*अनेकों गुणों का खजाना हैं मिट्टी के बर्तन*

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(स्पर्श दीक्षित) (पीजीडीएमएफपी,लखनऊ विश्विद्यालय)

किसी शायर ने क्या खूब लिखा है की …
“सारे इत्रों की बूंदें मंद पड़ गयी,
मिट्टी में बारिश के बूंदे जो चंद पड़ गयी”।
हम सभी लोग अब जून के आखिरी सप्ताह में प्रवेश करने जा रहे है और बेशक बहुत ही जल्द भारत वर्ष के कई राज्यों में मानसून दस्तक देने वाला है।ठंडी हवाएं,लहलहाते हरे पेड,गरजती हुई बिजली, पदयात्रीयों के हाथों में छातें, इस रमणीय वातावरण को निहारता एवं देवेंद्र को धन्यवाद देता किसान और चारों ओर फैली ही हुई एक अत्यंत मनमोहक सोंधी सुगंध जो अपने आप में ही शायद मानसिक शीतलता की परिचायक होती हैं।
इस बात में संशय नहीं की कई बार यह प्रतीत होता है की गर्मी से तपी हुई धरती की मिट्टी वर्षा की पहली बूंद का इंतेजार कर रही हो लेकिन शायद कम ही लोग जानते होंगे की इसी मिट्टी में बहुत से खास गुण होते है और इन सभी गुणों को अपने आप में समेटते है मिट्टी द्वारा निर्मित बर्तन। मिट्टी के बर्तनों का उपयोग अति प्राचीन काल से ले कर आज के आधुनिक युग तक प्रचलित है।
मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी की अर्धरात्रि में हुआ था भगवान कृष्णा के जन्म के उत्सव में गोकुल में दही हांडी का त्यौहार मनाया गया जो की मिट्टी से निर्मित थी,यह भी मान्यता है की जब बाल रूप में भगवान श्री कृष्णा ने मिट्टी ग्रहण कर ली थी तब माँ यशोदा ने उन्हें मुख खोलने का आदेश दिया और उसी खुले मुख में यशोदा जी को समस्त ब्रह्मांड के दर्शन हो गए थे।
मथुरा में स्तिथ आज वह मंदिर ब्रह्मांड घाट के नाम से प्रख्यात हैं वहीं दूसरी ओर अष्टांग हृदयम के रचयता महाऋषि वागभट्ट जी ने भी मिट्टी के बर्तनों को भोजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना है। आईये जानते है इन मिट्टी के बर्तनों से संबंधित कुछ खास बातें:-

1) ऐसे बनते है मिट्टी के बर्तन :-

मिट्टी के बर्तनों को बनाने के लिए तालाब की मिट्टी का प्रयोग कुंभारो द्बारा किया जाता है।कुंभार वसुकी एवं चाक का प्रयोग करके तालाब की मिट्टी को नवीनतम आकार देते है।इसके बाद कच्ची मिट्टी को पकाने के लिए कंडो का प्रयोग किया जाता है। कच्चे बर्तनों के पकने के बाद इन बर्तनों को रंगने का कार्य शुरू होता है और यह अंतिम कार्य होता है जिसके बाद बर्तनों को मार्केट भेजा जाता है जहां उनकी बिक्री शुरू होती है।

2) मिट्टी के बर्तनों के इस्तेमाल के यह है फायदे:-

ऐसा माना जाता है की अल्यूमीनियम के बर्तनों में भारी मात्रा में पोषक तत्व नष्ट हो जाते है,लेकिन मिट्टी के बर्तनों में ऐसा नहीं होता बल्कि इन बर्तनों में बने खाने में माइक्रोन्यूट्रिएनट के संग कैल्शियम,आयरन व सल्फर मौजूद रहते है ।मिट्टी के बर्तनों में बना खाना बीमारियों के बचाव का कारक है क्योंकी इससे पीएच स्तर भी बैलेंस रहता है।मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाते समय घी एवं तेल का कम इस्तेमाल होता है जो की शरीर के लिए काफी लाभदायक होता है व मिट्टी के बर्तनों में खाना जल्दी खराब भी नहीं होता।

3) खास होती है मिट्टी के कुल्हड़ में बनी चाय :-

भारत वर्ष में चाय के शौकीनो की कमी नहीं है।ट्रेन से किसी शहर की यात्रा के दौरान या अक्सर अपने मित्रों के संग हम सभी ने कुल्हड़ की चाय पी है।कुल्हड़ की चाय अपनी भीनी महक के संग एक अलग स्वाद के लिए भी जानी जाती है।मिट्टी से बने होने के कारण कुल्हड़ की चाय में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो हड्डी को मजबूती प्रदान करने के संग शरीर को बिमारियों से बचाता है।वहीं दूसरी ओर थर्माकोल में मौजूद तत्व चाय में घुलकर पेट में जाते व व्यक्ति को गंभीर बीमारियों से ग्रसित करते है। कुल्हड़ इकोफ्रेन्डली भी हैं क्योंकी एक बार फेकें जाने पर यह आसानी से मिट्टी में मिल जाते है वहीं थर्माकोल में ऐसा नहीं होता।

4) गर्मी में सुरभोग से कम नहीं हैं घडे का पानी :-

गर्मीयो के दौरान हमने अक्सर लोगों को घडे के पानी का इस्तेमाल करते देखा हैं। अगर घडे अथवा मटके के लाभों की गणना की जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा की मानवों के लिए घडे का पानी एक सुधा रूपी जल हैं।मिट्टी में जल को बिना कुछ किए ही शुद्ध करने का गुण होता हैं जिसकी वजह से पानी साफ बना रहता हैं। घडे का पानी आंशुघात अथवा हीटस्ट्रोक से भी बचाता हैं। मेटाबोलीज्म बढ़ाने व ऐसिडिटी को नियंत्रित करने में भी घडे का पानी सहायक होता हैं।मटके का पानी छोटे बच्चों को अक्सर फ्रिज के पानी से जुखाम हो जाता हैं लेकिन मटके का पानी सदैव ही प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता हैं जिसकी वजह से यह गले को नुकसान नहीं पहुंचता।

5) खाने में मिट्टी की हांडी का होने लगा है इस्तेमाल:-

अभी बीते कुछ समय में मिट्टी के हांडी में सब्जियो को पकाने का प्रचलन शुरू हुआ है। इनमें हांडी पनीर व हांडी खीर भी शामिल है। इन सभी खाद पदार्थों को मंद आंच पर पकाया जाता है और धीरे धीरे यें मिट्टी द्बारा निर्मित स्वाद अपने अंदर समेटने लगते है और इसी वजह से इनका स्वाद अन्य धातुओं के बर्तनों से अलग व अच्छा होता है।

6) इतिहासकारों के लिए भी है खास :-

मिट्टी के बर्तन किसी भी इतिहासकार के लिए हमेशा से ही खास रहे है।उत्तखनन कार्य के दौरान बहुत बार इतिहासकारों को मिट्टी के बर्तनों की प्राप्ति हुई है।इन बर्तनों के द्बारा ही हमें किसी भी सभ्यता की प्राचीनता की जानकारी मिलती है उदहारण के लिए उत्तर प्रदेश के बागपत में मिले महाभारत कालीन 3800 साल पुराने मिट्टी के बर्तनों के अवशेष और इन बर्तनों की प्राचीनता पुष्टि ए.एस.आई. ने भी की है।

7) मिट्टी के दिए भी कुछ कम खास नहीं:-

भारत वर्ष में मिट्टी के दियो को तेल एवं घी द्बारा प्रज्वलित करने की परंपरा के एक लंबे समय से चलती चली आ रही है।प्रज्वलित दीपक सदैव ही उत्साह, उत्सव , आनंद, ऊर्जा एवं सकारात्मकत दृष्टिकोण का प्रतीक रहा है। दीपक के जलने से बहुत से हानिकारक रोगाणु एवं कीटाणु नष्ट हो जाते है। इन दियो के खरीदने से जहां एक ओर कुंभारो एवं सूक्ष्म उद्योगों में कार्यरत व्यक्तियों को रोजगार मिलता है तो वहीं दूसरी मौद्रिक अपव्यय भी बचता है क्योंकी आयातों में कमी आने लगती है अतः यह दिए हर तरह से लाभकारी ही होते है।
उपर्युक्त सभी बिंदुओं का सूक्ष्म अवलोकन कर के यह कहा जा सकता है की मिट्टी के बर्तनों का उपयोग जहां एक ओर हमें बीमारियों से बचाता है तो वहीं दूसरी ओर इनका उपयोग अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित होता है

8 COMMENTS

  1. Well most of the big restaurants are using these ClayPot utensils as a gimmick to attract customer attention!
    Even some dishes are named with ClayPots just to boost the customer attention. Example – Handi Paneer, Chicken Handi, Dal Handi, etc.

    It do add an extra flavour to our taste buds, an extra aroma to the dish, & increases the minerals for our health.

    If i take an example, the tourists who visits India, have showcased our culture, tradition & specialities over YouTube!

    The way they praise our culture & get in love with India, made us feel more patriotic & attentive towards our tradition.
    Nowdays, Indian people are exploring more of Indian food & dishes rather then that of western!
    Taking an edge, restaurants have started using ClayPot utensils, Copper utensils to give them a feel of “Pure Indian Flavours”.

    Well at the end, i would like to add that we should too start using ClayPot utensils at our home, as it is healthy & cheaper.

  2. Very informative and well written article.👍
    Even today people in rural areas use earthern utensils and hence they have better immunity than urban people. Earthern pots are not just good for health but also are inexpensive and easily available.

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