बाबा वीरेन्द्र देव : भटक रही सी0 बी0 आई- भूमिगत हुआ तिलस्मी बाबा

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प्रदीप कुमार पाठक

उ0 प्र0 के फर्रूखाबाद जनपद की तहसील कायमगंज के ग्राम अहमदगंज के एक साधारण ब्राहमण परिवार में जन्में बाबा वीरेन्द्र देव दीक्षित एवं उनके देश-विदेशों में स्थापित अनेकों ईश्वरीय विश्वविधालय केन्द्र जिनका रहस्य और तिलस्म देवकी नंदन खत्री द्वारा रचित उपन्यास चन्द्रकांता की रहस्यमयी दुनिया से कम कर नहीं आंका जा सकता.

जिसके तिलस्म और रहस्यों को फर्रूखाबाद प्रशासन ही नहीं उ0प्र0 शासन बाबा पर 1998 एवं 2011 में लगे कई अपहरण एवं बलात्कार के आरोपों के बाद भी भेद नहीं सका, इस दौरान बाबा जेल भी गया लेकिन बाबा पर अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाने वाले अपने आरोंपों को सत्य सावित नहीं कर सके.

बलात्कार की शिकार एवं अपहरित बतायी जाने वाली बालाओं ने बाबा वीरेन्द्र देव के विरूद्ध लगाये गये आरोपों का स्वंय खण्डन कर हमेशा बाबा को राहत दिलायी, इसी कारण बाबा आज तक अपनी रहस्यमयी दुनिया एवं तिलस्म को बरकरार रखें हुये है.

अब उसके रहस्य और तिलस्म को भेदने के लिए देश की सर्वोच्च खुफिया जाँच एजेन्सी सी0बी0आई0 सक्रिय हो गई हैं, उसके सक्रिय होते ही बाबा भूमिगत हो गया जिसका अभी तक कोई अता-पता नहीं लग सका बाबा पर पाँच लाख का ईनाम घोषित कर सी0बी0आई0 ने बाबा के कम्पिल( फर्रूखाबाद) एवं सिकत्तर बाग (फर्रूखाबाद) के आश्रमों पर नोटिस चस्पा कर दिया आश्चर्य है कि सी0बी0आई0 तमाम प्रयासों के बाद भी इन आश्रमों के मुख्य द्वारों को खुलवाकर भीतर प्रवेश नहीं कर सकी।

1998 के बाद 28 अगस्त 2011 को भी बाबा वीरेन्द्र देव एवं उनके अध्यात्मिक केन्द्र चर्चा में आये थे, 2011 में फर्रूखाबाद स्थिति सिकत्तर बाग आश्रम पर बांदा अलीगंज निवासी राकेश की शिकायत पर उसकी पुत्री मीना को बरामद करने के लिए तत्कालीन फर्रूखाबाद पुलिस ने छापा मारा था.

काफी मशक्कत के बाद मीना की बरामदगी हो सकी थी, बरामदगी के लिये पुलिसिया कार्यवाही और आश्रम के कर्ता धर्ताआंे की गतिविधियाँ उस समय किसी नाटक से कम नजर नहीं आ रहीं थी, पुलिस आश्रम के गेट को खुलवाना चाह रही थी, पर गेट नहीं खोला जा रहा था.

पुलिस ने आश्रम को चारों ओर से घेरकर डेरा डाल दिया, आका्रेशित भीड़ ने भी आश्रम को घेर लिया एक भयावनाह स्थिति उत्पन्न हो गई, तत्कालीन फर्रूखाबाद के पुलिस अधीक्षक ओ0 पी0 सागर एवं सी0ओ0 नगर विनोद कुमार भी भारी पुलिस फोर्स के साथ आश्रम पहुँचंे थे.

जिन्होंने भारी दबाव बनाकर आश्रम का गेट खुलवाया आश्रम का कोना-कोना छाना गया लेकिन मीना को बरामद नहीं किया जा सका, इस पर पुलिस अधिकारियों ने आश्रम के देख- रेख करने वाले कर्मचारियो एवं संवासनीयों को जेल भेजने की धमकी दी, तब उन लोगों ने उसी आश्रम से मीना को बरामद करा दिया था, मीना का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई मीना के न्यायलय में हुये व्यानों के बाद उसे उसके परिजनों के साथ रवाना कर दिया गया था.

तत्कालीन पुलिस ने मीना की बरामदगी के लिए मारे गए छापे के दौरान आश्रम से कई नावालिग लड़कियों को बरामद किया था को बिना किसी कार्यवाही के छोड़ दिया था, जिसका काफी विरोध हुआ जो अखबारों में सुर्खिया बना इन्हीं सुर्खियों के बजह से देश के विभिन्न कोने से गायब हुई बालिग और नावालिग लड़कियों के माता-पिताओं ने फर्रूखाबाद की ओर रूख किया था.

बडौंत जनपद बागपत की चार वर्षीय ध्रुवी के परिवारिजन भी फर्रूखाबाद आये थें, उनके पास वह अखबार भी था जिसमें सिकत्तर बाग आश्रम पर पुलिसिया कार्यवाही एवं बरामद नावालिग एवं वालिग लड़कियों की फोटुये छपी थी, जिसमें एक फोटो ध्रुवी की भी थी, ध्रुवी के परिवारिजनों ने वह अखबार दिखाकर फर्रूखाबाद के तत्कालीन पुलिस इन्सपैक्टर कालू राम दोहरे से धु्रवी को बरामद करने का अनुरोध किया था.

इस पर उक्त इन्सपैक्टर ने ध्रुवी के परिवारियों को ध्रुवी की बरामदगी के लिये बड़ौत से वारंट लाने की बात कह उन्हें टहला दिया, वह तत्कालीन फर्रूखाबाद के ए0डी0एम0 से मिले ए0डी0एम0 ने फर्रूखाबाद पुलिस को धु्रवी को बरामद करने का आदेश दिया, जिसे भी तत्कालीन पुलिस ने नहीं माना और आश्रम का सर्चवारंट लाने की बात कहकर परिवारिजनों को चलता कर दिया.

इसी बीच बड़ौत पुलिस भी फर्रूखाबाद पहुँच गई, लेकिन तत्कालीन फर्रूखाबाद पुलिस ने ध्रुवी को बरामद करने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई अगले दिन यानि 01सितम्बर 2011 को आको्रशित भीड़ ने सिकत्तर बाग आश्रम पर धाबा बोल दिया आश्रम में तोड-फोड़ शुरू कर दी, सेवादारों की पिटाई शुरू हो गई, तब कहीं फर्रूखाबाद पुलिस जागी और आश्रम की ओर रवाना हुई तब तक हालात काफी भयानक हो चुके थंे.

भीड़ के दबाव में आश्रम की तालाशी हुई आश्चर्य तो यह रहा कि आश्रम से धु्रवी तो ध्रुवी रही 28 अगस्त 2011 को पुलिस द्वारा बरामद कर छोड़ दी गई, लड़कियाँ भी बरामद नहीं हो सकी, उस समय धु्रवी के परिवारिजनों ने फर्रूखाबाद पुलिस पर आश्रम से साँठ-गाँठ किये जाने का आरोप लगाते हुये कहा था कि पहले पुलिस ने नावालिग लड़कियों को बरामद कर नियम विरूद्ध छोड़ दिया और बाद में उन लड़कियों को जिनमें धु्रवी भी थी को अन्यत्र ले जाने का अवसर प्रदान किया.

जिससे धु्रवी को बरामद नहीं किया जा सका यह घटना अखबारों में सुर्खियों के रूप में सामने आयी इससे विभिन्न स्थलों से अपहरित लड़कियों के माता-पिता सिकत्तर बाग एवं कम्पिल आश्रम की ओर आने लगे नंदनगरी दिल्ली के पवन अपनी 6 वर्षीय पुत्री को खोंजने अखबार में छपी फोटो लेकर आये, तत्कालीन पुलिस से सम्पर्क साधा लेकिन उन्हें भी तत्कालीन पुलिस ने आश्रम तक नहीं जाने दिया.

इसी प्रकार बिहार मिर्जापुर थाने के चील क्षेत्र के ग्राम हरिसिंहपुर के सुरेश अपनी नावालिग पुत्री कंचन व रामनरेश अपनी नावालिग पुत्री बन्दना जिसकी फोटो अखवारों में छपी थी, को लेने आये उन्हें भी तत्कालीन फर्रूखाबाद पुलिस ने बैरंग वापिस भेंज दिया, जो आज भी रहस्य बना हुआ है.

तत्कालीन फर्रूखाबाद के जिलाधिकारी रिग्जयान सैम्फिल ने तमाम दवाव के बाद सारी घटनाओं की जाँच मजिस्ट्रेट से कराने के आदेश दिये थे जो कछुयें की चाल चलकर सिर्फ बयानों को लेने की प्रक्रिया के रूप में बनी रही और माहौल ठंडाते ही सब कुछ बंडल में बंध गया,

2011 में बाबा वीरेन्द्र देव दीक्षित के सिकत्तर बाग आश्रम में हुये हंगामें के बाद महिला आयोग और बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने आश्रम का निरीक्षण किया उत्तर प्रदेश शासन को रिर्पोट भेजी उसका क्या हुआ आज तक मालूम नहीं पडा़? महिला आयोग की तत्कालीन सदस्या नीरजा तिवारी ने आश्रम के निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुये कहा था कि बाबा वीरेन्द्र देव का सिकत्तर बाग आश्रम के सामने मुगलकालीन किला भी मात खा जाएगा.

आश्रम की दीवारे, छज्जे, छतें सभी लोंहे के काटंेदार तारों के बाणों से ढके है, आश्रम का एक चोर दरवाजा पीछे गली में खुलता है, जिसमें अन्दर से ताला लगा रहता है, मेन गेट एवं पीछे कुंडी सिर्फ अन्दर से लग सकती हैं, मेन गेट लोहे का है, इसके पीछे लोहे के शटर हैं, फिर लकड़ी का दरवाजा है, आश्रम के भूतल में बने कमरे तो सामान्य है, मगर खिड़किया नहीं है, जिसमें सीलन के कारण बदबू भरी रहती हैं.

आश्रम के बीच में आँगन हैं उसके ऊपर मजबूत लोहे का जाल हैं, दूसरी और तीसरी मंजिल पर भी जाल लगा हुआ ह,ैं अन्दर हवा आने का एक मात्र यही जरिया हैं, ग्राउण्ड फ्लोर से ऊपर जाने वाली सीड़िया काफी तंग हैं पहली मंजिल में डिब्बेनुमा कमरें जिनकी ऊँचाई चार से पाँच फिट हो सकती है नीरजा के अनुसार इन कमरों में कोई सामान नहीं हैं बल्कि उनमें लड़कियाँ बैठती अथवा लेटती हैं, ऐसा ही कुछ नक्शा आश्रम का तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों को बताया था,

9 सितम्बर 2011 को फर्रूखाबाद के तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट ने भी सिकत्तर बाग आश्रम का निरीक्षण किया था, तब आश्रम मे रह रही बाबा वीरेन्द्र देव की शिष्याओं ने उन्हें बताया था कि लड़कियों को यहाँ अध्यात्मिक शिक्षा दी जाती ह,ै अंग्रेजी, हिन्दी का ज्ञान दिया जाता है लेकिन नगर मजिस्टेªट को निरीक्षण के समय आश्रम के अन्दर एक भी स्लेट तक प्राप्त नहीं हुई थी.

उस समय आश्रम के आस-पास के लोगों ने बताया था कि आश्रम के अन्दर कौन आता है? कौन जाता है? क्या होता है? उन्हें नही मालूम है,मेन गेट हमेशा बंद रहता हैं, अंधेरे मंे काफी रात में कुछ कारों का आवागमन कभी-कभी होता है, उन कारो मे कौन होता है? यह वे नही जानते, उन कारो से कौन जाता है? यह भी वे लोग नही जानते.

इतने रहस्य के बाद भी फर्रूखाबाद प्रशासन अथवा उत्तर प्रदेश शासन ने बाबा वीरेन्द्र देव एंव उसके आश्रमों के रहस्य को जानने का प्रयास नहीं किया आश्रम मंे रह रही बालिग अथवा नबालिग लड़कियों को कौन सी शिक्षा दी जाती है? उससे लड़कियों का या राष्ट्र का क्या भला होता है? करोड़ो रूपयों की संपत्ति कैसे और कहाँ से एकत्रित होती है?

नाबालिक लड़कियों को आश्रम में रखना कानून के तहत आता है अथवा नही इसका पता लगाने की आवश्यकता नही समझी इसी कारण बाबा वीरेंद्र देव एंव उसके अनगिनत आश्रम अभी तक अपने रहस्य और तिलस्म को वरकरार रखे हुये है.

बाबा वीरेन्द्र देव का सिकत्तर बाग फर्रूखाबाद ईश्वरीय विश्वविद्यालय केन्द्र 28 अगस्त 2011 को बांदा के रिक्शा चालक राकेश की पुत्री मीना की बरामदगी के बाद सुर्खियांे मे आया, इससे पहले 30 मार्च 1998 को बाबा वीरंेद्र देव का मुख्य आश्रम जो कम्पिल फर्रूखाबाद मे गंगा रोड पर स्थित है, चर्चा मे आ चुका था.

कोलकाता की एक युवती कोनिका वर्मन के पिता ने कम्पिल थाने को एक सूचना दी कि उनकी पुत्री को बाबा वीरेंद्र देव अपने कम्पिल आश्रम मे बंधक बनाकर उसका यौन उत्पीड़न कर रहा है, तत्कालीन कम्पिल पुलिस ने कोनिका को बरामद कर आश्रम के कई लोगांे सहित कोनिका और उसके पिता गोपाल वर्मन सहित लगभग एक दर्जन लोगों को 107/116 की कार्यवाही कर इतिश्री कर दी बरामद लड़की कोनिका को नारी निकेतन भेज दिया.

इसके बाद 3 अप्रैल 1998 को अहमदाबाद के पुरूषोत्तम भाई पटेल ने अपनी पुत्री मीना कुमारी को बरगला कर बलात्कार एंव मानसिक उत्पीड़न का आरोप बाबा वीरेंद्र देव एंव उनकी पत्नी कमला एंव कर्नाटक की शान्ता बहन के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराया, उसी बीच 16 अप्रैल 1998 को कम्पिल पुलिस द्वारा आश्रम मे बिजली चोरी के आरोप मे बाबा वीरेंद्र देव दिक्षित, रविंद्रदास, जगन्नाथ, महेश जनार्दन, मनोरंजन, कोपली एंव शान्ता बहन सहित आठ लोगों पर छापे के दौरान पुलिस मुजामत का आरोप लगाते हुए मुकदमा कायम किया.

16 अप्रैल को ही मथुरा की तारा देवी की तहरीर पर पुलिस ने वीरेन्द्र देव उनकी पत्नी कमला एंव शान्ता बहन पर 376 एंव 120 वी0 का मुकदमा पंजीकृत किया 17 अप्रैल 1998 को शाहदरा दिल्ली की जया भारद्वाज की एक तहरीर पर बाबा वीरेन्द्र देव उनकी पत्नी कमला, शान्ता बहन रविन्द्र दास एवं ड्रायवर महेन्द्र के विरूद्ध 376/ 504 एवं 120 वी0 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया.

14 मई 1998 को नारनौल हरियाणा की रेणुका ने वीरेन्द्र देव एवं शान्ता बहन पर बलात्कार ऐसे गंभीर आरोप लगाकर कम्पिल थाने मे 376/ 342/109 एवं 114 आई.पी.सी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया बाबा वीरेन्द्र देव को अपने सहयोगियो के साथ तब जेल की यात्रा भी करनी पड़ी थी.

अब बाबा वीरेन्द्र देव दीक्षित पर देश की राजधानी दिल्ली के रोहणी थाने मे दुष्कर्म का मुकदमा कायम हुआ जो दिल्ली के उच्चन्यायालय तक जा पहुचाँ न्यायालय के आदेशों पर ही अब बाबा वीरेन्द देव दीक्षित के विरूद्ध सी0बी0आई0 जाँच कर रही है, बाबा वीरेन्द्र देव सी0बी0आई0 के हाथ अभी तक नहीं लगा है , इसी कारण सी0बी0आई0 ने उस पर पाँच लाख का ईनाम घोषित किया है ।

1998 और 2011 की घटनाओं में काफी सामान्तायें देखने को मिलती है, उसमे आश्रमों की गोपनीयता मुख्य है, जाँच अधिकारियों को 1998 मे आश्रम और उसके संचालक पर पड़े रहस्य के पर्दे को उठाने मे सफलता नही मिली थी, 2011 मे भी ऐसा ही हुआ 1998 और 2011 मे पुलिस को आश्रमवासियों का भारी विरोध झेलना पड़ा था.

सी0बी0आई भी कम्पिल और सिकत्तर बाग आश्रम के गेटों को खुलवाने मे सफल नही हुई, 1998 में कई राजनीतिक दलो के नेताओं ने आश्रम और बाबा वीरेन्द्र देव दीक्षित का उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुये शासन प्रशासन को पत्र भेजे थे, बाबा पर लगे आरोपों की जाँच सी0बी0सी0आई0डी से कराने की मांग भी की गई थी.

2011 में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने चुप्पी साध ली थी 2011 में बाबा के विरोध में जनाक्रोश देखने को मिल रहा था, धरना प्रदर्शन होता हुआ भी देखा गया था, 1998 में तत्कालीन फर्रूखाबाद के पुलिस अधीक्षक गुरूवचनलाल पर बाबा वीरेन्द्र देव के कम्पिल आश्रम से नाजायज लाभ न उठा पाने के कारण बाबा वीरेन्द्र देव की विरोधी संस्थाये ब्रहमा कुमारी एवं विश्व परिवर्तन जिन्हें ब्रहमा एवं विष्णु पार्टी भी कहा जाता है से सहयोग लेकर बाबा वीरेन्द्र देव की कम्पिल में स्थिति अध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविधालय जिसे शंकर पार्टी भी कहा जाता है को हैरान और बदनाम करने का आरोप भी लगा था.

ब्रहमाकुमारी आश्रम के अन्र्तराष्टीªय केन्द माउण्ट आबु से उस समय एक पत्र फर्रूखााबाद प्रशासन को भेजा गया था जिसमें लिखा गया था कि बाबा वीरेन्द्र देव उनकी संस्था की नकल कर कम्पिल अध्यात्मिक केन्द्र का संचालन कर रहे है मिलता-जुलता नाम रख वह भ्रम उत्पन्न कर रहंे है.

माउंण्ट आबु से वीरेन्द्र देव के कम्पिल आश्रम से किसी भी प्रकार का सम्बंध न होने की बात भी कही थी, अहमदाबाद के दशरथ पटेल (विष्णु) पार्टी का नाम भी उस समय की जाँच एवं बयानों के सामने आया था, सन् 2011 में प्रजापति ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्वविधालय की तत्कालीन सेवा केन्द्र संचालिका गीता बहन ने उस गर्म माहौल में एक बयान जारी कर कहा था कि सिकत्तर बाग स्थित बाबा वीरेन्द्र देव का आश्रम हमेशा विवादों के घेरे में रहता है बलात्कार, अपहरण, ब्लैक मेंलिग, इन्कम टैक्स चोेरी एवं अन्य अनैतिक कार्यों में लिप्त रहने से गंभीर आरोप उक्त आश्रम और उसके संचालक वीरेन्द्र देव पर लगते चले आये हैं.

उन्होंने यह भी कहा की वीरेेेन्द्र देव के उनकी संस्था से मिलता‘-जुलता नाम डेªस एवं चित्रों के माध्यम से लोगों को भ्रमित कर रखा है उन्होंने कहा की माउंण्ट आबु से बाबा वीरेन्द्र देव का कोई वास्ता नहीं हैं, 1998 में भी माउण्ट आबु के एक प्रवक्ता ने कुछ ऐसा ही कहा था.

बाबा वीरेन्द्र देव एवं उनके आश्रमों पर जब कभी भी आरोपों का दौर चलता है, तो प्रजापति ईश्वरीय विश्वविधालय माउंण्ट आबु एवं अहमदाबाद के दशरथ पटेल की विश्व परिवर्तन अध्यात्मिक विश्वविधालय जो अब बन्द हो चुका है, को अपनी-अपनी सफाई देने के लिए आगे आना पड़ता हैं,इसके पीछे एक बड़ी कहानी है.

जो एक दूसरे को पूर्व में जुड़ंे होने का सबूत देती है, इसको खोजने के लिए बाबा वीरेन्द्र देव के जीवन के शुरूआती क्षणों को देखना आवश्यक हैं बाबा वीरेन्द्र देव का जन्म फर्रूखाबाद के कायमगंज तहसील के ग्राम अहमदगंज के एक साधारण ब्राहमण परिवार में हुआ था, बाबा वीरंन्द्र देव अपने पिता सोहन लाल के विचारों सेे भिन्न विचारों के रहे इसी कारण उनके पिता ने उन्हें अपने यहाँ से निकाल दिया.

चर्चाओं के अनुसार बाबा वीरेन्द्र देव अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुये बाबा वीरेन्द्र देव ने प्रारम्भिक शिक्षा कायमगंज (फर्रूखाबाद ) के पांचाल स्कूल में ग्रहण की बाबा के शिक्षक रहे उक्त स्कूल के तत्कालीन शिक्षक मोहम्मद सफी की पत्नी बेगम नफीसा का कहना था कि बाबा वीरेन्द्र देव का बचपन काफी गरीबी में कटा उनके शिक्षक पति नंे कई बार बाबा वीरेन्द्र देव को कपड़े सिलवा कर दिये.

वह बचपन में उनके आँगन में खेले, कूदे बेगम नफीसा ने एक घटना की याद दिलातें हुये कहा कि एक दिन अपनी भूख मिटाने के लिए वीरेन्द्र कहीं से आटा माँग लाया जिसे उन्होंने वापिस कराकर उसे खाना खिलाया बेगम नफीसा के ही अनुसार वीरेन्द्र बाल काल से ही चतुर बुद्धि का था, उसकी बातों में ऐसा जादू था कि वह जहा बैठता लोग उसी की ओर आकर्षित हो जाते थंे.

कम्पिल आश्रम के पड़़ोस में रहने वाले रामनिवास यादव के अनुसार बाबा वीरेन्द्र देव ने आठवीं तक शिक्षा कम्पिल में ली फिर वह दिल्ली चले गए कायमगंज तहसील के अहमदगंज के रामानंद के अनुसार वीरेन्द्र उनके इसी गाँव के रहने वाले हैं, कायमगंज में किराये के मकान में रहकर उन्होनें एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक का कार्य किया, रामानंद के ही अनुसार बाबा वीरेन्द्र ने उन्हें कक्षा 6 में ट्यूशन पढ़ाई, इसके बाद वह अहमदाबाद चले गये.

रामानंद के ही अनुसार बाबा वीरेन्द्र देव अपने पिता के देहांत के बाद गाँव आए थे, उसके बाद फिर वह अहमदाबाद लौट गए बाद मे पता लगा कि वीरेन्द्र देव बाबा बन गये हैं, उनके कई लोग अनुयायी है, एक बार कई लोग अहमदपुर आये उन लोगो ने बाबा के गृह की मिट्टी माथे पर लगाकर वहाँ एक भव्य आश्रम बनाने की इच्छा जाहिर कर उक्त स्थान को लेने की इच्छा जाहिर की, वही के ग्रीश चतुर्वेदी का कहना है कि वह एक बार बाबा बन चुके वीरेन्द्र देव से मिलने अहमदाबाद गये लेकिन उनकी बाबा से भेंट नहीं हो सकी.

उपरोक्त चर्चाओं के अतिरिक्त एक अन्य चर्चा के अनुसार वीरेन्द्र देव अपना वतन छोड़ अहमदाबाद चले गये जहाँ ज्ञान प्राप्त कर वह माउण्ट आबु बाबा लेखराज के प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में ज्ञान प्राप्त करने लगे 1969 मंे बाबा लेखराज का स्वर्गवास हो गया, उनके स्वर्गवास के बाद उनके आश्रम में वर्चस्व की जंग छिड़ गयी, उस समय वहा अहमदाबाद के दशरथ पटेल का भी काफी दखल था.

वर्चस्व की जंग को जीतने के लिए बाबा वीरेन्द्र देव ने यह प्रचारित करना शुरू कर दिया कि उनके शरीर में शिव बाबा ने प्रवेश कर लिया हैं, अब वह ही ईश्वर के अधुरे कार्याें को पूरा करेगें, उनके इस प्रचार से संघर्ष ने व्यापक रूप ले लिया उसी समय माउण्ट आबु की गुलजार दादी के तन में भी बाप दादा (बाबा शिव) के आने की चर्चा होने लगी.

इस बात का विरोध अहमदाबाद के दशरथ पटेल ने किया और कहा कि गुलजार दादी के तन में भूत आ गया, संघर्ष बढ़ा और बाबा वीरेन्द्र देव और दशरथ पटेल को माउण्ट आबू छोड़ना पड़ा, दशरथ पटेल बाबा वीरेन्द्र देव के खेमें में आ गये यही से गुलजार दादी की ब्रह्मा और बाबा वीरेन्द्र देव की शंकर पार्टी बन गयी.

चर्चाओं के अनुसार शंकर पार्टी ब्रह्मा पार्टी के कई अनुयायी महिलाओं को साथ लेकर दिल्ली चले आये जहाँ सीता नामक एक महिला के यहाँ शंकर पार्टी ने आश्रम खोला 1976 के लगभग शंकर पार्टी जिसके मुखिया बाबा वीरेन्द्र देव बने ने अध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय के नाम से दादा लेखराज के विचारधाराओं और तौर-तरीकों से मेल खातें हुये आश्रम खोंल दिया यहाँ भी वर्चस्व की जंग छिड़ गई.

एक महिला को लेकर विवाद और भी गहरा गया वहाँ वीरेन्द्र देव अन्य सहयोगियों से कमजोर पड़ गये उन्होंने दिल्ली छोंड़ दी और वह कम्पिल वापस आ गये, उन्होंने अपने नाना के मकान में अध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी जो आज करोडा़ें की लागत की सामने खड़ी है, बाबा वीरेन्द्र देव के दिल्ली छोड़ देने के बाद दशरथ पटेल ने अहमदाबाद में विश्व परिवर्तन अध्यात्मिक विश्वविद्यालय की स्थापना की जो विष्णु, पार्टी बनी.

उक्त तीनों ही संस्थाओं में संस्थापक बाबाओं के बाद नारियों का ही वर्चस्व देखने को मिलता है, दशरथ पटेल अपने अध्यात्मिक केन्द्र का संचालन ठीक से नहीं कर सके और उनका अध्यात्मिक केंन्द्र बन्द हो गया जबकि शंकर पार्टी यानी बाबा वीरेन्द्र देव एवं ब्रह्मा पाटी्र यानी दादा लेखराज की संस्थाऐं भारत में ही नहीं अपितु-विश्व के कई हिस्सों में आज भी फल-फूल रही हैं.

बाबा वीरेन्द्र देव के बारे में ज्ञात हुआ है की उनकी देश मे 500 संस्थाऐं स्थापित हैं, जबकि दादा लेखराज की 137 देशों में नौं हजार से भी अधिक सेवा केन्द्र चल रहें हैं, उपरोक्त तीनों ही संस्थाओं में एक अर्से से आज तक वर्चस्व को लेकर संघर्ष जारी है .

28 अगस्त 2011 को सिकत्तर बाग आश्रम से जिस बांदा की मीना की बरामदगी के बाद हंगामा हुआ था, उस मीना ने अपने 164 के व्यानों में बाबा वीरेन्द्र देव एवं आश्रम पर कोई आरोप नहीं लगाया, अपने पिता के अपहरण और यौन शोषण के आरोंपो का खण्डन कर बाबा वीरेन्द्र देव एवं उनके अध्यात्मिक केन्द्र को क्लीन चिट् दे दी.

इसी प्रकार 30 मार्च 1998 को कोलकाता की कोनिका वर्मन जिसे बाबा के कम्पिल केन्द्र से पुलिस ने बरामद किया था, ने भी अपने पिता के सभी आरोपों का खण्डन कर बाबा और उनके कम्पिल केन्द्र को क्लीन चिट् दे दी इसी प्रकार 1998 एवं 2011 में बाबा वीरेन्द्र देव एवं उनके आश्रमों पर लगे एक आध को छोड़कर तमाम बलात्कार एवं अपहरण ऐसे आरोपों से पीड़िताओं के मुकर जाने के कारण न्यायालयों से राहत मिलती रही.

एक आध मामले ऐसे भी हैं, जिनमें पीड़िताओं ने बाबा को राहत नहीं दी हैं, जो न्यायालय में विचाराधीन हैं, उसमें बाबा अभी तक फरार चल रहा है, बांदा कथित अपहरित मीना की माँ विमला ने उस समय पेशी पर लाई गई मीना द्वारा बाबा का समर्थन करने पर कहा था कि बाबा और उसके आश्रम को चलाने वाली महिलायें जादूगरनी है,

वह सम्मोहन क्रिया जानती हैं उनकी छाया पड़तें ही उनकी बेटी आश्रम के प्रति बफादार हो जाती हैं, उसने यह भी कहा था कि आश्रम में खाने में कोई तंत्र विध्या से बनाया गया चूर्ण डाल दिया जाता है, जिससे वहाँ जबरन लाई गई लड़कियां सच्चाई सामने न लाकर आश्रम और बाबा के पक्ष मे बोलने लगती है,

30 मार्च 1998 को कोलकाता की कोनिका वर्मन उसके पिता प्राणगोपाल की शिकायत पर बाबा वीरेन्द्र देव के कम्पिल आश्रम से पुलिस ने बरामद किया था, ने उस समय अपने को बालिग बता कर पिता के साथ जाने से इंकार कर दिया था उस समय विरोधाभासी साक्ष्यों के कारण तत्कालीन मजिस्टेªट ने कोनिका को नारी निकेतन में भेज दिया था.

इस आदेश के विरूद्ध कोनिका उच्चन्यायालय पहुँची जहाँ उसे वालिग मानकर नारी निकेतन से छोड़कर उसकी इच्छानुसार उसे उसकी दिल्ली निवासी बुआ संध्या दुबे की सुपुर्दगी में दे दिया गया था, उसके बाद कोनिका वर्मन ने तत्कालीन मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी फर्रूखाबाद के यहां 156/3 के तहत एक याचिका दाखिल की थी जिसने सारे प्रकरण को उल्टा-पुल्टा कर दिया.

याचिका में कोनिका वर्मन ने कहा कि वह बाबा वीरेन्द्र देव के कम्पिल आश्रम में अध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर रही थी, वह श्यामनगर कोलकाता वेस्ट बंगाल की रहने वाली है, उसकी माँ की मृत्यू हो चुकी है, पिता गोपालवर्मन ने दूसरा विवाह कर लिया हैं, बाबा वीरेन्द्र देव तब माउण्ट आबू में रहकर ब्रह्माकुमारियों को अध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करते थे.

वहां दादा लेखराज के मुरलियों के विश्लेषण तथा व्याख्या के सम्बन्ध में बाबा वीरेन्द्र देव का मतभेद हो गया, और बाबा वीरेन्द्र देव को वहाँ से निकाल दिया गया, माउण्ट आबू की भारी मात्रा में ब्रहमा कुमारी एवं ब्रह्मा कुमार बाबा वीरेन्द्र देव पर अटूट श्रृद्धा रखते थे, वह माउण्ट आबू छोड़ बाबा वीरेन्द्र के साथ हो गये.

इससे रूष्ट होकर माउण्ट आबू से बाबा वीरेन्द्र देव एवं उनके कम्पिल आश्रम के विरूद्ध षडंयत्र शुरू हो गया माउण्ट आबू के इस षड़यंत्र मे अहमदाबाद के विष्णु पार्टी के स्वंय भू दशरथ पटेल भी शामिल हो गये, दशरथ पटेल कैलाशचंद्र, अशोक अहूजा एवं चतुर्भुज अग्रवाल ने एक षडं़यत्र के तहत उसके पिता गोपाल वर्मन को अपने साथ मिलाकर 6 फरवरी 1998 को सभी लोग कम्पिल आश्रम आये जहाँ उससे झूठ बोलकर कि उसकी दादी मृत्यु शैय्या पर हैं, उसे अपनंे साथ ले गये.

याचिका के अनुसार 8 फरवरी 1998 को वह जगदल स्टेशन पर उतर कर चतुर्भुज के यहां पहुँची जहां सभी लोगों ने उस पर कम्पिल आश्रम में व्यभिचार होता है एवं बाबा वीरेन्द्र देव को बलात्कारी बताने के दबाव के साथ उसे दशरथ पटेल की विष्णु पार्टी में शामिल होने की बात कही उसके मना करने पर उसे मारा पीटा गया एक कमरे में बन्द कर उसके कपड़े फाड़कर बलात्कार करने का प्रयास किया उसकी नग्न फोटो भी खींची गई.

उसकी चीख पुकार सुन कई लोग आ गये जिन्होंने उसे घर पहुँचाया, जहाँ उसे मालूम हुआ कि उसके पिता ने उसे दशरथ पटेल की पार्टी को बेच दिया हैं, याचिका के समय कोनिका की बुआ संध्या भी उपस्थित थी, कोनिका के पिता गोपाल वर्मन को इस प्रकरण में जेल भी जाना पड़ा था, कोनिका की याचिका ने ब्रह्मा, विष्णु, एवं शंकर पार्टी क्या हैं? वहां क्या होता हंै? की ओर इशारा तो कर ही दिया था, लेकिन सब कुछ ठण्डे बस्तें में पड़ा रहा.

1998 में बाबा वीरेन्द्र देव के मुख्यालय कम्पिल आश्रम पर छापा पड़ने के बाद फर्रूखाबाद की सिकत्तर बाग कालोनी में एक लाम्बा नामक सरदार से जमीन क्रय कर बाबा वीरेन्द्र देव का सिकत्तर बाग आश्रम बना 1998 में चर्चा में आने के बाद बाबा वीरेन्द्र देव के बैंक खातें आयकर और खुफियां विभाग ने चैक किये थे, जिसमें अकूत संपत्ति आश्रम के नाम होने की चर्चा रही थी.

सच्ची दुनिया के दिनांक 2011 के अंक में प्रकाशित बाबा के सम्बंध में एक लेख में कहा गया था कि बाबा वीरेन्द्र देव के देश में लगभग 50 एवं विदेशों में लगभग दो दर्जन कम्पिल एवं सिकत्तर बाग के भाँति आश्रम हैं, उसी लेख में कहा गया कि कभी बाबा के शिष्य रहें दिल्ली के राजेन्द्र नगर गोल्ड स्टार कम्युनिकेशन के डायरेक्टर विजय कुमार ने बाबा वीरेन्द्र देव पर सीधा आरोप लगाया था कि वह अश्लील सी0डी0 बनवाता है जिससे उसे करोडों की आय होती है.

संस्था से जुड़े रहे अशोक भाई, कैलाश भाई, रामप्रताप चैहान, विजय राघवन आदि ने उस समय फर्रूखाबाद मे आकर वहाँ के तत्कालीन ए0डी0एम0 के सामने वयान देकर कहा था कि बाबा वीरेन्द्र देव अध्यात्म के नाम पर शिष्याओं से दुराचार करता है, जो फाइलों मे ही कैद होकर रह गये, उसी समय विष्णु पार्टी जो अब विलुप्त हो गई हैं के संचालक दशरथ पटेल ने कहा था कि यदि ब्रह्मा पार्टी यानि दादा लेखराज माउण्ट आबु की पार्टी जरासिन है, तो शंकर पार्टी यानि बाबा वीरेन्द्र देव की पार्टी रावण है।

ब्रह्मा-विष्णु और शंकर पार्टियों का क्या उद्देश्य हैं,तमाम बबालों के बाद भी सामने नहीं आया, अब एक यक्ष प्रश्न है कि बाबा वीरेन्द्र देव के विरूद्ध चल रही सी0बी0आई जाँच में वह सब कुछ सामने आ जायेगा जिसका इन्तजार 1998 से आम लोग कर रहे हैं, सच यदि सामने आता है तो बाबा वीरेन्द्र देव के शंकर पार्टी का आ सकता है विष्णु एवं ब्रह्मा पार्टी पर पड़ें रहस्य के पर्दे का अनावरण सम्भव नहीं क्योंकि सी0बी0आई0 बाबा वीरेन्द्र देव के विरूद्ध ही न्यायालय के आदेश पर जाँच कर रही है.

भारतीय जनमानस विभिन्न धर्मों से जुड़ा हैं हमारा संविधान भी धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, इसका ही लाभ उठाकर हमारे देश में अनेकों स्वंय भू भगवान सामने आतें रहतें हैं, वह आस्था से जुड़कर इतने शक्तिशाली हो जाते है कि उनके तिलस्म को तोड़ा जाना काफी मुुश्किल हो जाता हैं, वोट की राजनीति के रहते तमाम राजनेताओं का इन स्वंय भू भगवानों के आश्रमों को संरक्षण मिलता हैं.

ऐसे स्वंय भू भगवानों एवं उनके आश्रमों पर जब कोई कार्यवाही होती है, तो आस्था से जुड़ा जनमानस एक बड़े विरोध के रूप में सामने खड़ा हो जाता हैं, पिछले एक आध दशक से कई स्वंय-भू भगवानों की ऐसी कहानियाँ सामने आ चुकी हैं, जो समाज एवं धर्म के लिए कलंक समान हैं, बाबजूद इसके समाज अपने अन्धविश्वास को त्यागने के लिए वह तत्पर्ता नहीं दिखा रहा हैं, जो उसे दिखानी चाहिऐ.

हमारा वुद्धजीवी वर्ग भी कुछ ऐसा नहीं कर रहा हैं जिससे अन्धविश्वास के साये से समाज अपने को दूर रखने के लिए जागरूक हो सके, यही कारण है कि आज भी अनेकों स्वंय-भू भगवानों का नकाव हटने के बाद भी तमाम स्वंय-भू भगवान धर्म के नाम पर गंदगी फैला रहे हैं, और समाज का दोहन कर रहंे है.

इन स्वंय-भू भगवानों को हमारा लचार कानून भी बढावा दे रहा है, यह किसी भी दशा मे उचित नही है कि धर्म की आड़ में ऐसे स्वंय भू भगवानों को लोगों की आस्था से खिलबाड़ करने दिया जाता रहें, जब वह समाज को छक कर लूट ले तब उन पर कार्यवाही वह भी भयभीत होकर की जाये, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, अब ऐसा कानून बनाने की मजबूरी सामने है, जिससे संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता की आड़ में जो खेल हो रहा उस पर अंकुश लग सके।

ब्रह्मा, विष्णु , एवं शंकर पार्टियाँ क्या हैं ? इनका उद्देश्य क्या हैं? यह अपने केन्द्रों में कौन सी अध्यात्मिक शिक्षा देते हैं इससे शिष्याओं एवं राष्ट्र का क्या भला होता है? सामने आना ही चाहिऐ, शंकर पार्टी यानि बाबा वीरेन्द्र देव दीक्षित एवं उनके आश्रमों पर बार-बार आरोप लगते हैं, और वह धुल भी जाते हैं आखिर कैसे?

जाँच का एक अहम मुद्दा हैं एक बिन्दू यह भी हैं कि क्या किसी आश्रम में नावालिग एवं अबोध लड़कियों को रखना जायज हैं? ऐसे किस प्रकार नावालिग लड़कियों के हितों की रक्षा हो सकती हैं, आश्रमों की संपत्तियों में लगातार इजाफा होना किस रहस्य से जुड़ा हुआ हैं.

ऐसे तमाम रहस्यों से पर्दा उठना अब बेहद आवश्यक हैं जनता को जागरूक कर धर्म की रक्षा करना अन्धविश्वास को हटाना बेहद आवश्यक हैं इसके अभाव में भारत को धार्मिक माफियाओं से छुटकारा दिला पाने की बात करना बेईमानी हैं, क्योंकि धार्मिंक माफिया रक्तबीज समान हैं,

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