्टहवा माझा वासियों के लिए शायर की ये पक्तियां सटीक बैठ रही है ‘‘मुफलिसी पासे शराफत नहीं रहने देगी, ये नदी हम को सलामत नहीं रहने देगी। रेत पर खेलते बच्चों को क्या मालूम, कोई सैलाब घरौंदा नहीं रहने देगी’’
टांडा ,अंबेडकरनगर। ‘‘मुफलिसी पासे शराफत नहीं रहने देगी, ये नदी हम को सलामत नहीं रहने देगी। रेत पर खेलते बच्चों को क्या मालूम, कोई सैलाब घरौंदा नहीं रहने देगी।
मशहूर शायर मुनव्वर राणा की ये पंक्तियां टांडा तहसील क्षेत्र के उन सैकड़ों लोगों का दर्द बयां करने को काफी है जो सरयू नदी के प्रलयंकारी बाढ़ से हर साल अपने घरवालों से मरहूम हो जाते हैं। जून के अंतिम सप्ताह से बाढ़ का कहर टांडा तहसील क्षेत्र के माझा क्षेत्रों में आमतौर पर शुरू हो जाता है। यह समय करीब आने साथ ही एक बार फिर दर्जनों गांव के लोगों की धड़कन बढ़ने लगी है।
कटान की चपेट में मुख्य रूप से टांडा तहसील के उल्टहवा माझा माझा चिंतौरा, नसरुल्लापुर, सलोना घाट समेत लगभग 20 गांव आते हैं बरसात में स्थिति काफी भयावह हो जाती है। माझा समेत नदी किनारे स्थित गांव के लोगों को घर छोड़कर राहत चैकियों पर शरण लेने को विवश होना पड़ता है।
टांडा नगर में ही बाढ विकराल रूप ले लेता है मेहनिया नाले समेत आसपास के गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं प्रशासन द्वारा हर वर्ष डेढ़ दर्जन से ज्यादा बाढ़ राहत चैकियां बनाई जाती हैं ग्राम वासियों को बाढ़ से निकलने के लिए दर्जनभर नाव लगाई जाती हैं या अलग बात है कि आने वाली बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए कोई स्थायी समाधान प्रशासन ने अब तक नही किया।
बाढ़ खंड विभाग द्वारा प्रतिवर्ष बाढ का कटान रोकने के लिए ठोकर की व्यवस्था की जाती है जून के तीसरे व चैथे सप्ताह से नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो जाता है इस बार मानसून के जल्दी आने की सूचना से ग्राम वासियों की धड़कन तेज हो गई है।
Report : Hindmorcha Team Ambedkarnagar 

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